नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में नई दिल्ली में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है। 12 और 13 सितंबर 2026 को होने वाले इस सम्मेलन के बीच BRICS के संभावित विस्तार को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। इसी कड़ी में पाकिस्तान की लंबे समय से चली आ रही BRICS सदस्य बनने की इच्छा एक बार फिर सुर्खियों में है।
पाकिस्तान ने BRICS में शामिल होने के लिए पहले ही आवेदन कर रखा है और अब उसकी नजर इस बात पर है कि उसे इस प्रभावशाली समूह में प्रवेश मिल पाता है या नहीं।
इस पूरी कहानी में सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि चीन और रूस से संभावित समर्थन के बावजूद पाकिस्तान की राह आसान नहीं है। इसकी सबसे बड़ी वजह BRICS में नए सदस्य को शामिल करने की प्रक्रिया और भारत के साथ पाकिस्तान के मौजूदा संबंध हैं।
2023 में पाकिस्तान ने किया था आवेदन
पाकिस्तान ने वर्ष 2023 में BRICS की सदस्यता के लिए आवेदन किया था। इस्लामाबाद का उद्देश्य दुनिया के तेजी से प्रभावशाली होते आर्थिक समूह का हिस्सा बनना है।
BRICS के विस्तार के बाद अब इसका प्रभाव शुरुआती पांच देशों से काफी आगे बढ़ चुका है। मौजूदा सदस्य देशों में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका के अलावा मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और इंडोनेशिया शामिल हैं।
यही वजह है कि पाकिस्तान इस समूह को अपने लिए आर्थिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानता है।
पाकिस्तान के लिए BRICS क्यों है इतना अहम?
पाकिस्तान के लिए BRICS की सदस्यता केवल कूटनीतिक उपलब्धि नहीं बल्कि आर्थिक अवसर के तौर पर भी देखी जा रही है।
BRICS के सदस्य देशों का वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा और खाद्य बाजारों में महत्वपूर्ण योगदान है। पाकिस्तान के लिए चीन जैसे देशों के साथ व्यापार पहले से ही महत्वपूर्ण है।
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान का टेक्सटाइल निर्यात उसकी अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके अलावा चीन को तांबे के निर्यात में भी वृद्धि हुई है। पाकिस्तान का मानना हो सकता है कि उसके प्राकृतिक संसाधन, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति BRICS के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
हालांकि, सिर्फ आर्थिक तर्क के आधार पर सदस्यता मिलना तय नहीं है।
चीन और रूस से मिल सकता है समर्थन
पाकिस्तान को उम्मीद है कि BRICS के दो प्रभावशाली सदस्य चीन और रूस उसके आवेदन का समर्थन कर सकते हैं।
चीन और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं। दोनों देश विभिन्न परियोजनाओं और व्यापारिक गतिविधियों में साझेदार रहे हैं।
दूसरी ओर रूस के साथ भी पाकिस्तान अपने संबंधों को लगातार मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में इस्लामाबाद को उम्मीद हो सकती है कि इन दोनों देशों का समर्थन उसकी सदस्यता की कोशिश को मजबूती देगा।
लेकिन यहां पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ी चुनौती कुछ और है।
भारत की मंजूरी क्यों बन गई सबसे बड़ी बाधा?
BRICS के विस्तार की प्रक्रिया में सर्वसम्मति बेहद महत्वपूर्ण है। यानी किसी नए देश को समूह में शामिल करने के लिए मौजूदा सदस्यों के बीच सहमति जरूरी है।
यही नियम पाकिस्तान की सदस्यता की कोशिश को भारत के रुख से जोड़ देता है।
भारत और पाकिस्तान के रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। सीमा, आतंकवाद और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के कारण दोनों देशों के बीच संबंधों में लगातार तनाव देखने को मिला है।
ऐसे में पाकिस्तान के आवेदन पर भारत का रुख निर्णायक महत्व रख सकता है।
चीन-रूस का समर्थन, फिर भी रास्ता मुश्किल?
यही वह बिंदु है जहां पाकिस्तान की पूरी रणनीति चुनौती में बदल जाती है।
अगर चीन और रूस पाकिस्तान की सदस्यता का समर्थन करते हैं, तब भी भारत की सहमति के बिना मामला आगे बढ़ना मुश्किल हो सकता है।
यानी इस्लामाबाद के लिए केवल बीजिंग और मॉस्को का समर्थन हासिल करना पर्याप्त नहीं होगा। उसे नई दिल्ली के रुख को भी ध्यान में रखना होगा।
फिलहाल भारत की ओर से पाकिस्तान को BRICS में शामिल किए जाने को लेकर किसी स्पष्ट समर्थन का संकेत सामने नहीं आया है।
भारत-पाकिस्तान संबंधों का असर
भारत और पाकिस्तान के संबंधों पर क्षेत्रीय सुरक्षा और हालिया घटनाओं का भी असर पड़ा है। दोनों देशों के बीच मई 2025 के सैन्य टकराव के बाद तनाव और बढ़ा था।
ऐसे माहौल में पाकिस्तान की BRICS सदस्यता का मुद्दा केवल आर्थिक विस्तार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे व्यापक भू-राजनीतिक संदर्भ में भी देखा जाएगा।
BRICS के सामने भी चुनौती यही होगी कि वह नए सदस्यों को शामिल करते समय आर्थिक क्षमता के साथ-साथ राजनीतिक और रणनीतिक परिस्थितियों को किस तरह संतुलित करता है।
BRICS Summit 2026 में क्या होगा?
नई दिल्ली में हो रहा BRICS Summit 2026 ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब समूह का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
भारत की अध्यक्षता में होने वाले सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, विकास, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों पर चर्चा प्रमुख रहने की उम्मीद है।
इसी बीच पाकिस्तान की सदस्यता की चर्चा यह संकेत देती है कि BRICS का विस्तार आने वाले वर्षों में भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति का महत्वपूर्ण विषय बना रह सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पाकिस्तान को चीन और रूस का समर्थन मिल पाएगा और उससे भी बड़ा सवाल—क्या भारत उसके आवेदन को मंजूरी देगा?
फिलहाल पाकिस्तान की BRICS में एंट्री की राह आसान नजर नहीं आती।

