Clean Ganga: गंगा को भारत में सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि मां का दर्जा दिया जाता है। इसके बावजूद नदी में कचरा फेंकने की तस्वीरें अक्सर सामने आती रहती हैं। इसी विरोधाभास के बीच उत्तर प्रदेश के रहने वाले शिवम कुमार का प्रयास लोगों का ध्यान खींच रहा है। सोशल मीडिया पर सामने आए उनके वीडियो में वह गंगा के किनारे और पानी के भीतर उतरकर कचरा निकालते दिखाई देते हैं।
शिवम के इस अभियान को सोशल मीडिया पर ‘क्लीन गंगा मिशन’ के तौर पर देखा जा रहा है। उनके साझा किए गए वीडियो के मुताबिक, वह पिछले करीब एक साल से गंगा की सफाई के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। खास बात यह है कि इस काम के लिए उनके पास कोई बड़ा संसाधन या टीम नहीं है। वह बेहद सामान्य सुरक्षा साधनों के साथ नदी में उतरकर कचरा बाहर निकालते हैं।
पानी के अंदर कांच और कचरे के बीच सफाई
शिवम के वीडियो में नदी के अंदर और किनारों पर बड़ी मात्रा में जमा कचरा दिखाई देता है। इसमें टूटी कांच की बोतलें, पुराने कपड़े, गत्ते के डिब्बे, प्लास्टिक और खराब हो चुका सामान शामिल है।
नदी में सफाई करना सामान्य परिस्थितियों में भी चुनौतीपूर्ण काम है। पानी के अंदर दिखाई देने की क्षमता सीमित होने के कारण वहां पड़े नुकीले या टूटे हुए सामान से चोट का खतरा बना रहता है। इसके बावजूद शिवम कई बार पानी में उतरकर कचरा एकत्र करते नजर आते हैं।
उनके वीडियो में ऐसे दृश्य भी दिखाई देते हैं, जहां सफाई के दौरान पानी में सांप नजर आते हैं। इन परिस्थितियों के बावजूद वह अपना काम जारी रखने की कोशिश करते हैं। हालांकि, ऐसे काम में सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है और इसे अकेले करना जोखिम भरा हो सकता है।
एक साल से जारी है ‘Clean Ganga’ अभियान
शिवम कुमार खुद को कंटेंट क्रिएटर और व्लॉगर के रूप में पेश करते हैं। सोशल मीडिया पर उनके वीडियो सिर्फ नदी की सफाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनमें गंगा प्रदूषण की जमीनी तस्वीर भी दिखाई जाती है।
उनका उद्देश्य लोगों को यह दिखाना भी है कि जिस नदी को हम धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से इतना महत्वपूर्ण मानते हैं, उसी में बड़ी मात्रा में कचरा पहुंच रहा है।
शिवम के वीडियो में कई बार वह पानी और नदी के किनारे से कचरा निकालते हुए दिखाई देते हैं। उनके प्रयासों का एक बड़ा हिस्सा लोगों को यह समझाने की कोशिश करता है कि नदी को साफ रखने की जिम्मेदारी केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि आम लोगों की भी है।
सफाई के लिए नौकरी की तलाश भी कर रहे हैं शिवम
इस अभियान का एक दूसरा पहलू भी सामने आया है—आर्थिक संघर्ष।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में शिवम काम की तलाश करते दिखाई देते हैं। बताया गया है कि वह अपनी जरूरतों और सफाई अभियान का खर्च निकालने के लिए दुकानों पर जाकर काम मांग रहे हैं।
यानी एक तरफ वह गंगा की सफाई के लिए अपना समय दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इस अभियान को जारी रखने के लिए खुद आर्थिक चुनौती का सामना कर रहे हैं।
यह पहल इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि किसी बड़े संस्थान या संसाधन के बजाय एक व्यक्ति अपने स्तर पर लगातार काम करने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है।

जब लोगों ने नदी में ही फेंक दिया कचरा
शिवम के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल नदी के अंदर जमा पुराना कचरा नहीं है। उनके मुताबिक, समस्या का एक बड़ा कारण लोगों की आदत भी है।
उनके द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में एक महिला नदी में कचरे से भरा बैग फेंकती हुई दिखाई देती है। इस तरह की घटनाएं उनके प्रयासों की मुश्किल को और बढ़ा देती हैं।
एक तरफ शिवम घंटों मेहनत करके नदी से कचरा बाहर निकालते हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग दोबारा उसी नदी में कचरा डाल देते हैं। यही वजह है कि उनका अभियान केवल सफाई तक सीमित नहीं बल्कि व्यवहार में बदलाव की अपील भी करता नजर आता है।
इंटरनेट पर लोगों ने की शिवम की तारीफ
शिवम के वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। कई यूजर्स उनके प्रयास की सराहना कर रहे हैं और इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में व्यक्तिगत पहल बता रहे हैं।
लोगों का कहना है कि नदी प्रदूषण को लेकर केवल चर्चा करने के बजाय शिवम खुद जमीन पर उतरकर काम कर रहे हैं। उनके वीडियो में दिखाई देने वाली मेहनत ने इंटरनेट यूजर्स को प्रभावित किया है।
हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी दावे की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग स्तर पर आवश्यक होती है। शिवम के अभियान से जुड़े कई विवरण उनके अपने सोशल मीडिया वीडियो और पोस्ट पर आधारित हैं।
गंगा को साफ रखने की जिम्मेदारी किसकी?
गंगा की सफाई केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। सरकारें स्वच्छता और प्रदूषण नियंत्रण के लिए योजनाएं चलाती हैं, लेकिन नदी में कचरा पहुंचने से रोकना आम नागरिकों की भूमिका से भी जुड़ा है।
शिवम कुमार का अभियान इसी सवाल को सामने लाता है—अगर एक व्यक्ति नदी से कचरा निकालने के लिए पानी में उतर सकता है, तो क्या हम कम से कम नदी में कचरा डालना बंद नहीं कर सकते?
उनकी कहानी गंगा सफाई के साथ-साथ नागरिक जिम्मेदारी का भी संदेश देती है। असली बदलाव तभी संभव है जब नदी से कचरा निकालने के साथ-साथ उसमें कचरा पहुंचने की प्रक्रिया भी रोकी जाए।

