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    Home»गुजरात»2022 के दहेज प्लांट हादसे पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 3.27 करोड़ की रकम का रास्ता साफ; मृतकों के परिजनों की पहचान के लिए हाईकोर्ट को निर्देश
    गुजरात

    2022 के दहेज प्लांट हादसे पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 3.27 करोड़ की रकम का रास्ता साफ; मृतकों के परिजनों की पहचान के लिए हाईकोर्ट को निर्देश

    Chandra JyotiBy Chandra JyotiSeptember 16, 2026No Comments4 Mins Read
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    नई दिल्ली। गुजरात के दहेज स्थित भारत रसायन लिमिटेड के कीटनाशक प्लांट में वर्ष 2022 में हुए हादसे से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को महत्वपूर्ण निर्देश दिया। अदालत ने गुजरात हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से कहा कि हादसे में जान गंवाने वाले लोगों और उनके परिवार के सदस्यों की पहचान के लिए स्वतः संज्ञान (suo motu) मामला दर्ज किया जाए।

    इस कदम का मकसद सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा उस राशि को उचित लाभार्थियों तक पहुंचाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाना है, जिसे हादसे में जान गंवाने वालों के लिए मुआवजे के तौर पर इस्तेमाल किया जाना है। रिपोर्टों के अनुसार, करीब ₹3.27 करोड़ सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा हैं।

    17 मई 2022 को हुआ था हादसा

    दहेज स्थित भारत रसायन लिमिटेड के कीटनाशक संयंत्र में 17 मई 2022 को हादसा हुआ था। इस दुर्घटना में आठ लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य लोग घायल हुए थे।

    हादसे के बाद प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था और दुर्घटना के कारणों को लेकर सवाल उठे थे। पीड़ितों की ओर से रिएक्टर में खराबी के कारण विस्फोट और आग लगने की बात कही गई थी। घटना के बाद पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर भी कार्रवाई हुई।

    सुप्रीम कोर्ट के सामने अब एक अलग लेकिन महत्वपूर्ण सवाल यह है कि मुआवजे के लिए उपलब्ध राशि को वास्तविक पीड़ित परिवारों तक कैसे पहुंचाया जाए।

    मृतकों की पहचान अब तक पूरी नहीं हो सकी

    सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि संबंधित अधिकारी अब तक हादसे में जान गंवाने वाले लोगों और उनके परिवार के सदस्यों की पहचान की प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके हैं।

    यही स्थिति मुआवजे के वितरण में सबसे बड़ी अड़चन बन रही है। जब तक यह स्पष्ट न हो कि हादसे में मृत प्रत्येक व्यक्ति का वैध उत्तराधिकारी या परिवार का संबंधित सदस्य कौन है, तब तक जमा राशि का वितरण कानूनी रूप से आगे बढ़ाना मुश्किल है।

    इसी बिंदु पर सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को स्वतः संज्ञान मामला दर्ज कराने का निर्देश दिया है। इससे मृतकों के परिवारों की पहचान और उनके दावों की न्यायिक जांच का रास्ता खुल सकता है।

    करीब ₹3.27 करोड़ सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा

    सुनवाई में अदालत को बताया गया कि पर्यावरणीय मुआवजे की राशि के अतिरिक्त करीब ₹3.27 करोड़ सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा है।

    इस राशि को हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के लिए मुआवजा देने के उद्देश्य से इस्तेमाल किया जाना है। सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि इस रकम को एक और वर्ष के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में रखा जाए।

    इसका मतलब है कि तत्काल वितरण के बजाय पहले लाभार्थियों की पहचान और संबंधित न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    NGT ने लगाया था करीब ₹13.5 करोड़ का पर्यावरणीय मुआवजा

    इस मामले का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) से जुड़ा है। NGT ने 29 मई 2024 को ‘पोल्यूटर पे’ सिद्धांत के तहत भारत रसायन लिमिटेड पर करीब ₹13.5 करोड़ का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया था।

    रिपोर्टों के मुताबिक, इस राशि का इस्तेमाल प्लांट के आसपास पर्यावरण सुधार से जुड़े कार्यों के लिए किया जाना था। इसमें गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के माध्यम से प्लांट के करीब 10 किलोमीटर के दायरे में पौधरोपण और पर्यावरणीय बहाली जैसे उपाय शामिल थे।

    इसलिए ₹13.5 करोड़ की पर्यावरणीय मुआवजा राशि और सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करीब ₹3.27 करोड़ की राशि को एक ही मद नहीं माना जाना चाहिए। दोनों की प्रकृति और इस्तेमाल का उद्देश्य अलग है।

    सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने क्या कहा?

    मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में 16 सितंबर 2026 की कार्यवाही के लिए यही पीठ दर्ज है।

    अदालत के निर्देश का मुख्य केंद्र यह रहा कि वर्षों पुराने औद्योगिक हादसे के पीड़ितों के लिए उपलब्ध मुआवजा केवल पहचान संबंधी प्रक्रिया पूरी न होने के कारण लंबित न रहे।

    गुजरात हाईकोर्ट में स्वतः संज्ञान मामले के जरिए अब मृतकों और उनके परिजनों की पहचान से जुड़ी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है।

    अब आगे क्या होगा?

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद गुजरात हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के स्तर पर मामले को स्वतः संज्ञान के रूप में दर्ज किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके बाद मृतकों की पहचान, उनके परिवारों या वैध उत्तराधिकारियों की जानकारी और मुआवजे के दावों से जुड़े पहलुओं की जांच की जा सकती है।

    इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा राशि FD में बनी रहेगी। लाभार्थियों की पहचान और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही उसके वितरण को लेकर आगे कार्रवाई होगी।

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