नई दिल्ली। NSE IPO Update: भारतीय शेयर बाजार से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE को अपने बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (IPO) के लिए बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी SEBI की मंजूरी मिल गई है। सेबी की यह मंजूरी ऐसे समय आई है जब NSE की लिस्टिंग को लेकर लंबे समय से बाजार में चर्चा चल रही थी। अब इस मंजूरी के बाद एक्सचेंज के सार्वजनिक निर्गम की तैयारियों को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।
बताया गया है कि सेबी ने 4 सितंबर को NSE को अपनी अंतिम टिप्पणियां दे दी हैं। यह IPO प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण नियामकीय पड़ाव माना जाता है। हालांकि, सेबी की मंजूरी मिलने के बाद भी सार्वजनिक निर्गम को बाजार में लाने के लिए NSE को संबंधित नियामकीय प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।
करीब ₹30,000 करोड़ का हो सकता है NSE IPO
NSE का प्रस्तावित आईपीओ आकार के लिहाज से बेहद बड़ा माना जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस सार्वजनिक निर्गम का आकार करीब ₹30,000 करोड़ हो सकता है। अगर यह अनुमानित आकार बरकरार रहता है तो NSE का IPO भारतीय पूंजी बाजार के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गमों में शामिल हो सकता है।
इतने बड़े इश्यू का मतलब यह भी होगा कि NSE की संभावित बाजार पूंजी लगभग ₹5 लाख करोड़ से अधिक आंकी जा सकती है। हालांकि, अंतिम IPO आकार और मूल्य निर्धारण आधिकारिक प्रक्रिया के आगे बढ़ने के बाद ही स्पष्ट होगा।
पूरी तरह OFS होगा NSE का IPO
NSE का प्रस्तावित सार्वजनिक निर्गम एक महत्वपूर्ण वजह से भी अलग है। उपलब्ध ड्राफ्ट दस्तावेजों के अनुसार, यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी OFS होगा। इसका अर्थ है कि IPO के जरिए NSE को नई पूंजी नहीं मिलेगी, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचेंगे।
ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी DRHP के अनुसार, मौजूदा शेयरधारक लगभग 14.89 करोड़ शेयर बिक्री के लिए पेश कर सकते हैं। यह NSE की करीब छह फीसदी हिस्सेदारी के बराबर बताई गई है।
इस तरह निवेशकों के लिए यह इश्यू NSE में सीधे नई पूंजी लगाने के बजाय मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी खरीदने का अवसर उपलब्ध कराएगा।
SBI समेत ये बड़े शेयरधारक बेचेंगे हिस्सेदारी
NSE IPO में कई प्रमुख मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी कम कर सकते हैं। इनमें सबसे प्रमुख नाम भारतीय स्टेट बैंक (SBI) का है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, SBI करीब 2.48 करोड़ शेयरों तक की बिक्री कर सकता है। इसके बाद SS Strategic Mauritius Limited का नाम आता है, जो लगभग 1.60 करोड़ शेयर बेच सकता है।
इन शेयरधारकों की ओर से हिस्सेदारी की बिक्री NSE की स्वामित्व संरचना में बदलाव का कारण बनेगी। हालांकि, IPO की अंतिम संरचना और प्रत्येक शेयरधारक द्वारा बेचे जाने वाले शेयरों की संख्या आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार ही अंतिम मानी जाएगी।
करीब एक दशक से क्यों अटकी थी NSE की लिस्टिंग?
NSE की लिस्टिंग कोई नई योजना नहीं है। एक्सचेंज लंबे समय से शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की तैयारी करता रहा है, लेकिन पिछले वर्षों में कई नियामकीय और कानूनी मुद्दों के कारण यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
इनमें को-लोकेशन विवाद एक प्रमुख मुद्दा रहा है। इसके चलते NSE की लिस्टिंग योजना लंबे समय तक अटकी रही। अब सेबी की ओर से अंतिम टिप्पणियां मिलने के बाद इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की उम्मीद मजबूत हुई है।
NSE IPO क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
NSE भारतीय शेयर बाजार के सबसे महत्वपूर्ण बाजार बुनियादी ढांचा संस्थानों में से एक है। ऐसे में इसकी संभावित लिस्टिंग का असर केवल IPO बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पूंजी बाजार के लिए यह एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम होगा।
NSE की लिस्टिंग से निवेशकों को एक्सचेंज के कारोबार और वित्तीय प्रदर्शन में सीधे हिस्सेदारी लेने का अवसर मिल सकता है। साथ ही, बाजार में NSE के मूल्यांकन को लेकर भी व्यापक चर्चा शुरू हो सकती है।
अगर करीब ₹30,000 करोड़ का IPO बाजार में आता है, तो यह आकार के लिहाज से भारत के सबसे बड़े IPO में शामिल होगा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह अक्टूबर 2024 में आए Hyundai Motor India के ₹27,870 करोड़ के IPO से भी बड़ा हो सकता है।
अब आगे क्या होगा?
सेबी की मंजूरी के बाद NSE को IPO से जुड़ी अगली प्रक्रियाओं पर आगे बढ़ना होगा। इसमें अंतिम दस्तावेज, IPO का आकार, शेयरों की कीमत, इश्यू की तारीख और अन्य शर्तों को तय करना शामिल होगा।
फिलहाल सबसे बड़ी खबर यही है कि NSE के बहुप्रतीक्षित IPO को सेबी की हरी झंडी मिल गई है। अब करीब एक दशक से चली आ रही लिस्टिंग की कवायद अपने अगले महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है।

