लखनऊ। मोबाइल, इंटरनेट और डिजिटल कंटेंट के दौर में पली-बढ़ी Gen-Z पीढ़ी को अपनी जड़ों, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने नई पहल शुरू की है। इसके तहत विद्यार्थियों को किताबों में पढ़े इतिहास को सिर्फ पढ़ने के बजाय संग्रहालयों में मौजूद वास्तविक धरोहरों के माध्यम से समझने का अवसर दिया जाएगा।
प्रदेश सरकार ने राजकीय संग्रहालयों और विद्यार्थियों को जोड़ने के लिए ‘एक दिवसीय अध्ययन यात्रा योजना’ शुरू की है। इस पहल के तहत अलग-अलग जिलों के विद्यार्थियों को शैक्षिक भ्रमण के लिए संग्रहालयों तक लाया जाएगा। यहां उन्हें निःशुल्क प्रवेश के साथ विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में गाइडेड विजिट कराई जाएगी।
सरकार का मानना है कि संग्रहालयों में मौजूद प्राचीन वस्तुओं, कलाकृतियों और ऐतिहासिक धरोहरों को प्रत्यक्ष रूप से देखने से विद्यार्थियों में इतिहास और संस्कृति के प्रति रुचि बढ़ेगी।
लखनऊ के राज्य संग्रहालय से हुई शुरुआत
इस योजना की शुरुआत लखनऊ के राज्य संग्रहालय से की गई है। पहले चरण में जिले के दो पीएम श्री विद्यालयों के करीब 600 छात्र-छात्राओं ने शैक्षिक भ्रमण किया।
इनमें पीएम श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज और पीएम श्री राजकीय उत्तर प्रदेश सैनिक इंटर कॉलेज, सरोजनीनगर के विद्यार्थी शामिल रहे।
छात्रों को संग्रहालय में मौजूद ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की वस्तुओं के बारे में जानकारी दी गई। गाइडेड विजिट के माध्यम से विद्यार्थियों को धरोहरों को समझने और उनसे जुड़े इतिहास को जानने का अवसर मिला।
यह पहल केवल घूमने-फिरने तक सीमित नहीं रखी गई है, बल्कि इसे विद्यार्थियों के लिए शैक्षिक अनुभव के तौर पर तैयार किया गया है।
सितंबर में इन जिलों के विद्यार्थी पहुंचेंगे लखनऊ
योजना के अगले चरण में कई जिलों के विद्यार्थियों को लखनऊ के राज्य संग्रहालय का भ्रमण कराया जाएगा।
15 सितंबर को उन्नाव जिले के तीन पीएम श्री विद्यालयों के विद्यार्थी संग्रहालय पहुंचेंगे।
इसके बाद 16 और 17 सितंबर को सीतापुर जिले के सात पीएम श्री विद्यालयों के लगभग 3,000 विद्यार्थी राज्य संग्रहालय का भ्रमण करेंगे।
18 सितंबर को रायबरेली जिले के तीन कॉलेजों के विद्यार्थियों का शैक्षिक भ्रमण प्रस्तावित है।
वहीं 19 सितंबर को बाराबंकी जिले के कई विद्यालयों के विद्यार्थी लखनऊ पहुंचेंगे। इनमें पीएम श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज सूरतगंज, बालिका इंटर कॉलेज हैदरगढ़, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बरौलीजाटा, बालिका इंटर कॉलेज फतेहपुर, बालिका इंटर कॉलेज जैदपुर मोड़ और इंटर कॉलेज बाराबंकी शामिल हैं।
इस तरह शुरुआती चरण में ही बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को संग्रहालय से जोड़ने की योजना बनाई गई है।

छात्रों को मिलेगी मुफ्त एंट्री और गाइडेड विजिट
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, ‘एक दिवसीय अध्ययन यात्रा योजना’ के तहत विद्यार्थियों को राजकीय संग्रहालयों में निःशुल्क प्रवेश दिया जाएगा।
इसके साथ विद्यार्थियों को आवश्यक सहयोग और गाइडेड विजिट की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
इसका मकसद यह है कि छात्र संग्रहालय में मौजूद वस्तुओं को केवल देखकर वापस न लौटें, बल्कि उनके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व को भी समझें।
यात्रा के दौरान होने वाली गतिविधियों की जियो-टैग फोटो और वीडियो भी राज्य परियोजना कार्यालय को उपलब्ध कराई जाएगी। इससे योजना की गतिविधियों और विद्यार्थियों की भागीदारी का रिकॉर्ड तैयार किया जा सकेगा।
यूपी के 60 से ज्यादा जिलों के विद्यार्थियों को लाभ
यह पहल केवल लखनऊ या आसपास के कुछ जिलों तक सीमित नहीं रहने वाली है। सरकार ने प्रदेश के बड़ी संख्या में जिलों के विद्यार्थियों को इस योजना से जोड़ने की तैयारी की है।
इनमें आगरा, अलीगढ़, अमेठी, अमरोहा, आजमगढ़, अयोध्या, बहराइच, बांदा, बाराबंकी, बरेली, बस्ती, भदोही, बिजनौर, बदायूं, बुलंदशहर, चंदौली, चित्रकूट, देवरिया, इटावा, फर्रुखाबाद, फतेहपुर, फिरोजाबाद, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, गोंडा, गोरखपुर, हमीरपुर, हरदोई, जालौन, झांसी, कानपुर देहात, कानपुर नगर, कासगंज, लखीमपुर खीरी, ललितपुर, लखनऊ, महोबा, मैनपुरी, मथुरा, मेरठ, मिर्जापुर, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, पीलीभीत, प्रतापगढ़, प्रयागराज, रायबरेली, रामपुर, संभल, सहारनपुर, संत कबीरनगर, शाहजहांपुर, सीतापुर, सोनभद्र, सुलतानपुर, उन्नाव और वाराणसी शामिल हैं।
इससे साफ है कि योजना का दायरा प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों तक रखा गया है।
किताबों से निकलकर असली धरोहरों तक पहुंचेगी पढ़ाई
अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने इस पहल के उद्देश्य पर जोर देते हुए कहा कि किताबों में पढ़े इतिहास को जब विद्यार्थी संग्रहालयों में मौजूद वास्तविक धरोहरों के माध्यम से देखेंगे, तो उनका अनुभव ज्यादा प्रभावी और यादगार होगा।
दरअसल, इतिहास पढ़ाने का पारंपरिक तरीका अक्सर किताबों और कक्षा तक सीमित रहता है। संग्रहालय भ्रमण के जरिए विद्यार्थियों को उसी इतिहास से जुड़े वास्तविक अवशेष और कलाकृतियां देखने का अवसर मिलता है।
इससे छात्रों में सवाल पूछने, चीजों को करीब से समझने और अपनी सांस्कृतिक विरासत को लेकर जिज्ञासा पैदा होने की उम्मीद है।
Gen-Z को अपनी जड़ों से जोड़ने की कोशिश
आज की Gen-Z पीढ़ी डिजिटल दुनिया से काफी करीब से जुड़ी हुई है। ऐसे में सरकार की यह योजना विद्यार्थियों को डिजिटल कंटेंट से आगे बढ़कर वास्तविक ऐतिहासिक अनुभव देने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
यदि यह कार्यक्रम लंबे समय तक प्रभावी तरीके से चलता है तो विद्यार्थियों को उत्तर प्रदेश की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझने का मौका मिल सकता है।
संग्रहालयों को सिर्फ पुरानी वस्तुओं को रखने की जगह के बजाय सीखने और अनुभव करने वाले शैक्षिक केंद्र के रूप में विकसित करने में भी ऐसी योजनाएं मदद कर सकती हैं।

