लखनऊ/सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की करेंसी चेस्ट से जुड़े मामले ने बैंकिंग व्यवस्था की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोफिया मार्केट स्थित PNB की करेंसी चेस्ट में करीब 17 करोड़ रुपये के नकली नोट मिलने के बाद जांच लगातार आगे बढ़ रही है। जैसे-जैसे जांच की परतें खुल रही हैं, वैसे-वैसे इस कथित फर्जीवाड़े को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं।
प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) से करेंसी चेस्ट में भेजे गए नए नोटों की फोटो कॉपी या प्रिंट तैयार कर नकली नोट बनाए गए और बाद में उन्हें असली नोटों के बीच शामिल किया गया। जांच का सबसे अहम बिंदु यही है कि यदि नकली नोट चेस्ट तक पहुंचे, तो असली नोट आखिर कहां गए और उन्हें सिस्टम से बाहर निकालने में किसकी भूमिका थी?
करेंसी चेस्ट में कैसे पहुंची नकली करेंसी?
जांच एजेंसियों और बैंक की आंतरिक टीमों का फोकस इस बात पर है कि करेंसी चेस्ट में इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट आखिर किस तरीके से शामिल किए गए।
प्रारंभिक आशंका के मुताबिक RBI से आने वाली नई करेंसी के नोटों की कॉपी या प्रिंट तैयार किए गए। इसके बाद कथित तौर पर इन नकली नोटों को असली नोटों के साथ मिला दिया गया।
हालांकि, यह पूरी प्रक्रिया वास्तव में कैसे हुई, इसमें किस स्तर के कर्मचारियों या अधिकारियों की भूमिका थी और असली नोटों को किस तरह बाहर निकाला गया—इन सवालों का अंतिम जवाब विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

16 अधिकारियों की टीम कर रही जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए PNB के नई दिल्ली स्थित मुख्यालय से 16 अधिकारियों की टीम सहारनपुर पहुंचकर जांच कर रही है। टीम करेंसी चेस्ट में मौजूद रिकॉर्ड, लेनदेन, नोटों की आवाजाही और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका समेत कई पहलुओं की जांच कर रही है।
जांच का उद्देश्य सिर्फ नकली नोटों के चेस्ट तक पहुंचने का तरीका पता लगाना नहीं है, बल्कि यह भी पता लगाना है कि कथित फर्जीवाड़ा कब शुरू हुआ और इसके पीछे कितने लोग हो सकते हैं।
टीम यह भी खंगाल रही है कि RBI से करेंसी चेस्ट तक नोट पहुंचने के बाद उनकी गिनती, जांच, रखरखाव और वितरण की प्रक्रिया में कहीं कोई गंभीर चूक हुई थी या जानबूझकर व्यवस्था में हेरफेर किया गया।
असली नोटों को लेकर सबसे बड़ा सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल असली नोटों के गायब होने को लेकर है। अगर जांच में यह आशंका सही साबित होती है कि असली नोटों की जगह नकली नोट रखे गए, तो जांच अधिकारियों को यह पता लगाना होगा कि असली रकम को कब और किस तरीके से करेंसी चेस्ट से बाहर निकाला गया।
इसके लिए करेंसी चेस्ट से जुड़े दस्तावेज, कैश मूवमेंट, बैंक रिकॉर्ड और कर्मचारियों की गतिविधियों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
यही वजह है कि जांच सिर्फ नकली नोटों की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे कथित नेटवर्क और रकम की आवाजाही का पता लगाने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है।
चार कर्मचारियों पर कार्रवाई
इतने बड़े स्तर पर कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद बैंक प्रशासन ने कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है। PNB के अधिकारियों के अनुसार करेंसी चेस्ट से जुड़े दो इंटरनल और दो एक्सटर्नल स्टाफ को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
इसके अलावा कुछ अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद संदिग्ध लोगों की संख्या बढ़ सकती है।
हालांकि, किसी कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जाएगा।
कितने समय से चल रहा था खेल?
जांच का एक अहम सवाल यह भी है कि कथित फर्जीवाड़ा अचानक हुआ या लंबे समय से चल रहा था। यदि नकली नोटों को असली करेंसी के स्थान पर व्यवस्थित तरीके से रखा गया, तो जांचकर्ताओं के लिए यह पता लगाना जरूरी होगा कि ऐसा कितनी बार किया गया और कितनी रकम प्रभावित हुई।
जांच टीम बैंक के आंतरिक रिकॉर्ड और करेंसी चेस्ट से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल के जरिए पूरे घटनाक्रम की कड़ी जोड़ने की कोशिश कर रही है।
बैंकिंग सिस्टम पर उठे सवाल
करेंसी चेस्ट बैंकिंग सिस्टम में नकदी के सुरक्षित भंडारण और वितरण का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ऐसे में वहां करोड़ों रुपये की कथित नकली करेंसी का मिलना सामान्य घटना नहीं माना जा सकता।
इस मामले ने बैंक के अंदर नकदी की जांच, निगरानी, कर्मचारियों की जिम्मेदारी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि यह मामला मानवीय लापरवाही का परिणाम था या इसके पीछे किसी सुनियोजित नेटवर्क ने काम किया।
फिलहाल PNB मुख्यालय की टीम मामले की गहराई से जांच कर रही है और असली रकम, नकली नोटों के स्रोत तथा पूरे घटनाक्रम में शामिल लोगों की भूमिका का पता लगाने की कोशिश जारी है।

