भारतीय जनता पार्टी: से अलग होने के बाद तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। इस बार उन्होंने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित किए जा रहे NEET री-टेस्ट 2026 की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके बयान ने शिक्षा जगत के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी नई बहस छेड़ दी है।
अन्नामलाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए कहा कि 21 जून को होने वाले NEET री-टेस्ट के लिए किए गए सुरक्षा इंतजाम अभूतपूर्व हैं और इससे लाखों छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ सकता है।
क्या कहा अन्नामलाई ने?
पूर्व आईपीएस अधिकारी ने दावा किया कि परीक्षा के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। उनके अनुसार परीक्षा केंद्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचाने के लिए भारतीय वायुसेना की एयरलिफ्ट सुविधा, सीआरपीएफ और सीआईएसएफ की दोहरी सुरक्षा, एआई आधारित निगरानी, चार स्तरीय सीसीटीवी सिस्टम, बायोमेट्रिक सत्यापन और फेसियल रिकॉग्निशन जैसी तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि इन व्यवस्थाओं की निगरानी कई स्तरों पर की जा रही है और प्रधानमंत्री कार्यालय की सीधी निगरानी का भी उल्लेख किया।
अन्नामलाई ने व्यंग्यात्मक अंदाज में लिखा कि यह व्यवस्था किसी सैन्य स्तर के गोपनीय रक्षा सौदे के लिए नहीं बल्कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा के लिए की जा रही है।
छात्रों की मानसिक स्थिति को लेकर जताई चिंता
अन्नामलाई ने कहा कि पेपर लीक रोकना सरकार की जिम्मेदारी है और इस दिशा में प्रयास जरूरी हैं। लेकिन उनका मानना है कि अत्यधिक सुरक्षा व्यवस्था छात्रों के लिए नई समस्याएं खड़ी कर सकती है।
उन्होंने कहा कि लाखों छात्र पहले ही लंबे समय से परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। पेपर लीक विवाद के कारण उन्हें दोबारा परीक्षा देनी पड़ रही है। ऐसे में अतिरिक्त सुरक्षा जांच, बार-बार सत्यापन और लंबी प्रक्रियाएं उनकी चिंता और तनाव को बढ़ा सकती हैं।
पूर्व भाजपा नेता ने सवाल उठाया कि क्या इस प्रकार की व्यवस्थाएं वास्तव में परीक्षा को निष्पक्ष बनाएंगी या फिर छात्रों के लिए अतिरिक्त मानसिक बोझ पैदा करेंगी।

परीक्षा अवधि बढ़ाने पर भी उठे सवाल
अन्नामलाई ने परीक्षा अवधि बढ़ाने के फैसले पर भी सवाल खड़े किए। जानकारी के अनुसार री-टेस्ट में परीक्षा का समय 180 मिनट से बढ़ाकर 195 मिनट किया गया है।
उनका कहना है कि परीक्षा की अवधि में बदलाव और अतिरिक्त सुरक्षा उपायों से छात्रों में भ्रम और घबराहट की स्थिति पैदा हो सकती है।
उन्होंने कहा कि किसी भी परीक्षा का उद्देश्य छात्रों की योग्यता का आकलन करना होना चाहिए, न कि उन्हें अत्यधिक प्रशासनिक दबाव में डालना।
भाजपा ने किया पलटवार
अन्नामलाई के बयान के बाद भाजपा नेताओं ने उनके आरोपों को खारिज कर दिया। पार्टी का कहना है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया है और इस बार किसी भी प्रकार की गड़बड़ी रोकने के लिए सख्त सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक है।
भाजपा नेताओं का तर्क है कि छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने और परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए यह कदम उठाए गए हैं।
क्यों हो रहा है NEET री-टेस्ट?
NEET-UG 2026 की मूल परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित की गई थी। देशभर से लगभग 22.8 लाख छात्रों ने इसमें भाग लिया था।
हालांकि परीक्षा के बाद कई राज्यों से पेपर लीक और अनियमितताओं की शिकायतें सामने आईं। बढ़ते विवाद और जांच के बाद परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया।
इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
राजनीति और शिक्षा के बीच नया विवाद
अन्नामलाई का बयान ऐसे समय आया है जब उन्होंने भाजपा से अलग होकर नया राजनीतिक अभियान शुरू करने की घोषणा की है। ऐसे में उनके बयान को केवल शिक्षा व्यवस्था पर टिप्पणी नहीं बल्कि एक राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि NEET री-टेस्ट को लेकर छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं के बीच यह बयान राष्ट्रीय बहस को और तेज कर सकता है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि परीक्षा शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न होती है या नहीं, क्योंकि इससे लाखों छात्रों का भविष्य जुड़ा हुआ है।