लखनऊ/मेरठ: बहुजन समाज पार्टी में एक बार फिर बड़ा सियासी उलटफेर हुआ है। कभी मायावती के बेहद करीबी और पार्टी के संभावित राजनीतिक उत्तराधिकारी माने जाने वाले आकाश आनंद को अब संगठन की सभी प्रमुख जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया है। गुरुवार को लखनऊ में हुई बीएसपी की राष्ट्रीय स्तर की बैठक में मायावती ने आकाश आनंद को लेकर बड़ा फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि आकाश अभी राजनीतिक रूप से पूरी तरह परिपक्व नहीं हैं और उन्हें आगे और अनुभव हासिल करने की जरूरत है।
इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर मायावती ने आकाश आनंद से इतनी बड़ी जिम्मेदारियां क्यों वापस ले लीं और क्या यह उनके राजनीतिक करियर में एक और बड़ा ब्रेक है?
नेशनल कोऑर्डिनेटर पद भी गया
आकाश आनंद इससे पहले बीएसपी के नेशनल कोऑर्डिनेटर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे थे। पार्टी के भीतर उन्हें मायावती के बाद सबसे प्रमुख चेहरों में गिना जाता था। लेकिन अब उन्हें इस पद से भी हटा दिया गया है।
खास बात यह रही कि मायावती की ओर से बुलाई गई हालिया बैठकों में भी आकाश आनंद की मौजूदगी नहीं दिखाई दी। इसके उलट मायावती के भाई आनंद कुमार और दूसरे भतीजे ईशान आनंद बैठक में मौजूद रहे। इससे पार्टी के भीतर आकाश की मौजूदा भूमिका को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
मायावती का यह फैसला ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। कुछ समय पहले तक आकाश आनंद को चुनावी अभियान और उम्मीदवारों से जुड़े काम में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई थी।
2027 के चुनाव की कमान से अचानक पीछे क्यों?
हाल ही में आकाश आनंद को यूपी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के उम्मीदवारों के नाम घोषित करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद उन्होंने हाथरस के सादाबाद में सभा कर एक उम्मीदवार के नाम का ऐलान किया था। इसे बीएसपी के चुनावी अभियान की शुरुआत के तौर पर भी देखा गया।
लेकिन इसके तुरंत बाद पार्टी नेतृत्व की ओर से उम्मीदवार चयन का अंतिम अधिकार अपने पास रखने की बात सामने आई। यानी आकाश को उम्मीदवारों के नाम घोषित करने की भूमिका तो मिली, लेकिन अंतिम निर्णय का अधिकार मायावती के पास ही रहा।
इसके बाद आकाश आनंद ने गौतमबुद्ध नगर की जेवर विधानसभा सीट से भी उम्मीदवार के नाम का ऐलान किया। हालांकि, अब पार्टी के ताजा फैसले ने उनके चुनावी रोल पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

कभी मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी माने जाते थे
आकाश आनंद का राजनीतिक सफर वर्ष 2017 में शुरू हुआ था। सहारनपुर के शब्बीरपुर में जातीय हिंसा के बाद मायावती जब वहां पहुंचीं, तब आकाश आनंद पहली बार उनके साथ राजनीतिक मंच पर नजर आए थे। इसके बाद धीरे-धीरे उन्हें मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जाने लगा।
2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान आकाश आनंद ने पार्टी के लिए जोरदार प्रचार किया। उन्होंने बीजेपी और सरकार पर तीखे हमले किए। अपने आक्रामक बयानों के कारण वह तेजी से चर्चा में आए। एक विवादित बयान के बाद उनके खिलाफ मामला दर्ज होने की बात भी सामने आई थी, जिसके बाद मायावती ने उन्हें कुछ समय के लिए सक्रिय राजनीति से दूर कर दिया था।
हालांकि बाद में उन्हें दोबारा पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई।
शादी के बाद भी हुआ बड़ा राजनीतिक विवाद
आकाश आनंद की शादी बीएसपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ की बेटी से हुई थी। शादी के बाद पार्टी के भीतर समीकरणों को लेकर भी चर्चाएं शुरू हुईं।
बाद में मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से बाहर कर दिया। उन पर पार्टी के काम में हस्तक्षेप करने के आरोप लगाए गए थे। इसके बाद आकाश आनंद को भी संगठनात्मक तौर पर पीछे किया गया। हालांकि बाद में माफी और समझौते के बाद आकाश की पार्टी में वापसी हुई।
अब एक बार फिर आकाश आनंद को संगठन की जिम्मेदारियों से मुक्त किए जाने से बीएसपी की अंदरूनी राजनीति चर्चा में है।
क्या आकाश आनंद का राजनीतिक भविष्य खतरे में?
मायावती का ताजा फैसला आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर इसलिए क्योंकि यह पहली बार नहीं है जब उन्हें पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी से पीछे किया गया हो।
हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि आकाश आनंद का राजनीतिक सफर पूरी तरह खत्म हो गया है। बीएसपी में मायावती का फैसला अंतिम माना जाता है और पार्टी के भीतर परिस्थितियों के मुताबिक नेताओं की भूमिका बदलती रही है।
फिलहाल इतना साफ है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले मायावती ने संगठन की कमान अपने हाथों में और मजबूत कर ली है। आकाश आनंद को जिम्मेदारियों से हटाने का फैसला इस बात का संकेत भी माना जा रहा है कि मायावती चुनावी रणनीति में किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहतीं।
अब नजर इस बात पर होगी कि आने वाले महीनों में आकाश आनंद को कोई नई जिम्मेदारी मिलती है या फिर वह लंबे समय तक पार्टी की सक्रिय राजनीति से दूर रहते हैं।

