पश्चिम बंगाल: की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक और कानूनी संघर्ष शुरू होता दिखाई दे रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भवानीपुर विधानसभा सीट पर मिली हार को स्वीकार करने के बजाय अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर कर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की जीत को चुनौती दी है।
यह कदम ऐसे समय आया है जब 2026 विधानसभा चुनाव के बाद बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ और टीएमसी का करीब 15 वर्षों का शासन समाप्त हो गया। ऐसे में ममता बनर्जी की यह कानूनी लड़ाई राजनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भवानीपुर में मिली अप्रत्याशित हार
भवानीपुर सीट लंबे समय से ममता बनर्जी का राजनीतिक गढ़ मानी जाती रही है। लेकिन 2026 विधानसभा चुनाव में भाजपा के वरिष्ठ नेता और वर्तमान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें 15,105 वोटों के बड़े अंतर से पराजित कर दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह हार सिर्फ एक सीट की हार नहीं थी, बल्कि बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन का प्रतीक बन गई। चुनाव परिणाम आने के बाद से ही टीएमसी के भीतर असंतोष और नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं।
हाईकोर्ट में क्या मांग की गई?
ममता बनर्जी की ओर से दायर चुनाव याचिका में चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदु उठाए गए हैं।
याचिका में मांग की गई है कि भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से जुड़े सभी चुनावी दस्तावेज, मतगणना रिकॉर्ड, ईवीएम मशीनें और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सुरक्षित रखे जाएं। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि इन सामग्रियों को सील किया जाए ताकि भविष्य में किसी भी जांच या कानूनी प्रक्रिया के दौरान उनका उपयोग किया जा सके।
टीएमसी का दावा है कि चुनावी प्रक्रिया के कुछ पहलुओं की निष्पक्ष जांच आवश्यक है और इसी उद्देश्य से रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की गई है।
क्या मतगणना को लेकर उठे हैं सवाल?
हालांकि याचिका की पूरी कानूनी सामग्री अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि मतगणना प्रक्रिया को लेकर कुछ गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं।
इसी कारण चुनाव परिणामों को चुनौती देते हुए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई है। यदि अदालत इस मामले को सुनवाई योग्य मानती है, तो चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों को भी जवाब देना पड़ सकता है।

नंदीग्राम से भवानीपुर तक जारी है कानूनी लड़ाई
यह पहली बार नहीं है जब ममता बनर्जी ने चुनावी हार को अदालत में चुनौती दी हो।
2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट पर भी उन्हें शुभेंदु अधिकारी से करीबी मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा था। उस समय भी उन्होंने चुनाव परिणाम को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और मतगणना प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।
वह मामला अभी भी न्यायिक प्रक्रिया में है। अब भवानीपुर की नई याचिका के बाद एक बार फिर ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी कानूनी मोर्चे पर आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं।
बंगाल की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं रहेगा। यदि अदालत इस याचिका पर विस्तृत सुनवाई करती है, तो यह राज्य की राजनीति में नई बहस और टकराव को जन्म दे सकता है।
दूसरी ओर भाजपा इस जीत को जनता का स्पष्ट जनादेश बता रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि चुनाव पूरी पारदर्शिता और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत संपन्न हुए हैं।
टीएमसी समर्थकों का मानना है कि अदालत में तथ्य सामने आने के बाद कई नए पहलुओं का खुलासा हो सकता है।
आगे क्या होगा?
अब सभी की निगाहें कलकत्ता हाईकोर्ट पर टिकी हैं। अदालत सबसे पहले यह तय करेगी कि याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं। इसके बाद चुनाव आयोग और अन्य पक्षों से जवाब मांगा जा सकता है।
यदि अदालत रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश देती है, तो भवानीपुर चुनाव से जुड़े दस्तावेज और ईवीएम विशेष निगरानी में रखे जाएंगे।
इस मामले का परिणाम न केवल भवानीपुर सीट बल्कि बंगाल की व्यापक राजनीतिक दिशा को भी प्रभावित कर सकता है।