नई दिल्ली। मानसून की विदाई का समय नजदीक आते ही देश के कई हिस्सों में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। मध्य और पश्चिम भारत में बारिश की गतिविधियां बढ़ने के साथ मानसून की वापसी की प्रक्रिया भी फिलहाल आसान नजर नहीं आ रही। मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है, जबकि उत्तर भारत के कुछ राज्यों में भी अगले कुछ दिनों तक वर्षा और गरज-चमक का असर देखने को मिल सकता है।
मौसम विभाग के मौजूदा पूर्वानुमान में पश्चिमी मध्य प्रदेश में 13 और 14 सितंबर को बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में भी 11 और 12 सितंबर को भारी बारिश तथा उसके बाद कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश का अनुमान है।
ऐसे मौसम में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मानसून अपनी सामान्य विदाई की तारीख के आसपास पीछे हट पाएगा या इस बार वापसी में और देरी होगी?
मध्य प्रदेश में बारिश का जोर
मध्य प्रदेश इस समय मानसूनी गतिविधियों वाले प्रमुख राज्यों में बना हुआ है। IMD के अनुसार पश्चिमी मध्य प्रदेश में 13 और 14 सितंबर को बहुत भारी बारिश के साथ गरज-चमक की संभावना है।
पूर्वी मध्य प्रदेश में भी बारिश की गतिविधियां बनी हुई हैं। ऐसे में राज्य के कई हिस्सों में अचानक तेज बारिश, गरज-चमक और स्थानीय स्तर पर जलभराव जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं।
मानसून की विदाई के समय मध्य प्रदेश में सक्रिय बारिश का बने रहना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे वातावरण में नमी और बादल छाए रहने की स्थिति बनी रहती है।
राजस्थान में भी बारिश का असर
राजस्थान को मानसून की वापसी की प्रक्रिया के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। IMD के 11 सितंबर के पूर्वानुमान में पूर्वी राजस्थान में 13 और 14 सितंबर को भारी बारिश के साथ गरज-चमक की संभावना जताई गई है। 15 और 16 सितंबर को भी आंधी-तूफान और बिजली चमकने जैसी गतिविधियों की संभावना बनी हुई है।
वहीं पश्चिमी राजस्थान में 13 और 14 सितंबर को गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना बताई गई है। इसके बाद मौसम अपेक्षाकृत शांत रहने का अनुमान है।
यह स्थिति मानसून की वापसी की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि पश्चिमी राजस्थान से ही दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी का शुरुआती चरण आमतौर पर देखा जाता है।
गुजरात में तीन सप्ताह बाद लौटी बारिश
गुजरात में भी लंबे सूखे अंतराल के बाद बारिश की गतिविधियां दोबारा बढ़ी हैं। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक करीब तीन सप्ताह के कमजोर मानसूनी दौर के बाद गुजरात में बारिश लौटने की संभावना बनी और दक्षिण गुजरात तथा सौराष्ट्र के कुछ हिस्सों में बारिश का अनुमान जताया गया। हालांकि सौराष्ट्र और कच्छ में बारिश की कमी अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है।
इससे साफ है कि राज्य में बारिश का वितरण एक जैसा नहीं है। कुछ इलाकों में अच्छी बारिश हुई है, जबकि कुछ हिस्से अभी भी कमी से जूझ रहे हैं।
उत्तर भारत में भी सक्रिय रह सकता है मानसून
मानसून की गतिविधि सिर्फ मध्य और पश्चिम भारत तक सीमित नहीं है। उत्तर भारत के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में भी बारिश की संभावना बनी हुई है।
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश और गरज-चमक का दौर देखने को मिल सकता है। खासतौर पर उत्तराखंड में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए स्थानीय स्तर पर मौसम पर नजर रखना जरूरी रहेगा।
उत्तर भारत में बारिश की तीव्रता और वितरण हर जगह समान नहीं रहेगा। कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि कुछ स्थानों पर तेज बारिश के दौर देखने को मिल सकते हैं।

दिल्ली-NCR का क्या रहेगा हाल?
दिल्ली-NCR में मानसून की गतिविधि पूरी तरह समाप्त होने की स्थिति अभी नहीं मानी जा सकती। स्थानीय मौसम परिस्थितियों और नमी के आधार पर कुछ क्षेत्रों में बादल और बारिश के दौर बन सकते हैं।
हालांकि दिल्ली में बारिश का पूर्वानुमान पूरे क्षेत्र के लिए एक जैसा नहीं होता। इसलिए स्थानीय मौसम अपडेट के आधार पर ही किसी विशेष दिन की बारिश का आकलन करना बेहतर होगा।
मानसून की विदाई सिर्फ बारिश रुकने से तय नहीं होती
मानसून की वापसी को लेकर एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। IMD के अनुसार मानसून की विदाई घोषित करने के लिए केवल बारिश का कम होना पर्याप्त नहीं है।
इसके लिए किसी क्षेत्र में लगातार पांच दिनों तक वर्षा गतिविधि में कमी, निचले वायुमंडल में एंटी-साइक्लोन की स्थापना और वातावरण में नमी की पर्याप्त कमी जैसे संकेतों को देखा जाता है। आगे की वापसी के लिए इन संकेतों की निरंतरता और क्षेत्रीय स्थिति भी महत्वपूर्ण होती है।
यही कारण है कि किसी क्षेत्र में कुछ दिनों तक बारिश कम होने के बावजूद मानसून की आधिकारिक वापसी तुरंत घोषित नहीं की जाती।
किसानों के लिए सितंबर की बारिश क्यों महत्वपूर्ण?
सितंबर की बारिश कृषि के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां मानसून के दौरान बारिश का वितरण असमान रहा है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात के कुछ हिस्सों में बारिश की कमी और लंबे सूखे अंतराल के बाद हुई बारिश फसलों के लिए राहत दे सकती है।
हालांकि बहुत ज्यादा बारिश होने पर खेतों में जलभराव और फसलों को नुकसान का जोखिम भी रहता है। इसलिए बारिश की मात्रा के साथ उसका वितरण और अवधि भी कृषि के लिए महत्वपूर्ण है।
अगले कुछ दिन क्यों हैं अहम?
आने वाले दिनों में मध्य और पश्चिम भारत के साथ उत्तर भारत के मौसम पर भी नजर रहेगी। यदि बारिश और नमी की गतिविधियां बनी रहती हैं तो मानसून की वापसी का शुरुआती चरण आगे खिसक सकता है।
दूसरी ओर, यदि वर्षा गतिविधि तेजी से कम होती है और वातावरण में शुष्कता बढ़ती है, तो मानसून की वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
इसलिए 17 सितंबर के आसपास की सामान्य वापसी तारीख को केवल एक संदर्भ बिंदु के तौर पर देखा जाना चाहिए, न कि हर साल लागू होने वाली निश्चित तारीख के रूप में। IMD की वास्तविक घोषणा मौसमी परिस्थितियों के आधार पर होती है।

