अहमदाबाद। गुजरात में शराबबंदी को लेकर चल रही बहस के बीच राज्य सरकार ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। सरकार ने कहा है कि गुजरात में शराबबंदी खत्म नहीं की जाएगी और इसे पहले की तरह सख्ती से लागू किया जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है, जब भावनगर में जहरीली शराब से जुड़े मामले ने राज्य की कानून-व्यवस्था और शराबबंदी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राज्य सरकार के प्रवक्ता एवं कैबिनेट मंत्री जीतूभाई वाघाणी ने भावनगर पहुंचकर जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में जहरीली शराब मामले की जांच, आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ितों की स्थिति की समीक्षा की गई।
‘शराबबंदी हटाने का कोई विचार नहीं’
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में वाघाणी ने स्पष्ट किया कि गुजरात सरकार का शराबबंदी हटाने का कोई विचार नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में शराबबंदी जारी रहेगी और कानून का सख्ती से पालन कराया जाएगा।
सरकार का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि जहरीली शराब की घटना के बाद राज्य में शराबबंदी की प्रभावशीलता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
सरकार ने मामले में जांच को आगे बढ़ाते हुए स्टेट मॉनिटरिंग कमेटी को जांच की जिम्मेदारी दी है। सरकार के अनुसार, पुलिस ने अब तक 21 आरोपियों में से 13 को गिरफ्तार किया है।
मुख्य आरोपी रईस 9 दिन की पुलिस रिमांड पर
भावनगर जहरीली शराब मामले के मुख्य आरोपी रईस को पुलिस ने गिरफ्तार करने के बाद स्थानीय अदालत में पेश किया। अदालत ने आरोपी को 9 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि जहरीली शराब कहां तैयार की गई, इसमें मिथेनॉल कैसे पहुंचा और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।
मामले की जांच में एफएसएल रिपोर्ट को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार जहरीली शराब में मिथेनॉल की मौजूदगी की पुष्टि हुई है।

एक मृतक के शरीर में 200 एमएल मिथेनॉल मिलने का दावा
मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि डॉक्टरों की ओर से एक मृतक के पोस्टमार्टम से जुड़ी रिपोर्ट में उसके शरीर में करीब 200 एमएल मिथेनॉल पाए जाने की बात सामने आई है।
चिकित्सकों के अनुसार मिथेनॉल बेहद जहरीला रसायन है और इसका सेवन गंभीर विषाक्तता का कारण बन सकता है। हालांकि किसी व्यक्ति पर इसका प्रभाव मात्रा और अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
यही वजह है कि जांच एजेंसियां शराब में मिथेनॉल की मौजूदगी और उसके स्रोत का पता लगाने पर विशेष ध्यान दे रही हैं।
दूसरे इलाकों में भी पुलिस की कार्रवाई तेज
भावनगर की घटना के बाद गुजरात के अन्य हिस्सों में भी अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई तेज होने की जानकारी सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, राजकोट में पुलिस ने तीन दिनों के दौरान शराब की बिक्री और सेवन से जुड़े 130 मामले दर्ज किए और 8 लोगों को गिरफ्तार किया।
वहीं, कड़ी के एक गांव में पुलिस ने देशी शराब के कथित अड्डे पर छापा मारकर करीब 18 हजार लीटर अवैध शराब जब्त करने का दावा किया है। पुलिस ने करीब साढ़े चार लाख रुपये का माल और अन्य सामान भी बरामद किया।
कांग्रेस ने सरकार पर उठाए सवाल
जहरीली शराब मामले को लेकर विपक्ष ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी ने सरकार से सवाल किया कि जहरीली शराब के कारण हुई मौतों की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।
मेवाणी ने आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार खराब हो रही है और जहरीली शराब बनाने तथा बेचने वालों की जिम्मेदारी तय करने में सरकार नाकाम रही है।
कांग्रेस की ओर से गृह विभाग संभाल रहे उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई है।
सरकार बोली—मामले में राजनीति न हो
वहीं, राज्य सरकार ने विपक्ष से इस मामले को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाने की अपील की है। सरकार का कहना है कि घटना की जांच चल रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
सरकार की प्राथमिकता फिलहाल अवैध शराब के नेटवर्क का पता लगाना और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना बताई जा रही है।
शराबबंदी के बावजूद अवैध शराब पर सवाल
गुजरात में लंबे समय से शराबबंदी लागू है। इसके बावजूद समय-समय पर अवैध शराब और जहरीली शराब की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों के बाद शराबबंदी के प्रभावी क्रियान्वयन और अवैध शराब के नेटवर्क पर नियंत्रण को लेकर सवाल उठते हैं।
भावनगर की घटना ने भी इसी बहस को फिर सामने ला दिया है। एक तरफ सरकार शराबबंदी को जारी रखने और सख्ती बढ़ाने की बात कर रही है, वहीं विपक्ष अवैध शराब की उपलब्धता को लेकर सरकार को घेर रहा है।
अब जांच का सबसे अहम हिस्सा यह होगा कि जहरीली शराब का स्रोत क्या था, मिथेनॉल की आपूर्ति कहां से हुई और इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे।

