नई दिल्ली: लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के संस्थापक और भारत के वांछित आतंकवादियों में शामिल हाफिज सईद को लेकर राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने जम्मू की विशेष अदालत में बड़ा दावा किया है। जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि हाफिज सईद पाकिस्तान में मौजूद है और वहीं से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय कथित आतंकी गतिविधियों को संचालित करने की भूमिका में है।
इस मामले में अदालत ने सईद के खिलाफ दो महीने के भीतर दूसरी बार गैर-जमानती वारंट जारी किया है। मामला जम्मू-कश्मीर में सक्रिय कथित आतंकवादी नेटवर्क को हथियार और धन उपलब्ध कराने तथा उसके सदस्यों को निर्देश देने के आरोपों से जुड़ा है।
NIA ने अदालत में क्या कहा?
NIA ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 75 के तहत हाफिज सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने की मांग की थी। एजेंसी ने उसे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरगोधा का निवासी और मामले में फरार आरोपी बताया।
जांच एजेंसी के मुताबिक, सईद भारत में मौजूद नहीं है और सामान्य कानूनी प्रक्रिया के जरिए उसे अदालत के सामने पेश कराना संभव नहीं हो पाया। NIA का दावा है कि वह पाकिस्तान में रहते हुए कथित तौर पर अपनी गतिविधियों को जारी रखे हुए है।
विशेष न्यायाधीश प्रेम सागर ने 8 सितंबर को NIA की दलीलों पर सुनवाई की। अदालत के समक्ष जांच एजेंसी ने सईद की कथित भूमिका और उसके फरार होने से संबंधित तथ्य रखे। इसके बाद अदालत ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया।
एक गिरफ्तारी से खुली जांच की नई कड़ी
इस पूरे मामले की जांच की शुरुआत इस साल श्रीनगर के बाहरी इलाके से मोहम्मद नकीब भट की गिरफ्तारी के बाद आगे बढ़ी थी। जांच एजेंसी के अनुसार, बाटपोरा निवासी भट के पास से चीन निर्मित एक हथगोला और 15 कारतूस बरामद किए गए थे।
इसके बाद जकूरा थाने में उसके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA, आयुध अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।
जांच आगे बढ़ने के साथ एजेंसी ने कथित आतंकी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की गतिविधियों की पड़ताल शुरू की। इसी क्रम में कई कथित आतंकियों और दो पाकिस्तानी नागरिकों की गिरफ्तारी का भी उल्लेख सामने आया।
लश्कर और TRF कनेक्शन की जांच
NIA का कहना है कि जांच के दौरान जम्मू-कश्मीर में सक्रिय एक कथित आतंकी नेटवर्क का पता चला। इसमें लश्कर-ए-तैयबा और उससे जुड़े संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) से संबंधित संदिग्ध गतिविधियों की जांच की गई।
एजेंसी के मुताबिक, इसी जांच के दौरान हाफिज सईद की कथित भूमिका सामने आई। जांचकर्ताओं का दावा है कि गिरफ्तार किए गए पाकिस्तानी नागरिकों के संपर्क भी सईद से होने की बात सामने आई है।
हालांकि, ये सभी बातें जांच एजेंसी के दावे और आरोपों के आधार पर हैं। मामले की अंतिम कानूनी स्थिति अदालत में होने वाली आगे की कार्यवाही और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।
पाकिस्तान से निर्देश देने का आरोप
NIA ने अदालत को बताया कि सईद पाकिस्तान में रहते हुए कथित तौर पर कश्मीर घाटी में सक्रिय आतंकवादियों को हथियार और धन उपलब्ध कराने तथा उन्हें निर्देश देने में भूमिका निभा रहा है।
जांच एजेंसी के अनुसार, मामले की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर सईद की कथित संलिप्तता की जांच की गई। एजेंसी ने अदालत को यह भी बताया कि वह फिलहाल पाकिस्तान में है और फरार आरोपी के तौर पर जांच का सामना कर रहा है।
यही कारण है कि NIA ने अदालत से उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने का अनुरोध किया।
दो महीने में दूसरी बार वारंट
हाफिज सईद के खिलाफ यह पहली कानूनी कार्रवाई नहीं है। जम्मू की विशेष NIA अदालत इससे पहले भी उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर चुकी है।
8 जुलाई 2026 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले से संबंधित मामले में भी सईद के खिलाफ पहला गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था। उस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 25 पर्यटक और एक स्थानीय व्यक्ति शामिल था।
अब सितंबर में दूसरी बार वारंट जारी होने से यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।
क्यों महत्वपूर्ण है NIA की यह कार्रवाई?
हाफिज सईद का नाम लंबे समय से भारत की आतंकवाद विरोधी जांच और सुरक्षा एजेंसियों की जांच के केंद्र में रहा है। ऐसे में NIA द्वारा अदालत में यह दावा करना कि सईद पाकिस्तान में मौजूद है और कथित तौर पर वहां से गतिविधियां संचालित कर रहा है, मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण बनाता है।
गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद अब आगे की कानूनी प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि आरोपी की गिरफ्तारी या उसे अदालत के समक्ष पेश कराने के लिए जांच एजेंसी क्या कदम उठाती है।
भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी नेटवर्क के वित्तपोषण, हथियारों की आपूर्ति और सीमा पार से कथित निर्देशों की जांच एक महत्वपूर्ण सुरक्षा चुनौती बनी हुई है।

