लखनऊ: उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए खाद की उपलब्धता को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाली बहुद्देशीय प्राथमिक सहकारी कृषि ऋण समितियों (बी-पैक्स) की ब्याजमुक्त ऋण सीमा बढ़ा दी है। अब बी-पैक्स समितियां किसानों को खाद उपलब्ध कराने के लिए पहले के मुकाबले अधिक कार्यशील पूंजी का इस्तेमाल कर सकेंगी।
सरकार ने ब्याजमुक्त ऋण की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दी है। यानी प्रत्येक पात्र समिति को पहले की तुलना में 5 लाख रुपये अधिक कार्यशील पूंजी उपलब्ध हो सकेगी। सरकार का मानना है कि इससे खाद की आपूर्ति के बीच आने वाली रुकावटों को कम करने में मदद मिलेगी।
किसानों को खाद के लिए नहीं लगानी पड़ेगी लंबी दौड़?
बी-पैक्स समितियां ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को खाद समेत कृषि से जुड़ी कई सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। खरीफ और रबी जैसे कृषि सीजन में यूरिया और डीएपी की मांग बढ़ जाती है।
अभी तक सीमित कार्यशील पूंजी के कारण कई समितियों को खाद का स्टॉक खत्म होने के बाद ही दोबारा ऑर्डर करना पड़ता था। इस प्रक्रिया के दौरान कुछ दिनों के लिए समिति पर खाद उपलब्ध नहीं रहती थी। किसानों को ऐसी स्थिति में दूसरे केंद्रों का रुख करना पड़ता था।
अब सरकार द्वारा ऋण सीमा बढ़ाए जाने के बाद समितियों को खाद का स्टॉक खत्म होने का इंतजार किए बिना दोबारा आपूर्ति मंगाने में मदद मिलेगी।
पहले 10 लाख रुपये थी ब्याजमुक्त ऋण सीमा
प्रदेश में बी-पैक्स समितियों को किसानों के हित में काम करने के लिए ब्याजमुक्त ऋण की सुविधा दी जाती है। पहले इसकी सीमा 10 लाख रुपये थी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 21 मार्च 2025 को उत्तर प्रदेश स्टेट कोआपरेटिव बैंक की 61वीं वार्षिक सामान्य निकाय की बैठक में इस सीमा को बढ़ाकर 15 लाख रुपये करने की घोषणा की थी। अब इससे संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद यह व्यवस्था लागू किए जाने का रास्ता साफ हुआ है।
सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जेपीएस राठौर के मुताबिक, कार्यशील पूंजी बढ़ने से समितियां खाद की खरीद और आपूर्ति को पहले की तुलना में बेहतर तरीके से बनाए रख सकेंगी।

एक ट्रक यूरिया और एक ट्रक DAP के बाद क्या होता था?
सरकार के अनुसार, अब तक कई समितियां एक समय में लगभग एक ट्रक यूरिया और एक ट्रक डीएपी मंगाती थीं। जब यह स्टॉक बिक जाता था, उसके बाद समिति दोबारा खाद का ऑर्डर करती थी।
इस पूरी प्रक्रिया में खाद की अगली खेप पहुंचने में समय लग जाता था। नतीजा यह होता था कि कुछ समितियों पर दो से चार दिन तक खाद उपलब्ध नहीं रहती थी।
कृषि सीजन में जब किसानों को तत्काल खाद की जरूरत होती है, उस समय कुछ दिनों की यह कमी भी बड़ी परेशानी बन सकती है।
अब 5 लाख रुपये अतिरिक्त कार्यशील पूंजी मिलने से समितियां मौजूदा स्टॉक की बिक्री के दौरान ही अगली खेप का ऑर्डर कर सकेंगी। इससे खाद की सप्लाई का सिलसिला बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
करीब 7 हजार बी-पैक्स समितियां सक्रिय
प्रदेश में बड़ी संख्या में बी-पैक्स समितियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि व्यवस्था से जुड़ी हुई हैं। सरकार के मुताबिक चालू वित्तीय वर्ष में प्रदेश की करीब 7,000 सक्रिय बी-पैक्स समितियों ने लगभग 7,000 करोड़ रुपये का कारोबार किया है।
इसी अवधि में समितियों द्वारा 176 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाने की जानकारी भी दी गई है।
सरकार का कहना है कि बी-पैक्स को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने से किसानों तक कृषि संबंधी सेवाओं की पहुंच बेहतर की जा सकती है।
यूपी में ब्याजमुक्त ऋण की व्यवस्था
प्रदेश सरकार के अनुसार, उत्तर प्रदेश में बी-पैक्स समितियों को ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। सरकार इसे किसानों और सहकारी समितियों को मजबूत करने की दिशा में अपनी प्रमुख पहल के रूप में पेश कर रही है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि समितियों को खाद खरीदने और किसानों तक समय पर पहुंचाने के लिए पर्याप्त कार्यशील पूंजी उपलब्ध रहे।
सरकार का दावा है कि इस पहल की केंद्र सरकार की ओर से भी सराहना की गई है।
किसानों को क्या होगा फायदा?
ऋण सीमा बढ़ने का सीधा असर खाद की उपलब्धता पर पड़ने की उम्मीद है। यदि समितियां समय रहते अगली खेप का ऑर्डर कर पाती हैं, तो खाद की बिक्री और नई आपूर्ति के बीच का अंतर कम हो सकता है।
इससे किसानों को स्थानीय स्तर पर ही यूरिया और डीएपी जैसी आवश्यक खाद मिलने की संभावना बढ़ेगी। खासकर कृषि सीजन में अचानक मांग बढ़ने पर समितियों के पास अतिरिक्त कार्यशील पूंजी उपलब्ध रहना उपयोगी हो सकता है।
हालांकि, खाद की वास्तविक उपलब्धता केवल समिति की कार्यशील पूंजी पर निर्भर नहीं करती। आपूर्ति, मांग, परिवहन और वितरण व्यवस्था भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
सरकार की तैयारी का बड़ा मकसद
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े कृषि राज्य में खाद की समय पर उपलब्धता किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। खेती के सीजन में खाद की मांग अचानक बढ़ सकती है। ऐसे में स्थानीय सहकारी समितियों के पास पर्याप्त पूंजी होने से वितरण व्यवस्था को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिल सकती है।
सरकार की नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य भी यही बताया जा रहा है कि किसानों को खाद के लिए इधर-उधर न भटकना पड़े और बी-पैक्स लगातार अपनी जरूरत के अनुसार स्टॉक मंगाते रहें।

