भारत में बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों को लेकर NCRB के 2024 के आंकड़ों ने एक गंभीर तस्वीर सामने रखी है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, 18 साल से कम उम्र की लड़कियों से जुड़े रेप के मामलों में पिछले एक दशक के दौरान बड़ा इजाफा हुआ है। साल 2015 में पुलिस रिकॉर्ड में ऐसे मामलों में 10,934 पीड़ित बच्चियां दर्ज की गई थीं, जबकि 2024 में यह संख्या बढ़कर 43,675 तक पहुंच गई। यानी दस साल के अंतराल में आंकड़ा करीब चार गुना हो गया।
यह आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं जब देश के अलग-अलग हिस्सों से बच्चों और महिलाओं के खिलाफ यौन अपराध के मामले लगातार सुर्खियों में हैं। NCRB का डेटा इन घटनाओं को केवल अलग-अलग मामलों के रूप में नहीं, बल्कि पूरे देश में दर्ज अपराधों के व्यापक पैटर्न के रूप में देखने का आधार देता है।
2015 से 2024 तक कितना बदला आंकड़ा?
NCRB के मुताबिक 2015 में 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों के रेप से जुड़े मामलों में 10,934 पीड़ित दर्ज हुई थीं। 2024 में यह संख्या बढ़कर 43,675 हो गई। रिपोर्ट में इसे एक दशक में करीब चार गुना वृद्धि के तौर पर बताया गया है।
यहां यह समझना भी जरूरी है कि NCRB के आंकड़े पुलिस में दर्ज मामलों पर आधारित होते हैं। इसलिए ये आंकड़े देश में होने वाली हर घटना का पूर्ण अनुमान नहीं हैं। फिर भी दर्ज मामलों का इतना बड़ा आंकड़ा बच्चों की सुरक्षा और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े सवालों को सामने लाता है।
2020 से 2024 के बीच 1.83 लाख मामले
रिपोर्ट के अनुसार, 2020 से 2024 के बीच पांच वर्षों में नाबालिग लड़कियों से रेप के 1.83 लाख मामले दर्ज किए गए। इसी अवधि में POCSO के तहत यौन अपराधों की अन्य श्रेणियों में भी बड़ी संख्या में मामले दर्ज हुए।
उपलब्ध NCRB डेटा के अनुसार 2024 में POCSO की धारा 4 और 6 के तहत 44,567 पीड़ित दर्ज किए गए, जिनमें 43,675 लड़कियां और 892 लड़के थे। इन धाराओं में penetrative sexual assault और aggravated penetrative sexual assault शामिल हैं।
सबसे ज्यादा मामले किस उम्र में?
आंकड़ों को उम्र के आधार पर देखें तो 16 से 18 वर्ष की किशोरियां सबसे ज्यादा प्रभावित वर्ग में रहीं। 2020 से 2024 के बीच इस आयु वर्ग की लड़कियों से रेप के 94,503 मामले दर्ज हुए। वहीं 12 से 16 वर्ष की लड़कियों से जुड़े मामलों की संख्या 70,442 रही।
इससे यह भी सामने आता है कि किशोर उम्र की बच्चियां इस तरह के अपराधों के मामलों में बड़ी संख्या में दर्ज पीड़ितों में शामिल हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात—आरोपी अक्सर परिचित
NCRB के आंकड़ों का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इन मामलों में आरोपी अक्सर पीड़िता के लिए कोई अजनबी नहीं था। रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में 97 प्रतिशत मामलों में आरोपी पीड़िता का जान-पहचान वाला व्यक्ति था। इनमें शादी का झांसा देने वाले व्यक्ति, दोस्त, रिश्तेदार, पड़ोसी और परिवार से जुड़े लोग शामिल थे।
एक व्यापक NCRB-आधारित विश्लेषण में भी POCSO की धारा 4 और 6 के मामलों में 96.6 प्रतिशत मामलों में आरोपी के पीड़ित बच्चे को जानने की बात सामने आई है।
इसका मतलब यह है कि बच्चों की सुरक्षा का सवाल केवल अनजान लोगों से खतरे तक सीमित नहीं है। परिवार, स्कूल, पड़ोस और सामाजिक वातावरण में बच्चों की सुरक्षा तथा सुरक्षित शिकायत व्यवस्था भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
न्याय की रफ्तार भी बड़ा सवाल
अपराधों के आंकड़ों के साथ न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा आंकड़ा भी ध्यान खींचता है। NCRB के अनुसार 2024 में बच्चियों से रेप के मामलों में दोषसिद्धि दर करीब 30 प्रतिशत रही, जबकि 86 प्रतिशत मामले अदालतों में लंबित थे।
POCSO मामलों के लिए विशेष अदालतों और फास्ट-ट्रैक व्यवस्था का उद्देश्य मामलों की सुनवाई में तेजी लाना है, लेकिन बड़ी संख्या में मामले लंबित रहना जांच, सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया की क्षमता से जुड़े सवालों को सामने लाता है।
POCSO कानून की भूमिका
बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने के लिए Protection of Children from Sexual Offences (POCSO) Act लागू है। इसके तहत बच्चों के खिलाफ अलग-अलग प्रकार के यौन अपराधों के लिए कानूनी प्रावधान हैं। NCRB हर साल इन अपराधों से जुड़े दर्ज मामलों का आंकड़ा प्रकाशित करता है, जिससे अपराध की प्रकृति और रुझानों को समझने में मदद मिलती है।

