नई दिल्ली। भारतीय घरों की रसोई में इस्तेमाल होने वाली हींग की गुणवत्ता को लेकर खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने बड़ा कदम उठाया है। जांच के दौरान एवरेस्ट और लालजी गोधू के कंपाउंडेड हींग के सैंपल निर्धारित खाद्य मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए, जिसके बाद संबंधित हींग उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश दिया गया है।
मामला एक उपभोक्ता की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच से सामने आया। इसके बाद खाद्य नियामक ने बाजार में उपलब्ध प्रमुख हींग ब्रांड्स के सैंपल की जांच कराई। जांच के दौरान कुछ उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल सामने आए।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
मामला उस समय सामने आया जब एक उपभोक्ता ने हींग की गुणवत्ता को लेकर शिकायत की। शिकायत मिलने के बाद FSSAI ने बाजार में बिकने वाले प्रमुख हींग उत्पादों की जांच शुरू की।
शुरुआती प्रयोगशाला जांच में एवरेस्ट और लालजी गोधू के कंपाउंडेड हींग के सैंपल निर्धारित मानकों से नीचे पाए गए। इसके बाद जांच को आगे बढ़ाते हुए मुंबई स्थित दोनों कंपनियों की सेंट्रल लाइसेंस वाली यूनिट्स से सैंपल लिए गए।
इन सैंपल को प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया। इसके अलावा गुजरात के उम्बरगांव में स्थित एवरेस्ट की एक अन्य यूनिट से भी गुजरात राज्य के खाद्य विभाग के साथ मिलकर नमूने लिए गए।
जांच के बाद संबंधित सैंपल निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए।
कंपाउंडेड हींग में असली हींग की मात्रा पर सवाल
जांच का सबसे अहम हिस्सा कंपाउंडेड हींग में मौजूद असली हींग से जुड़ा रहा।
खाद्य मानकों के मुताबिक कंपाउंडेड हींग तैयार करते समय असली हींग के साथ गोंद, स्टार्च और आटे जैसी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए कम से कम 5 प्रतिशत अल्कोहल सॉल्युबल एक्सट्रैक्ट होना जरूरी बताया गया है।
लेकिन जांच में संबंधित उत्पादों में इसकी मात्रा 0 से 3 प्रतिशत के बीच पाई गई।
यही अंतर जांच का महत्वपूर्ण आधार बना। उपलब्ध जांच निष्कर्षों के मुताबिक, संबंधित उत्पादों में निर्धारित मानक की तुलना में असली हींग से संबंधित मात्रा काफी कम पाई गई। इसी आधार पर FSSAI ने संबंधित कंपाउंडेड हींग उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश दिया।

लालजी गोधू की हींग में स्टार्च ने बढ़ाई चिंता
जांच के दौरान लालजी गोधू की यूनिट से ली गई असली हींग की छह अलग-अलग किस्मों के सैंपल की भी जांच की गई।
नियमों के मुताबिक असली हींग में स्टार्च की मात्रा एक प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। लेकिन जांच रिपोर्ट में इन छह किस्मों में स्टार्च की मात्रा 15 से 32 प्रतिशत के बीच पाई गई।
यानी कुछ सैंपल में स्टार्च की मात्रा निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक थी। खाद्य नियामक की कार्रवाई में यह भी एक महत्वपूर्ण आधार बना।
हालांकि, किसी खाद्य उत्पाद की गुणवत्ता या मानकों के उल्लंघन को लेकर अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित नियामक कार्रवाई और प्रक्रिया के आधार पर तय होती है।
क्या एवरेस्ट के सभी मसालों पर लगा बैन?
यहां उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। FSSAI का यह आदेश संबंधित हींग उत्पादों के खिलाफ है।
इसका मतलब यह नहीं है कि एवरेस्ट या लालजी गोधू के सभी मसाला उत्पादों की बिक्री पर रोक लगा दी गई है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार अंडा करी मसाला, चिकन करी मसाला और गरम मसाला जैसे दूसरे उत्पाद इस विशेष रोक के दायरे में नहीं हैं।
इसलिए उपभोक्ताओं को खबर को इस रूप में नहीं समझना चाहिए कि संबंधित कंपनियों के सभी मसाले प्रतिबंधित कर दिए गए हैं।
उपभोक्ताओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह कार्रवाई?
हींग भारतीय भोजन में कम मात्रा में इस्तेमाल होने वाला लेकिन बेहद लोकप्रिय मसाला है। इसकी कीमत और उत्पादन प्रक्रिया को देखते हुए इसकी शुद्धता लंबे समय से उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा रही है।
FSSAI की कार्रवाई यह भी दिखाती है कि खाद्य उत्पादों को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतें नियामकीय जांच का आधार बन सकती हैं। बाजार से लिए गए सैंपल की प्रयोगशाला जांच के जरिए उत्पादों में निर्धारित मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, इसका परीक्षण किया जाता है।
इस मामले में भी शुरुआत एक शिकायत से हुई और इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया।
आगे क्या होगा?
संबंधित उत्पादों पर बिक्री रोक के बाद नियामकीय प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर कंपनियों से जवाब मांगा जा सकता है और खाद्य सुरक्षा कानून के तहत आगे की कार्रवाई भी की जा सकती है।
उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संबंधित हींग उत्पादों की बिक्री पर लगाई गई रोक को दूसरे मसाला उत्पादों पर लागू न समझें।

