मुंबई। भारतीय टेलीविजन के इतिहास में कुछ शो ऐसे रहे हैं, जिनकी लोकप्रियता समय के साथ कम होने के बजाय और मजबूत होती गई। रामानंद सागर की 1987 में आई ‘रामायण’ भी ऐसा ही एक शो है। रविवार की सुबह टीवी पर इसका प्रसारण शुरू होते ही सड़कों का खाली हो जाना आज भी भारतीय टेलीविजन की सबसे यादगार घटनाओं में गिना जाता है।
अब दशकों बाद इस ऐतिहासिक शो की कहानी एक बार फिर दर्शकों के सामने आने वाली है। रामानंद सागर के पोते शिव सागर 1987 की ‘रामायण’ के निर्माण पर करीब 60 मिनट की एक खास डॉक्यूमेंट्री तैयार कर रहे हैं। इसमें शो के पर्दे के पीछे की ऐसी कहानियां और फुटेज दिखाए जाने की तैयारी है, जिनके बारे में दर्शकों ने शायद ही कभी सुना हो।
पुरानी ‘रामायण’ के पर्दे के पीछे की कहानी
इस डॉक्यूमेंट्री का सबसे बड़ा आकर्षण यह होगा कि दर्शकों को सिर्फ स्क्रीन पर दिखाई देने वाली ‘रामायण’ नहीं, बल्कि उसके पीछे की पूरी दुनिया देखने को मिलेगी।
शिव सागर के मुताबिक डॉक्यूमेंट्री में उनके दादा रामानंद सागर के शो को तैयार करने के दौरान सामने आई चुनौतियों, किस्सों, रीटेक और शूटिंग से जुड़े अनुभवों को शामिल किया गया है।
इसके लिए सीरीज से जुड़े कलाकारों, क्रू और तकनीशियनों के इंटरव्यू भी रिकॉर्ड किए गए हैं। इसके अलावा रामानंद सागर और उनके बेटे प्रेम सागर से जुड़े पुराने वीडियो फुटेज को भी डॉक्यूमेंट्री का हिस्सा बनाया जा रहा है।
यानी दर्शकों को यह देखने का मौका मिलेगा कि वह ‘रामायण’ आखिर बनी कैसे, जिसने भारतीय टेलीविजन की परिभाषा ही बदल दी थी।
बिना CGI और आधुनिक VFX के कैसे बनी थी इतनी बड़ी दुनिया?
आज के दौर में किसी बड़े पौराणिक प्रोजेक्ट की कल्पना आधुनिक कंप्यूटर ग्राफिक्स, CGI और विजुअल इफेक्ट्स के बिना करना मुश्किल लगता है। लेकिन 1980 के दशक में तकनीक आज जैसी नहीं थी।
शिव सागर ने बताया कि उस समय कंप्यूटर आधारित विजुअल इफेक्ट्स की सुविधा नहीं थी और टीम को बेहद सीमित तकनीकी संसाधनों में काम करना पड़ता था। एडिटिंग के लिए भी लीनियर एडिटिंग मशीनों का इस्तेमाल होता था।
ऐसे समय में रामानंद सागर ने जिस स्तर की दुनिया स्क्रीन पर तैयार की, उसकी प्रक्रिया को डॉक्यूमेंट्री में विस्तार से दिखाने की कोशिश की जा रही है।
यही पहल डॉक्यूमेंट्री को सिर्फ एक पुराने टीवी शो की याद नहीं, बल्कि भारतीय टेलीविजन के तकनीकी इतिहास का दस्तावेज भी बना सकती है।
उमरगाम के सेट पर उमड़ती थी हजारों लोगों की भीड़
शिव सागर ने अपने बचपन की एक याद भी साझा की है। उन्होंने बताया कि वह करीब 10 साल की उम्र में उमरगाम स्थित ‘रामायण’ के सेट पर गए थे।
उनके मुताबिक, शूटिंग देखने और कलाकारों की एक झलक पाने के लिए देशभर से लोग पहुंचते थे। सेट के बाहर दसियों हजार लोगों की भीड़ जमा हो जाती थी।
उस दौर में न सोशल मीडिया था और न ही इंटरनेट पर किसी शो की झलक तुरंत उपलब्ध होती थी। ऐसे में ‘रामायण’ के कलाकारों को करीब से देखने की लोगों की उत्सुकता अपने आप में शो की लोकप्रियता का अंदाजा देती थी।
पर्दे के पीछे काम करने वाली महिलाओं की कहानी भी आएगी सामने
डॉक्यूमेंट्री का एक अहम पहलू उन लोगों की कहानियां भी होंगी, जो कैमरे के सामने नहीं दिखे लेकिन शो को सफल बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
शिव सागर के अनुसार, डॉक्यूमेंट्री में उन महिलाओं के अनुभवों को भी जगह दी जाएगी जिन्होंने मूल ‘रामायण’ के निर्माण में पर्दे के पीछे काम किया था।
इससे दर्शकों को शो की विरासत का एक ऐसा पहलू देखने को मिल सकता है, जिस पर आमतौर पर चर्चा कम होती है।
दिवाली वाले हफ्ते में रिलीज करने की तैयारी
शिव सागर के मुताबिक करीब 60 मिनट की यह डॉक्यूमेंट्री फिलहाल पोस्ट-प्रोडक्शन चरण में है। इसका वर्किंग टाइटल ‘Behind the Scenes of the Ramayan’ बताया गया है।
इसे दिवाली वाले हफ्ते में रिलीज करने की योजना है। हालांकि, फिलहाल इसे किसी निश्चित तारीख की आधिकारिक रिलीज घोषणा के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
डॉक्यूमेंट्री को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्शकों तक पहुंचाने की तैयारी है और इसे यूट्यूब के ‘तिलक’ चैनल पर लॉन्च किए जाने की बात कही गई है।
रणबीर कपूर भी बन सकते हैं इस कहानी का हिस्सा?
इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प कनेक्शन मौजूदा दौर की ‘रामायण’ से बनता है।
नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण: पार्ट 1’ में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में पुरानी ‘रामायण’ की विरासत और नई फिल्म का कनेक्शन दर्शकों के लिए खास दिलचस्पी पैदा कर सकता है।
शिव सागर ने बताया है कि वह रणबीर कपूर और ‘रामायण: पार्ट 1’ की टीम को कर्जत स्थित राम मंदिर में आमंत्रित करना चाहते हैं। यह मंदिर रामानंद सागर परिवार से जुड़ा हुआ है।
हालांकि, रणबीर कपूर का डॉक्यूमेंट्री में आधिकारिक तौर पर गेस्ट के रूप में शामिल होना अभी निश्चित नहीं माना जा सकता। फिलहाल यह शिव सागर की इच्छा और संभावित मुलाकात के तौर पर सामने आया है।
पुरानी यादें और नई ‘रामायण’ का अनोखा कनेक्शन
एक तरफ 1987 की ‘रामायण’ भारतीय टेलीविजन की सबसे यादगार प्रस्तुतियों में शामिल है, तो दूसरी तरफ नई पीढ़ी के लिए नितेश तिवारी की फिल्म एक बड़े सिनेमाई प्रोजेक्ट के रूप में चर्चा में है।
ऐसे में रामानंद सागर की डॉक्यूमेंट्री का उसी समय के आसपास आना जब नई ‘रामायण’ को लेकर उत्सुकता चरम पर है, इसे और खास बना सकता है।

