नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के प्रमुख चिराग पासवान को कथित तौर पर एक बार फिर जान से मारने की धमकी मिली है। इस बार धमकी सोशल मीडिया के बजाय डाक के जरिए भेजे गए एक पत्र में दी गई है। पत्र में चिराग पासवान को जल्द ही ‘हार्डकोर आतंकियों’ द्वारा मारे जाने की चेतावनी दिए जाने का दावा किया गया है।
धमकी सामने आने के बाद चिराग पासवान की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। उनके कार्यालय की ओर से मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय गृह सचिव को पत्र लिखा गया है और आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाने की मांग की गई है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि धमकी भरा पत्र आखिर किसने भेजा और इसके पीछे उसका मकसद क्या है? पत्र की वास्तविकता और धमकी की गंभीरता से जुड़े तथ्यों की जांच की जानी बाकी है।
धमकी भरे पत्र में क्या लिखा है?
चिराग पासवान को भेजे गए कथित धमकी भरे पत्र में सीधे उनकी हत्या की बात कही गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक पत्र में लिखा गया है कि उन्हें जल्द ही ‘हार्डकोर आतंकियों’ द्वारा मार दिया जाएगा। इस तरह की भाषा में दी गई धमकी ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
हालांकि, अभी तक धमकी देने वाले व्यक्ति या किसी संगठन की पहचान सार्वजनिक नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि पत्र कहां से भेजा गया और इसे भेजने के पीछे वास्तव में कौन लोग हैं।
ऐसे मामलों में पत्र की भाषा, भेजने के तरीके और उससे जुड़े अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के आधार पर धमकी की वास्तविकता का आकलन किया जाता है।
चिराग पासवान के कार्यालय ने गृह सचिव को लिखा पत्र
धमकी की जानकारी सामने आने के बाद चिराग पासवान के कार्यालय ने केंद्रीय गृह सचिव को पत्र लिखकर मामले पर तत्काल ध्यान देने का अनुरोध किया है।
कार्यालय की ओर से आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाने की मांग की गई है। चिराग पासवान केंद्र सरकार में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हैं और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं।
ऐसे में उनके खिलाफ किसी भी कथित सुरक्षा धमकी को गंभीरता से लिया जाना स्वाभाविक है।
अब सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती होगी कि धमकी वास्तविक खतरे की ओर इशारा करती है या इसके पीछे किसी व्यक्ति की शरारत अथवा डर पैदा करने की कोशिश है।

धमकी देने वाले की पहचान अब तक सामने नहीं
इस पूरे मामले में अभी कई सवालों के जवाब सामने आना बाकी हैं।
सबसे अहम सवाल है कि पत्र किसने भेजा? इसे किस स्थान से डाक किया गया? क्या पत्र भेजने वाला किसी संगठन से जुड़ा है? क्या पहले भी ऐसी धमकी देने वाले किसी व्यक्ति से इसका संबंध है?
इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
सुरक्षा एजेंसियां कथित तौर पर पत्र से जुड़े उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर सकती हैं। जांच के दौरान डाक से संबंधित विवरण और अन्य तकनीकी या भौतिक साक्ष्यों को भी देखा जा सकता है।
पहली बार नहीं मिली ऐसी धमकी
चिराग पासवान को इससे पहले भी जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आ चुका है।
जुलाई 2025 में सोशल मीडिया के जरिए उन्हें कथित तौर पर जान से मारने की धमकी दी गई थी। यह मामला उस समय सामने आया था जब उनकी पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला घोषित किया था।
बताया गया था कि धमकी इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए दी गई थी। इसके बाद लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के प्रवक्ता की ओर से पटना साइबर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी।
पुलिस ने उस मामले में जांच शुरू की थी।
अब एक बार फिर धमकी मिलने से चिराग पासवान की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
सोशल मीडिया से डाक तक पहुंचा धमकी का सिलसिला?
पिछली घटना में सोशल मीडिया के जरिए कथित धमकी सामने आई थी, जबकि इस बार मामला डाक से भेजे गए पत्र से जुड़ा बताया जा रहा है।
यही वजह है कि सुरक्षा के लिहाज से इस मामले की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले धमकी के पीछे किसी आतंकी संगठन या व्यक्ति की संलिप्तता को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
अब जांच के नतीजे पर नजर
चिराग पासवान को मिली कथित धमकी के बाद उनके कार्यालय ने केंद्रीय गृह सचिव से सुरक्षा उपायों की मांग की है। अब यह देखना अहम होगा कि जांच एजेंसियां पत्र भेजने वाले तक कैसे पहुंचती हैं और क्या जांच में कोई ठोस सुराग सामने आता है।
फिलहाल धमकी की पुष्टि, स्रोत और संभावित मकसद से जुड़े कई पहलू जांच के दायरे में हैं।
चिराग पासवान को पहले भी धमकी मिलने की घटना सामने आ चुकी है, इसलिए इस बार मिले कथित पत्र को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की जांच और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

