नई दिल्ली। YouTuber ध्रुव राठी से जुड़े वीडियो विवाद में Google ने दिल्ली हाई कोर्ट के सामने बड़ा अपडेट दिया है। Google की ओर से अदालत को बताया गया कि हिंदू देवी-देवताओं को लेकर टिप्पणी वाले संबंधित वीडियो के भारत में प्रसार को रोक दिया गया है। यह कार्रवाई सरकार की शिकायत अपीलीय समिति (GAC) के आदेश के बाद की गई है।
मामला ऐसे वीडियो से जुड़ा है, जिनमें हिंदू देवी-देवताओं के मांस और शराब के सेवन से संबंधित टिप्पणी किए जाने का आरोप है। इन वीडियो को लेकर याचिका दायर की गई थी और अदालत से इनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी।
Google ने दिल्ली HC को क्या बताया?
सुनवाई के दौरान Google की तरफ से दिल्ली हाई कोर्ट को बताया गया कि संबंधित वीडियो को भारत में ब्लॉक कर दिया गया है। कंपनी के अनुसार, यह कदम शिकायत अपीलीय समिति के आदेश के बाद उठाया गया।
बताया गया कि GAC ने दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व निर्देश के आधार पर मामले में आदेश पारित किया था। इसके बाद Google ने आदेश का पालन करते हुए भारत में इन वीडियो के प्रसार पर रोक लगा दी।
इस घटनाक्रम से साफ है कि फिलहाल संबंधित वीडियो भारत में सामान्य रूप से उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि, मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से इस कार्रवाई की सीमा को लेकर भी सवाल उठाया गया।
क्या थी याचिकाकर्ता की मांग?
इस मामले में याचिकाकर्ता और अधिवक्ता अमिता सचदेवा की ओर से याचिका दायर की गई थी। याचिका में संबंधित वीडियो को हटाने के निर्देश देने की मांग की गई थी।
सुनवाई के दौरान सचदेवा ने अदालत के सामने दलील दी कि वीडियो को भारत में ब्लॉक किए जाने के बावजूद उसे पूरी तरह से देखना असंभव नहीं है। उनके अनुसार, भारत के बाहर मौजूद लोग अभी भी इन वीडियो तक पहुंच सकते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत के भीतर VPN (Virtual Private Network) का इस्तेमाल करने पर भी इन वीडियो तक पहुंच संभव हो सकती है।

अब पूरी दुनिया से वीडियो हटाने की मांग
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में यह मांग भी उठाई गई कि संबंधित वीडियो को केवल भारत में ब्लॉक करने के बजाय दुनियाभर से हटाने का आदेश दिया जाए।
यानी विवाद का अगला बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित वीडियो की उपलब्धता केवल भारत में रोकी जाएगी या अदालत से इनके वैश्विक स्तर पर हटाने को लेकर भी कोई निर्देश दिया जाएगा।
भारत में किसी ऑनलाइन सामग्री को ब्लॉक किए जाने और उसे पूरी तरह इंटरनेट से हटाए जाने के बीच अंतर होता है। भारत में ब्लॉक होने के बाद भी किसी सामग्री की पहुंच दूसरे देशों में बनी रह सकती है। इसी बिंदु को लेकर याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष अपनी बात रखी।
शिकायत अपीलीय समिति का आदेश क्यों अहम?
इस मामले में शिकायत अपीलीय समिति (GAC) की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। Google ने अदालत को बताया कि भारत में वीडियो के प्रसार को रोकने की कार्रवाई GAC के आदेश के बाद की गई।
GAC से जुड़े आदेश का उल्लेख ऐसे समय में हुआ है जब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सामग्री को लेकर शिकायतों और उनके निपटारे की प्रक्रिया लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।
इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व कार्यवाही के बाद GAC ने आदेश पारित किया और उसके बाद संबंधित वीडियो को भारत में ब्लॉक किया गया।
VPN को लेकर क्या है विवाद?
याचिकाकर्ता की ओर से सुनवाई के दौरान उठाया गया VPN का मुद्दा भी इस मामले का अहम हिस्सा बन गया है। VPN के जरिए उपयोगकर्ता अपनी इंटरनेट कनेक्शन की लोकेशन को अलग तरीके से दिखा सकते हैं और कई बार ऐसे कंटेंट तक पहुंच बना सकते हैं जो किसी खास क्षेत्र में प्रतिबंधित या ब्लॉक किया गया हो।
याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि वीडियो भारत में ब्लॉक होने के बावजूद VPN के जरिए देखा जा सकता है, तो केवल भारत में ब्लॉक करने से उद्देश्य पूरी तरह हासिल नहीं होता।
इसी वजह से दुनिया भर से वीडियो हटाने की मांग अदालत के सामने रखी गई है।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल Google ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया है कि संबंधित वीडियो के भारत में प्रसार को रोक दिया गया है। दूसरी ओर, याचिकाकर्ता ने इस कार्रवाई को पर्याप्त नहीं बताते हुए वीडियो को वैश्विक स्तर पर हटाने की मांग की है।
ऐसे में मामले में आगे की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह सवाल महत्वपूर्ण रहेगा कि संबंधित सामग्री के खिलाफ कार्रवाई की सीमा क्या होनी चाहिए और क्या भारत में ब्लॉक किए गए वीडियो को दुनिया के अन्य हिस्सों से भी हटाने का निर्देश दिया जा सकता है।
मामला इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री, अभिव्यक्ति, धार्मिक भावनाओं से जुड़े विवाद और डिजिटल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं से जुड़ा हुआ है। इसलिए दिल्ली हाई कोर्ट की आगे की कार्यवाही पर नजर रहेगी।

