नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा छेड़ दी है। ट्रंप ने ईरान की सैन्य गतिविधियों पर अमेरिकी निगरानी क्षमता का जिक्र करते हुए दावा किया कि अमेरिका तेहरान की गतिविधियों पर बेहद करीब से नजर रख रहा है। उन्होंने यहां तक कहा कि ईरान की गतिविधियों की जानकारी अमेरिका को इतनी जल्दी मिल जाती है कि वहां के लोगों के बाथरूम जाने तक की खबर होने का दावा किया जा सकता है।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव लगातार गंभीर बना हुआ है। दोनों पक्षों की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों के दावे किए जा रहे हैं और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव विशेष रूप से बढ़ गया है।
ट्रंप ने US सर्विलांस को लेकर क्या दावा किया?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने ईरान की सैन्य तैयारियों पर अमेरिकी निगरानी का दावा करते हुए कहा कि अमेरिका को पहले से पता था कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट के आसपास नए रडार सिस्टम और मिसाइल सिस्टम से संबंधित सैन्य तैयारियां कर रहा था।
ट्रंप के मुताबिक, अमेरिकी सेना ईरान की इन गतिविधियों पर नजर रख रही थी और कुछ सैन्य उपकरणों को पूरी तरह तैयार होने से पहले ही निशाना बनाया गया।
ओवल ऑफिस में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने अमेरिकी निगरानी क्षमता का उल्लेख करते हुए बेहद आक्रामक अंदाज में दावा किया कि ईरान जब भी अपने सैन्य सिस्टम को दोबारा तैयार करने की कोशिश करता है, अमेरिका को इसकी जानकारी हो जाती है।
इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के लोग बाथरूम तक जाएं तो अमेरिका को उसकी भनक लग सकती है। हालांकि, यह बयान उनकी निगरानी क्षमता को लेकर किया गया एक राजनीतिक दावा है और इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि अमेरिका वास्तव में हर व्यक्तिगत गतिविधि की निगरानी कर रहा है।

होर्मुज स्ट्रेट क्यों बना तनाव का केंद्र?
अमेरिका-ईरान टकराव में होर्मुज स्ट्रेट का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
दुनिया के तेल और गैस कारोबार का एक बड़ा हिस्सा इस समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां सैन्य तनाव बढ़ने का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक व्यापार पर भी पड़ सकता है।
ट्रंप ने दावा किया कि होर्मुज क्षेत्र में अमेरिकी सेना की स्थिति मजबूत है और वहां से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही पर भी नजर रखी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना ड्रोन हमलों की कोशिशों को रोक रही है।
ईरान का भी पलटवार, पीछे हटने के संकेत नहीं
अमेरिकी दावों के बीच ईरान भी अपने रुख पर कायम दिखाई दे रहा है। ईरानी पक्ष की ओर से अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई जारी रखने की चेतावनी दी गई है।
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की ओर से कुवैत, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के दावे किए गए हैं। दूसरी तरफ संबंधित देशों की सेनाओं ने मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने की कार्रवाई की बात कही है।
इससे स्पष्ट है कि संघर्ष अब केवल दो देशों के बीच प्रत्यक्ष सैन्य टकराव तक सीमित रहने के बजाय पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है।
मोहसिन रेजाई की अमेरिका को चेतावनी
ईरान के सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने भी अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। उनके मुताबिक, तेहरान ने युद्ध की रणनीति में बदलाव किया है और इसका उद्देश्य अमेरिकी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचाना है।
रेजाई ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए संकेत दिया कि ईरान सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ कूटनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर भी अपनी रणनीति आगे बढ़ाएगा।
ईरान की ओर से लगातार दिए जा रहे ऐसे बयानों से संकेत मिलता है कि तेहरान फिलहाल अमेरिकी दबाव के आगे पीछे हटने के मूड में नहीं है।
अमेरिका की निगरानी क्षमता कितनी मजबूत है?
ट्रंप के बयान का एक बड़ा हिस्सा अमेरिका की खुफिया और सैन्य निगरानी क्षमता को लेकर है। अमेरिका के पास सैटेलाइट इमेजरी, हवाई निगरानी, समुद्री निगरानी और अन्य खुफिया साधनों का व्यापक नेटवर्क है।
किसी देश के नए रडार, मिसाइल लॉन्चर या सैन्य गतिविधियों का पता लगाने के लिए कई अलग-अलग स्रोतों से जानकारी जुटाई जा सकती है। हालांकि, ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ईरान की कथित सैन्य तैयारियों की जानकारी अमेरिका को किस विशेष माध्यम से मिली।
इसलिए उनके बयान को अमेरिका की खुफिया क्षमता को प्रदर्शित करने वाली राजनीतिक टिप्पणी के रूप में देखना अधिक उचित होगा।
आगे क्या होगा?
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दोनों पक्ष सैन्य टकराव को और आगे बढ़ाएंगे या फिर किसी स्तर पर बातचीत का रास्ता खुलेगा।
होर्मुज स्ट्रेट में किसी बड़े सैन्य घटनाक्रम की स्थिति में इसका असर तेल की कीमतों, समुद्री परिवहन और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। यही वजह है कि अमेरिका-ईरान टकराव पर दुनिया के कई देश लगातार नजर बनाए हुए हैं।
फिलहाल ट्रंप की ‘बाथरूम तक नजर’ वाली टिप्पणी ने अमेरिका की निगरानी क्षमता को लेकर बहस जरूर तेज कर दी है, लेकिन असली चुनौती ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य टकराव को नियंत्रित करना है।

