भोपाल। सरकारी अधिकारी का नाम सुनते ही आमतौर पर लोगों के मन में रुतबा, अधिकार और भरोसे की तस्वीर बनती है। इसी भरोसे और VIP कल्चर का फायदा उठाकर कुछ लोगों ने कथित तौर पर खुद को IAS, IPS और केंद्र सरकार का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों को प्रभावित करने की कोशिश की। मध्य प्रदेश में सामने आए पांच अलग-अलग मामलों में फर्जी पहचान, नकली दस्तावेज, सोशल मीडिया प्रोफाइल, सरकारी नौकरी का झांसा और VIP सुविधाएं हासिल करने जैसे तरीके सामने आए हैं।
इन मामलों में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कथित फर्जी अधिकारियों ने अपने आसपास ऐसा माहौल तैयार किया कि कई लोग उनके दावों पर भरोसा करने लगे। हालांकि, पुलिस कार्रवाई और जांच के बाद उनके दावों की असलियत सामने आई।
पहला मामला: ‘भारत सरकार’ की नेमप्लेट और फर्जी IAS का रौब
तृप्ति सिंह राजपूत पर खुद को MPSTDC की एडिशनल डायरेक्टर और ट्रेनी IAS अधिकारी बताकर लोगों को प्रभावित करने और नौकरी के नाम पर कथित तौर पर पैसे लेने के आरोप हैं।
पुलिस के अनुसार, तृप्ति का नेटवर्क सिवनी, बालाघाट और अशोकनगर तक बताया गया। उसके खिलाफ भोपाल और अशोकनगर में कई FIR दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
आरोप है कि वह ‘भारत सरकार’ की नेमप्लेट लगी इनोवा कार से चलती थी और इसी रुतबे के जरिए बेरोजगार युवाओं तथा अन्य लोगों को प्रभावित करती थी।
पुलिस कार्रवाई के दौरान उसके घर से महंगे मोबाइल फोन, होटल के बिल, फ्लाइट टिकट और कथित फर्जी दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई। जांच एजेंसियां इन वस्तुओं और दस्तावेजों के इस्तेमाल की भी पड़ताल कर रही हैं।
दूसरा मामला: आठवीं पास युवक ने खुद को बताया IPS
ग्वालियर के विकास गौतम उर्फ विकास यादव का मामला भी काफी अलग है। पुलिस के मुताबिक, आठवीं तक पढ़े विकास ने सोशल मीडिया पर खुद को 2020 बैच का IPS अधिकारी बताने वाली पहचान बनाई।
बताया जाता है कि वह दिल्ली के मुखर्जी नगर इलाके में कभी चाय बेचता था। सिविल सेवा की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच रहने के दौरान उसे IAS-IPS अधिकारियों के रुतबे का अंदाजा हुआ और बाद में उसने सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान बनाने का रास्ता अपनाया।
उसने कथित तौर पर Instagram पर @Vikashyadav_ips नाम से प्रोफाइल बनाई और बड़ी संख्या में फॉलोअर्स जुटाए। आरोप है कि इसी पहचान का इस्तेमाल कर उसने एक महिला डॉक्टर को भी झांसे में लिया और मां के इलाज के नाम पर पैसे लिए।
शिकायत के बाद दिल्ली पुलिस की जांच में उसकी पहचान सामने आने की जानकारी दी गई।

तीसरा मामला: एक गलती ने खोल दी फर्जी IPS की पोल
ऋषि कुमार यादव ने कथित तौर पर खुद को 2016 बैच का IPS अधिकारी और इनकम टैक्स विभाग में असिस्टेंट इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर बताया।
आरोप है कि उसने भोपाल के एमपी नगर में UPSC की तैयारी कर रहे छात्रों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया। कथित तौर पर प्रत्येक उम्मीदवार से पैसे मांगे गए।
उसने पुराने ID कार्ड को एडिट कर कथित फर्जी पहचान पत्र और जॉइनिंग लेटर तैयार किया। लेकिन इसी फर्जी दस्तावेज में हुई स्पेलिंग की गलतियों ने छात्रों को शक करने पर मजबूर कर दिया।
छात्रों ने मामले की शिकायत पुलिस से की, जिसके बाद एमपी नगर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजने की कार्रवाई की।
चौथा मामला: घर के बाहर लगा दी ‘IAS राज सोनी’ की नेमप्लेट
गुजरात निवासी हिमांशु पांचाल ने कथित तौर पर इंदौर में खुद को IAS राज सोनी, जिला कलेक्टर बताकर पहचान बनाई।
बताया गया कि उसने ओमेक्स सिटी में किराए का मकान लिया और घर के बाहर बाकायदा IAS राज सोनी की नेमप्लेट लगा दी। इसके अलावा कार और ड्राइवर की व्यवस्था कर लोगों पर अपना रुतबा जमाने की कोशिश की।
पुलिस के मुताबिक, वह ड्राइवरों को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा भी देता था। एक होटल में कथित तौर पर पार्टी के बाद हजारों रुपये का बिल आने पर उसने बिल का भुगतान अपने PA द्वारा कराए जाने की बात कही।
होटल प्रबंधन को शक होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की और कथित फर्जी अधिकारी का पर्दाफाश हुआ।
पांचवां मामला: ‘जॉइंट सेक्रेटरी’ बनकर महाकाल में VIP ट्रीटमेंट की कोशिश
दिल्ली निवासी अतुल कुमार पर खुद को भारत सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय का संयुक्त सचिव बताने का आरोप है।
बताया गया कि वह उज्जैन पहुंचा और सर्किट हाउस में कमरे लेने के साथ महाकाल मंदिर में भस्म आरती के लिए VIP सुविधा हासिल करने का प्रयास किया।
जब मंदिर प्रशासन ने उससे संबंधित दस्तावेज और पहचान का प्रमाण मांगा तो उसके दावों पर सवाल उठे। इसके बाद संबंधित मंत्रालय से सत्यापन कराया गया। पुलिस के मुताबिक, सत्यापन में उसके द्वारा बताए गए पद की पुष्टि नहीं हुई, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
VIP कल्चर और सरकारी नौकरी का लालच बना हथियार
इन पांच मामलों की घटनाएं अलग-अलग हैं, लेकिन इनमें एक समान पैटर्न नजर आता है—सरकारी पद का रुतबा, VIP पहचान और नौकरी का लालच।
फर्जी अधिकारी बनने वाले लोग कभी महंगी कार और नेमप्लेट का सहारा लेते हैं तो कभी सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर अपनी पहचान तैयार करते हैं। कई मामलों में महंगे होटल, सरकारी दफ्तरों के नाम और प्रभावशाली पदों का इस्तेमाल लोगों का भरोसा जीतने के लिए किया गया।
हालांकि, इन मामलों में लगाए गए आरोपों और पुलिस की कार्रवाई के अंतिम कानूनी निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया के बाद ही तय होंगे।

