बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में दो वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। POCSO एक्ट के अपर सत्र न्यायालय के न्यायाधीश श्रीकृष्ण चंद्र सिंह ने दोषी अशोक कुमार गोस्वामी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान, पुलिस की विवेचना से जुड़े दस्तावेज और फोरेंसिक जांच समेत उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार किया। अभियोजन की ओर से चार गवाह अदालत के सामने पेश किए गए थे।
छह नवंबर 2023 को दर्ज हुआ था मुकदमा
सरकारी अधिवक्ता लव त्रिपाठी के मुताबिक, बच्ची की मां ने 6 नवंबर 2023 को कोतवाली नगर में शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत के अनुसार, घटना वाले दिन दोपहर करीब एक बजे बच्ची घर के पीछे स्थित गांव के ही एक दुकानदार की दुकान पर टॉफी और बिस्कुट लेने गई थी। कुछ देर बाद बच्ची रोते हुए वापस घर पहुंची।
परिवार के मुताबिक, बच्ची दुकान की ओर इशारा कर रही थी। इसके बाद परिजनों को घटना का पता चला और पुलिस को इसकी सूचना दी गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की और संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया।
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर भेजा जेल
शिकायत के आधार पर पुलिस ने POCSO Act और SC/ST अधिनियम की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया। पुलिस ने आरोपी अशोक कुमार गोस्वामी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
इसके बाद पुलिस ने मामले की विस्तृत विवेचना शुरू की। जांच के दौरान घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य जुटाए गए और उपलब्ध सामग्री को कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच के लिए भेजा गया।
विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। इसके बाद न्यायालय में मामले की सुनवाई शुरू हुई।

फोरेंसिक जांच भी बनी अहम कड़ी
मामले की जांच के दौरान बच्ची से जुड़े कपड़ों को फोरेंसिक परीक्षण के लिए भेजा गया था। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, फोरेंसिक जांच में मिले साक्ष्य का आरोपी के नमूने से मिलान हुआ।
अभियोजन ने इस जांच रिपोर्ट को मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर अदालत के सामने रखा। इसके साथ ही गवाहों के बयान और केस से जुड़े अन्य दस्तावेज भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए।
फोरेंसिक रिपोर्ट के साथ अन्य साक्ष्यों का मूल्यांकन करते हुए अदालत ने मामले में उपलब्ध पूरे रिकॉर्ड पर विचार किया।
चार गवाहों के बयान भी अदालत में हुए दर्ज
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने चार गवाह अदालत के सामने पेश किए। गवाहों के बयान के अलावा पुलिस की ओर से दाखिल दस्तावेज और जांच से संबंधित साक्ष्य भी न्यायालय के सामने रखे गए।
अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद सभी उपलब्ध साक्ष्यों का मूल्यांकन किया। इसके बाद न्यायालय ने अशोक कुमार गोस्वामी को मामले में दोषी करार दिया।
कोर्ट ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा
POCSO कोर्ट ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
यह फैसला बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की गंभीरता को भी दर्शाता है। POCSO कानून का उद्देश्य बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करना और ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष कानूनी व्यवस्था उपलब्ध कराना है।
जांच से लेकर अदालत तक ऐसे आगे बढ़ा मामला
इस मामले में शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने FIR दर्ज की। इसके बाद आरोपी की गिरफ्तारी, साक्ष्य संकलन और फोरेंसिक जांच की प्रक्रिया पूरी की गई। विवेचना पूरी होने पर पुलिस ने अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया।
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपने गवाह और साक्ष्य पेश किए। बचाव पक्ष की दलीलों को भी न्यायालय ने सुना। अंततः अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी माना और सजा सुनाई।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर फिर उठा सवाल
इस घटना ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता सामने रखी है। विशेषज्ञों और कानून व्यवस्था से जुड़े संस्थानों की ओर से लगातार यह कहा जाता है कि बच्चों के आसपास के वातावरण में सुरक्षा और सतर्कता बेहद जरूरी है।
ऐसे मामलों में परिवार, स्कूल, स्थानीय समुदाय और प्रशासन सभी की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। किसी भी संदिग्ध घटना की जानकारी मिलने पर समय रहते पुलिस और संबंधित बाल संरक्षण तंत्र को सूचना देना जरूरी है।
POCSO कानून क्यों है महत्वपूर्ण?
Protection of Children from Sexual Offences Act यानी POCSO Act बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से निपटने के लिए बनाया गया विशेष कानून है। इसके तहत बच्चों से जुड़े यौन अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का प्रावधान है।
इस कानून में बच्चों की पहचान और उनकी गरिमा की रक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रावधान भी हैं। इसलिए ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग करते समय पीड़ित बच्चे की पहचान उजागर करने वाली जानकारी से बचना आवश्यक है।

