नई दिल्ली। पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव की सुरक्षा को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा निर्देश दिया है। सुरक्षा बढ़ाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने केंद्र सरकार को सांसद पप्पू यादव को बिना किसी देरी के एक अतिरिक्त पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO) उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
सांसद की ओर से अदालत में दायर याचिका में कहा गया था कि उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं और इस वजह से उनकी सुरक्षा बढ़ाए जाने की जरूरत है। मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि सुरक्षा बढ़ाने को लेकर दिया गया आवेदन फिलहाल विचाराधीन है।
दिल्ली HC ने केंद्र को क्या निर्देश दिया?
सुरक्षा को लेकर मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को सांसद पप्पू यादव के लिए एक अतिरिक्त PSO उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
अदालत का यह निर्देश ऐसे समय आया है जब सांसद की ओर से सुरक्षा बढ़ाने के लिए गृह मंत्रालय के समक्ष आवेदन दिए जाने की बात कही गई थी।
केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि सांसद के आवेदन पर विचार किया जा रहा है और इस पर तीन सप्ताह के भीतर फैसला लिया जाएगा।
हालांकि, अदालत ने तत्काल सुरक्षा व्यवस्था के तौर पर अतिरिक्त PSO उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इससे सांसद की सुरक्षा को लेकर फिलहाल अंतरिम स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत किए जाने का रास्ता साफ हुआ है।
पप्पू यादव ने सुरक्षा बढ़ाने की मांग क्यों की?
पप्पू यादव ने अपनी याचिका में सुरक्षा बढ़ाने की मांग के पीछे कई घटनाओं और गतिविधियों का उल्लेख किया है।
उनका कहना है कि NEET में कथित गड़बड़ियों के मुद्दे और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खिलाफ उनके विरोध-प्रदर्शनों में शामिल होने के बाद से उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।
इन्हीं परिस्थितियों का हवाला देते हुए उन्होंने गृह मंत्रालय को आवेदन देकर अपनी सुरक्षा बढ़ाने की मांग की थी।
सांसद की ओर से अदालत में यह दलील दी गई कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उनकी सुरक्षा को और मजबूत किया जाना जरूरी है।
केंद्र सरकार ने अदालत में क्या कहा?
मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि सुरक्षा बढ़ाने के लिए सांसद द्वारा दिया गया आवेदन विचाराधीन है।
केंद्र की ओर से कहा गया कि इस आवेदन पर संबंधित प्रक्रिया के तहत विचार किया जाएगा और करीब तीन सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाएगा।
यानी सरकार की ओर से स्थायी या आगे की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अंतिम फैसला बाद में लिया जा सकता है। फिलहाल दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश के बाद एक अतिरिक्त PSO उपलब्ध कराने की बात सामने आई है।

PSO क्या होता है?
PSO यानी Personal Security Officer ऐसा सुरक्षा अधिकारी होता है, जिसकी जिम्मेदारी किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित करना होती है।
किसी सांसद या सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्ति को खतरे के आकलन के आधार पर सुरक्षा उपलब्ध कराई जा सकती है। सुरक्षा की श्रेणी और उसमें तैनात सुरक्षा कर्मियों की संख्या संबंधित सुरक्षा आकलन के आधार पर तय की जाती है।
इस मामले में अदालत ने पप्पू यादव को तत्काल एक अतिरिक्त PSO उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
धमकियों को लेकर क्या है मामला?
पप्पू यादव की ओर से अदालत में कहा गया है कि उन्हें अलग-अलग मौकों पर जान से मारने की धमकियां मिली हैं। याचिका में इन धमकियों को उनकी सार्वजनिक गतिविधियों और कुछ मुद्दों पर उनके विरोध-प्रदर्शनों से जोड़कर बताया गया है।
विशेष रूप से NEET से जुड़े मुद्दे और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों का उल्लेख किया गया है।
हालांकि, धमकियों की प्रकृति, स्रोत और उनकी वास्तविक गंभीरता का आकलन सुरक्षा एजेंसियों की जांच और खतरे के मूल्यांकन से जुड़ा विषय है।
अब आगे क्या होगा?
दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश के बाद तत्काल तौर पर पप्पू यादव को अतिरिक्त PSO उपलब्ध कराया जाना है। वहीं केंद्र सरकार को सुरक्षा बढ़ाने के उनके आवेदन पर तीन सप्ताह के भीतर फैसला लेना है।
अब आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सुरक्षा एजेंसियों के आकलन के बाद पप्पू यादव की सुरक्षा व्यवस्था में स्थायी तौर पर क्या बदलाव किया जाता है।
फिलहाल अदालत का आदेश सांसद की सुरक्षा को लेकर तत्काल राहत के तौर पर देखा जा रहा है। केंद्र सरकार के आगामी निर्णय के बाद उनकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

