देश: में करोड़ों लोग रोजाना UPI के जरिए भुगतान करते हैं। ऐसे में जब UPI पर शुल्क लगाए जाने की खबर सामने आई, तो सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि क्या अब हर बार UPI से पैसे भेजने पर जेब ढीली होगी? इसी बीच भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को इस पूरे मामले पर महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट की है।
RBI गवर्नर ने कहा कि फिलहाल UPI लेनदेन की संख्या में किसी तरह की गिरावट दिखाई नहीं दे रही है और उन्हें व्यक्तिगत रूप से नहीं लगता कि छोटा-सा शुल्क UPI के कुल ट्रांजैक्शन वॉल्यूम पर बड़ा असर डालेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब चुनिंदा UPI लेनदेन पर MDR लागू करने की तारीख नजदीक आ गई है।
15 अक्टूबर से क्या बदलने वाला है?
नए नियम के तहत 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के कुछ Person-to-Merchant यानी P2M UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि यह सामान्य तौर पर ग्राहक से वसूला जाने वाला UPI शुल्क नहीं है। शुल्क की जिम्मेदारी पात्र मर्चेंट ट्रांजैक्शन से जुड़े पक्षों पर होगी। ₹75,000 या उससे अधिक के पात्र लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई है।
यानी अगर कोई ग्राहक किसी दुकान या व्यापारी को ₹5,000 का पात्र UPI भुगतान करता है, तो 0.4 प्रतिशत के हिसाब से MDR ₹20 बनता है। लेकिन यह रकम ग्राहक के बिल में अलग से जोड़ने की अनुमति नहीं है।
आम UPI यूजर को घबराने की जरूरत क्यों नहीं?
इस बदलाव को लेकर सबसे बड़ी चिंता आम ग्राहकों के बीच थी कि कहीं UPI इस्तेमाल करने पर हर भुगतान के साथ अतिरिक्त पैसा न देना पड़े। उपलब्ध जानकारी के अनुसार ग्राहकों के लिए UPI भुगतान की सुविधा जारी रहेगी और MDR को सीधे ग्राहक पर डालने की अनुमति नहीं है।
इसके अलावा Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI ट्रांसफर पर यह MDR लागू नहीं होगा। इसका मतलब है कि किसी दोस्त या परिवार के सदस्य को पैसे भेजने पर इस नए मर्चेंट शुल्क का सवाल नहीं उठता।
₹2,000 से कम के भुगतान पर क्या होगा?
यह भी इस नए बदलाव का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ₹2,000 तक के पात्र P2M भुगतान पर नया 0.4 प्रतिशत MDR लागू नहीं होगा। इसका मतलब छोटे रोजमर्रा के भुगतान करने वाले ग्राहकों पर इस बदलाव का सीधा प्रभाव सीमित रहेगा।
यह सीमा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि UPI का बड़ा हिस्सा छोटे मूल्य के डिजिटल भुगतानों से बना है। सरकार की ओर से उपलब्ध जानकारी के अनुसार कुल P2M UPI लेनदेन का 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा ₹2,000 तक की श्रेणी में आता है।
₹50 हजार के भुगतान पर कितना MDR?
मान लीजिए कोई ग्राहक किसी व्यापारी को ₹50,000 का पात्र UPI भुगतान करता है। 0.4 प्रतिशत के हिसाब से MDR ₹200 होगा। लेकिन यह राशि ग्राहक से अलग से लेने की व्यवस्था नहीं है।
इसी तरह ₹1 लाख के पात्र लेनदेन पर सामान्य 0.4 प्रतिशत के हिसाब से ₹400 बनते हैं, लेकिन यहां ₹300 की अधिकतम सीमा लागू होगी। यानी बड़े पात्र लेनदेन में भी MDR ₹300 से अधिक नहीं होगा।

कुछ सेक्टरों के लिए अलग व्यवस्था
सभी कारोबारों पर एक जैसा MDR लागू नहीं होगा। कुछ आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग शुल्क संरचना रखी गई है। इनमें रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे क्षेत्र शामिल हैं, जहां ₹2,000 से अधिक के पात्र भुगतान पर ₹5 का फ्लैट MDR बताया गया है।
वहीं म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉकब्रोकर और डीलर से जुड़े कुछ लेनदेन के लिए MDR 0.02 प्रतिशत रखा गया है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 है।
RBI गवर्नर को क्यों नहीं दिख रहा बड़ा असर?
संजय मल्होत्रा के मुताबिक अभी तक UPI ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में किसी गिरावट के संकेत नहीं दिखे हैं। उनका मानना है कि छोटा शुल्क डिजिटल भुगतान के इस्तेमाल को बड़े स्तर पर प्रभावित नहीं करेगा।
सितंबर में UPI लेनदेन की संख्या अगस्त की तुलना में कुछ कम हुई थी, लेकिन दैनिक औसत लेनदेन में बढ़ोतरी दर्ज हुई थी। ऐसे में केवल मासिक कुल संख्या देखकर UPI के इस्तेमाल में बड़ी गिरावट का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
UPI के साथ RBI ने रेपो रेट पर भी लिया बड़ा फैसला
बुधवार को RBI की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद एक और बड़ा फैसला सामने आया। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया। यह करीब चार साल में पहली बढ़ोतरी है। साथ ही नीति रुख को ‘Neutral’ से बदलकर ‘Calibrated Tightening’ किया गया है।
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान भी बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत किया है, जबकि महंगाई के जोखिम को देखते हुए आगे की नीति को लेकर सतर्क रुख अपनाया गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल- UPI कितना बदलेगा?
15 अक्टूबर के बाद असली तस्वीर तब सामने आएगी जब नए MDR नियम के तहत लेनदेन शुरू होंगे। RBI का फिलहाल आकलन है कि छोटे शुल्क से UPI के विशाल नेटवर्क और इस्तेमाल पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
हालांकि, व्यापारियों के लिए यह जरूर एक नया लागत तत्व होगा। बड़े डिजिटल भुगतान करने वाले कारोबारियों को MDR का हिसाब अपनी लागत और भुगतान व्यवस्था में शामिल करना पड़ेगा। दूसरी तरफ ग्राहकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण राहत यही है कि UPI इस्तेमाल करने पर हर भुगतान के साथ कोई नया सामान्य शुल्क नहीं जोड़ा गया है।

