नई दिल्ली। सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शनिवार को एक सरकारी स्कूल की रसोई का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो के आधार पर उन्होंने दावा किया कि रसोई में बच्चों के भोजन के लिए इस्तेमाल होने वाली सामग्री में कथित तौर पर एक्सपायर्ड मसाला मिला है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
दीपके ने अपने एक्स पोस्ट में सरकार से सवाल किया कि यदि बच्चों को ऐसा भोजन दिया जा रहा है, तो क्या सत्ता में बैठे लोग यही खाना अपने बच्चों को खिलाना पसंद करेंगे? उनके आरोप के बाद सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता और रसोई की साफ-सफाई को लेकर बहस तेज हो गई है।
रसोई में मसाले के पैकेट ने खड़े किए सवाल
अभिजीत दीपके द्वारा साझा किए गए वीडियो में वह स्कूल की रसोई का निरीक्षण करते नजर आ रहे हैं। इसी दौरान उन्होंने एक मसाले के पैकेट को कैमरे के सामने दिखाया और उस पर दर्ज तारीख का हवाला दिया।
दीपके का दावा है कि पैकेट पर अगस्त 2025 में पैक होने की तारीख दर्ज थी और उसे फरवरी 2026 से पहले इस्तेमाल किया जाना था। उनके मुताबिक, निरीक्षण के दौरान यह सामग्री निर्धारित अवधि के बाद भी रसोई में मौजूद मिली।
उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामीण इलाकों में पढ़ने वाले बच्चों के भोजन में इस तरह की सामग्री का इस्तेमाल गंभीर चिंता का विषय है। हालांकि, केवल पैकेट पर दर्ज तारीख के आधार पर खाद्य सामग्री के वास्तविक रूप से इस्तेमाल किए जाने या उसकी गुणवत्ता खराब होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अंतिम स्थिति संबंधित खाद्य जांच या प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।
दीपके ने सरकार से पूछा तीखा सवाल
वीडियो साझा करते हुए दीपके ने सरकार और प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि जिन बच्चों के लिए सरकारी स्तर पर भोजन उपलब्ध कराया जाता है, उनकी थाली में इस्तेमाल होने वाली प्रत्येक खाद्य सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करना जरूरी है।
उन्होंने अपने पोस्ट में यह सवाल भी उठाया कि अगर ऐसी खाद्य सामग्री बच्चों को दिए जाने का दावा सही है, तो क्या जिम्मेदार अधिकारी और सत्ता में बैठे लोग इसे अपने बच्चों के लिए स्वीकार करेंगे?
दीपके ने यह भी कहा कि स्कूलों की स्थिति और बच्चों से जुड़े मुद्दों को सामने लाने के दौरान यदि उनके खिलाफ कार्रवाई या एफआईआर भी होती है, तब भी वह कथित समस्याओं को उठाना जारी रखेंगे।

क्या है ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान?
यह निरीक्षण सीजेपी के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत किए जाने का दावा किया गया है। अभियान के माध्यम से ग्रामीण और सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति को सामने लाने की कोशिश की जा रही है।
इसमें सिर्फ पढ़ाई और कक्षाओं की स्थिति ही नहीं, बल्कि स्कूलों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं की भी जानकारी जुटाने पर जोर दिया जा रहा है। रसोई, शौचालय, स्कूल भवन, साफ-सफाई, बच्चों की सुरक्षा और दूसरी जरूरी सुविधाएं भी अभियान के दायरे में बताई गई हैं।
दीपके का कहना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
कई किलोमीटर दूर स्कूल जाने का भी दावा
दीपके ने महाराष्ट्र में अभियान के तहत अपनी पहली स्कूल यात्रा का जिक्र करते हुए ग्रामीण इलाकों की एक अन्य समस्या की ओर भी ध्यान दिलाया। उनके अनुसार, कुछ गांवों में स्कूल नहीं होने के कारण बच्चों को पढ़ाई के लिए कई किलोमीटर तक जाना पड़ता है।
परिवहन की पर्याप्त सुविधा नहीं होने की स्थिति में छोटे बच्चों के लिए यह दूरी और मुश्किल बन सकती है। ऐसे में सवाल सिर्फ स्कूल के अंदर मौजूद सुविधाओं का नहीं, बल्कि बच्चों की स्कूल तक पहुंच का भी है।
उनके मुताबिक, अगर किसी गांव में स्कूल की सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चों को सुरक्षित और आसान तरीके से नजदीकी स्कूल तक पहुंचने की व्यवस्था मिले।
देशभर के स्कूलों का डेटा जुटाने की तैयारी
अभियान के तहत अभिभावकों और सरकारी अधिकारियों से स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर जानकारी जुटाने की अपील की गई है। इसके लिए एक तरह की चेकलिस्ट तैयार करने की बात कही गई है।
इसमें स्कूल भवन, शौचालय, रसोई, साफ-सफाई, परिवहन और बच्चों को उपलब्ध दूसरी मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी जानकारी शामिल की जा सकती है। अभियान के जरिए महाराष्ट्र के अलावा देश के अन्य हिस्सों के स्कूलों से भी डेटा जुटाने की योजना बताई गई है।

