बैंकॉक: भगवान गणेश को भारत में आमतौर पर मोदक, लड्डू, फल और दूसरी मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। लेकिन अगर आपको पता चले कि थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में कुछ श्रद्धालु गणेश जी को बबल टी यानी बोबा मिल्क टी चढ़ाते हैं, तो शायद आपको भी हैरानी होगी। इन दिनों सोशल मीडिया पर बैंकॉक के एक गणेश मंदिर का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें भगवान गणेश की प्रतिमा के सामने बबल टी के कई कप रखे दिखाई दे रहे हैं।
यह मंदिर बैंकॉक के यूनियन मॉल के बाहर स्थित गणेश shrine के रूप में रिपोर्ट किया गया है। बैंकॉक की कंटेंट क्रिएटर पिया पिंग ने इस जगह का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसके बाद यह अनोखी पूजा पद्धति चर्चा में आ गई। वीडियो में श्रद्धालुओं को भगवान गणेश के सामने बबल टी के कप अर्पित करते देखा जा सकता है।
लड्डू की जगह क्यों चढ़ती है बबल टी?
वीडियो में पिया पिंग ने बताया कि भारत में गणेश जी को लड्डू और मोदक जैसे पारंपरिक भोग लगाए जाते हैं, लेकिन बैंकॉक में कुछ श्रद्धालु बबल टी को ही अपनी भेंट का हिस्सा बनाते हैं।
बबल टी एक लोकप्रिय पेय है, जिसमें चाय, दूध या फ्लेवर और चबाने वाले टैपिओका पर्ल्स यानी बोबा शामिल होते हैं। यह पेय थाईलैंड और दक्षिण-पूर्व एशिया में काफी लोकप्रिय है। इसी वजह से स्थानीय पसंद और धार्मिक आस्था का एक अनोखा मेल इस भोग में दिखाई देता है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि बबल टी चढ़ाने की परंपरा को सभी गणेश मंदिरों या हिंदू धर्म का सामान्य नियम नहीं माना जा सकता। यह बैंकॉक में बताई जा रही एक स्थानीय/भक्तों की परंपरा या मान्यता है।
मन्नत पूरी हुई तो बढ़ते जाते हैं कप
इस अनोखी परंपरा के पीछे सबसे ज्यादा चर्चा जिस बात की हो रही है, वह है मन्नत और कपों की संख्या।
पिया पिंग के मुताबिक कुछ श्रद्धालु जब गणेश जी से मनोकामना मांगते हैं, तो शुरुआत में करीब दो या तीन कप बबल टी अर्पित करते हैं। अगर उनकी इच्छा पूरी होने की मान्यता होती है, तो वे दोबारा मंदिर पहुंचकर पहले से अधिक बबल टी चढ़ाकर भगवान के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।
इस तरह तीन कप से छह, फिर छह से 12 और आगे संख्या बढ़ती जाती है। कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि ऐसे चढ़ावे 50 से लेकर 200 कप तक भी पहुंच सकते हैं। यह संख्या किसी आधिकारिक धार्मिक नियम की बजाय भक्तों द्वारा बताई गई मान्यता से जुड़ी है।
मंदिर के पास ही मिलता है पसंद का बबल टी ब्रांड
वायरल वीडियो में एक और दिलचस्प चीज दिखाई गई। मंदिर के पास मौजूद एक गाइड बोर्ड पर यूनियन मॉल में उपलब्ध अलग-अलग बबल टी ब्रांड और उनकी जगहों की जानकारी दिखाई देती है।
इसका मतलब यह है कि श्रद्धालु मंदिर के पास मौजूद मॉल में जाकर अपनी पसंद की बबल टी खरीद सकते हैं और उसे भगवान गणेश को अर्पित कर सकते हैं। यही वजह है कि इस मंदिर की पूजा पद्धति सोशल मीडिया यूजर्स के लिए और भी दिलचस्प बन गई है।
थाईलैंड में गणेश जी को किस नाम से जानते हैं?
थाईलैंड में भगवान गणेश को ‘फ्रा फिकानेत’ (Phra Phikanet) या फ्रा फिकानेसुआन जैसे नामों से जाना जाता है। वहां उन्हें बुद्धि, कला, सफलता और बाधाओं को दूर करने से जुड़े देवता के रूप में सम्मान दिया जाता है।
थाई संस्कृति में गणेश की लोकप्रियता केवल भारतीय समुदाय तक सीमित नहीं है। कई स्थानीय श्रद्धालु भी गणेश जी के प्रति श्रद्धा रखते हैं। खास तौर पर कला, रचनात्मकता और सफलता से जुड़े लोगों के बीच गणेश की पूजा की लोकप्रियता का उल्लेख मिलता है।
भारत से अलग लेकिन भावना वही
भारत में गणेश पूजा के दौरान मोदक और लड्डू का विशेष महत्व माना जाता है। वहीं बैंकॉक में बबल टी जैसी स्थानीय रूप से लोकप्रिय चीज का इस्तेमाल भोग के तौर पर किया जाना यह दिखाता है कि धार्मिक परंपराएं अलग-अलग संस्कृतियों में स्थानीय रूप भी ले सकती हैं।
यहां मुख्य बात किसी खास खाने या पेय की नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की उस भावना की है जिसके साथ वे अपनी पसंदीदा चीज भगवान को अर्पित करते हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस परंपरा को देखकर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं दीं।
सोशल मीडिया पर क्यों वायरल हुआ वीडियो?
बबल टी के कपों से सजे गणेश मंदिर की तस्वीरें और वीडियो भारतीय दर्शकों के लिए इसलिए भी खास हैं क्योंकि भारत में भगवान गणेश के साथ सबसे ज्यादा जुड़ी छवियों में मोदक और लड्डू शामिल हैं।
ऐसे में गणेश जी की प्रतिमा के सामने स्ट्रॉ वाले बड़े-बड़े बबल टी कप दिखाई देना इंटरनेट यूजर्स के लिए बिल्कुल अलग दृश्य था। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने थाईलैंड में गणेश पूजा के इस स्थानीय रूप को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं साझा कीं।
बबल टी से जुड़ी आस्था कितनी पुरानी है?
कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि थाई श्रद्धालुओं द्वारा गणेश मंदिरों में बबल टी अर्पित करने की चर्चा 2019 के आसपास से दिखाई देती रही है। यानी यह केवल इस साल की वायरल सोशल मीडिया घटना नहीं है, बल्कि बैंकॉक में कुछ श्रद्धालुओं से जुड़ी एक पुरानी स्थानीय परंपरा के रूप में भी इसका उल्लेख मिलता है।
हालांकि इस परंपरा का स्वरूप और इसका पालन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या व्यापक स्तर पर आधिकारिक रूप से दर्ज नहीं है। इसलिए इसे पूरे थाईलैंड या सभी गणेश मंदिरों की समान परंपरा मानना उचित नहीं होगा।
आस्था का अनोखा थाई अंदाज
बैंकॉक के इस गणेश मंदिर की कहानी धार्मिक परंपरा और स्थानीय संस्कृति के मेल का उदाहरण बनकर सामने आई है। जहां भारत में भक्त मोदक, लड्डू और मिठाइयों से गणेश जी को भोग लगाते हैं, वहीं बैंकॉक में कुछ श्रद्धालु अपनी पसंदीदा बबल टी को भगवान के प्रति आभार व्यक्त करने के माध्यम के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
मनोकामना पूरी होने पर ज्यादा कप अर्पित करने की मान्यता भी इसी भावना से जुड़ी बताई जाती है—यानी इच्छा पूरी होने के बाद भगवान को धन्यवाद देना।

