नई दिल्ली: विदेश नीति को लेकर कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद भारतीय राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर कटाक्ष करते हुए ‘गले लगाने’ को लेकर टिप्पणी की थी। उनके इस बयान पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे ओछा और निंदनीय बताया।
राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री की विदेश नीति पर हमला करते हुए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना उचित नहीं है। उन्होंने इसे भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा से जोड़ते हुए कहा कि ऐसी टिप्पणियां देश की छवि के लिए भी ठीक नहीं हैं।
राहुल गांधी ने क्या कहा था?
दरअसल, 13 अगस्त को राहुल गांधी नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित रचनात्मक कांग्रेस प्रकोष्ठ अधिवेशन में शामिल हुए थे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं और विभिन्न देशों के नेताओं के साथ उनकी मुलाकातों को लेकर कटाक्ष किया।
राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें लगता है कि प्रधानमंत्री के लिए ‘गले लगाना ही विदेश नीति है।’ इसी दौरान उन्होंने अपने पास खड़े कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित को गले लगाया।
इसके बाद संदीप दीक्षित ने मजाकिया अंदाज में टिप्पणी की कि राहुल ने उन्हें इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी समझकर तो गले नहीं लगाया। इस पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच हंसी का माहौल बन गया।
राहुल गांधी ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि गले लगाने वाली बात उनके दिमाग में किसने डाली और कहां से आई, उन्हें पता नहीं।
राजनाथ सिंह ने जताई कड़ी आपत्ति
राहुल गांधी के इस बयान पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति को लेकर की गई ऐसी टिप्पणियां निचले स्तर की और निंदनीय हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा कि राहुल गांधी की टिप्पणी से उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी दुख हुआ है। उन्होंने अपने राजनीतिक अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने अलग-अलग दौर में विपक्ष के कई नेताओं को देखा है, लेकिन उनके मुताबिक इस तरह की भाषा का उदाहरण दुर्लभ है।
उन्होंने पूर्व नेताओं का नाम लेते हुए कहा कि सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे नेताओं के साथ राजनीतिक मतभेद होने के बावजूद लोकतांत्रिक मर्यादाओं का ध्यान रखा जाता था।
राजनाथ सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी का भी जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच राजनीतिक मतभेदों के बावजूद एक-दूसरे के प्रति सम्मान की परंपरा रही है।

‘स्वस्थ लोकतंत्र के लिए गंभीर संकेत’
रक्षा मंत्री ने राहुल गांधी के बयान को केवल प्रधानमंत्री पर व्यक्तिगत टिप्पणी के तौर पर नहीं देखा। उन्होंने कहा कि इस तरह का व्यवहार भारत में स्वस्थ लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय हो सकता है।
उनका कहना था कि प्रधानमंत्री के प्रति किसी नेता की राजनीतिक असहमति या निराशा अपनी जगह हो सकती है, लेकिन सार्वजनिक मंच पर ऐसी भाषा का इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति मजबूत होने का भी दावा किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के दौरान भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा बढ़ी है और देश विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
विदेश नीति पर सियासी बहस क्यों अहम?
भारत की विदेश नीति लंबे समय से संसद और राजनीतिक दलों के बीच बहस का विषय रही है। विपक्ष अक्सर सरकार की विदेश नीति, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और विभिन्न देशों के साथ भारत के रिश्तों पर सवाल उठाता रहा है।
वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि पिछले वर्षों में भारत की वैश्विक भूमिका और रणनीतिक महत्व बढ़ा है।
राहुल गांधी की टिप्पणी को कांग्रेस की ओर से सरकार की विदेश नीति पर राजनीतिक हमला माना जा रहा है, जबकि राजनाथ सिंह की प्रतिक्रिया बीजेपी की ओर से इसका जवाब है। ऐसे में यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का हिस्सा बना रह सकता है।
बीजेपी-कांग्रेस के बीच बढ़ सकती है बयानबाजी
राहुल गांधी और केंद्र सरकार के बीच विभिन्न मुद्दों पर पहले भी तीखी राजनीतिक बहस होती रही है। अब विदेश नीति को लेकर सामने आए इस विवाद ने दोनों पक्षों को एक बार फिर आमने-सामने ला दिया है।
एक तरफ कांग्रेस प्रधानमंत्री की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय नेताओं के साथ उनके संबंधों पर सवाल उठाती रही है, तो दूसरी तरफ बीजेपी सरकार की विदेश नीति को भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका से जोड़कर उसका बचाव करती है।
इस ताजा विवाद में भी दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप बढ़ने की संभावना है।
राजनीतिक टिप्पणी या मर्यादा का सवाल?
इस पूरे विवाद में एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या राजनीतिक नेताओं की तीखी टिप्पणियां लोकतांत्रिक बहस का हिस्सा हैं या सार्वजनिक मंचों पर भाषा की एक सीमा होनी चाहिए।
राहुल गांधी का बयान प्रधानमंत्री की विदेश नीति पर राजनीतिक कटाक्ष था, जबकि राजनाथ सिंह ने इसे राजनीतिक आलोचना से आगे बढ़कर आपत्तिजनक टिप्पणी माना है।
ऐसे में विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक संवाद की भाषा और लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर भी बहस खड़ी करता है।

