नई दिल्ली/गांधीनगर: गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की शानदार जीत के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने गुजरात में कांग्रेस के लंबे समय से चले आ रहे चुनावी प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को अपनी हार के कारणों पर आत्ममंथन करना चाहिए। शाह ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष की आलोचना का जवाब देते हुए हालिया चुनावी नतीजों का हवाला दिया और दावा किया कि जनता का भरोसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के साथ बना हुआ है।
13 अक्टूबर 2026 को सामने आए चुनाव परिणामों के बाद शाह के बयान ने भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है। उन्होंने गुजरात के साथ-साथ दूसरे राज्यों के चुनावी नतीजों का भी उल्लेख किया और राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या कांग्रेस की हर हार के लिए SIR को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
गुजरात निकाय चुनाव में भाजपा का दबदबा कायम
गुजरात के तीन शहरी निकायों में हुए चुनावों में भाजपा ने अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी। सबसे अधिक चर्चा गांधीनगर नगर निगम के नतीजों की रही, जहां भाजपा ने 44 में से 38 सीटों पर जीत दर्ज की। कांग्रेस को पांच सीटें मिलीं, जबकि एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत हासिल की।
थारा नगरपालिका में भाजपा ने 24 में से 19 सीटें जीतीं और कांग्रेस को पांच सीटें मिलीं। वहीं, ओखा नगरपालिका में भाजपा ने मतदान वाली 32 सीटों में से 29 पर कब्जा जमाया, जबकि कांग्रेस को तीन सीटें मिलीं। इन नतीजों के साथ भाजपा ने तीनों शहरी निकायों में अपना नियंत्रण बरकरार रखा।
हालांकि, गांधीनगर में भाजपा की सीटों की संख्या पिछले चुनाव के मुकाबले तीन कम रही। इसके बावजूद पार्टी ने स्पष्ट बहुमत बनाए रखा। आम आदमी पार्टी इस बार गांधीनगर में अपना खाता नहीं खोल सकी।
अमित शाह ने कांग्रेस की हार पर क्या कहा?
चुनावी नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए अमित शाह ने राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस गुजरात में आखिरी बार 1985 में चुनावी जीत हासिल करने में सफल रही थी। शाह ने इस लंबे अंतराल का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि क्या कांग्रेस अपनी हार के लिए SIR को जिम्मेदार ठहराएगी।
शाह के मुताबिक, राहुल गांधी को लगातार मिल रही चुनावी असफलताओं के कारणों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी रणनीतिक कमियों का विश्लेषण करने के बजाय चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है।
गृह मंत्री ने गांधीनगर में भाजपा के वोट प्रतिशत में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि होने का भी दावा किया। उनके अनुसार, यह नतीजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के प्रति जनता के समर्थन को दर्शाता है। हालांकि, वोट प्रतिशत में वृद्धि से संबंधित यह आंकड़ा शाह के बयान के संदर्भ में है।
SIR विवाद पर राहुल गांधी को घेरा
अमित शाह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब राहुल गांधी और विपक्षी दल विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में अनियमितताओं की आशंका है और इससे मताधिकार प्रभावित हो सकता है।
विपक्षी दलों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी विरोध जताया है और SIR प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखी हैं।
शाह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि SIR की शुरुआत 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद हुई थी, जबकि कांग्रेस को कई राज्यों में उससे पहले भी चुनावी हार का सामना करना पड़ा है। उन्होंने राहुल गांधी से पूछा कि गुजरात और दूसरे राज्यों में कांग्रेस के पुराने चुनावी प्रदर्शन को किस आधार पर SIR से जोड़ा जा सकता है।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि SIR को लेकर विपक्ष की आपत्तियां और शाह के जवाब दोनों राजनीतिक पक्षों के दावे हैं। चुनावी प्रक्रिया से संबंधित आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित आधिकारिक आंकड़ों और जांच के निष्कर्षों को देखना जरूरी है।
AAP पर भी अमित शाह का हमला
गुजरात के चुनावी परिणामों का जिक्र करते हुए शाह ने आम आदमी पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि पार्टी ने 32 सीटों पर चुनाव लड़ा और सभी 32 सीटों पर उसके उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई।
गांधीनगर नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी को कोई सीट नहीं मिली। भाजपा ने इस प्रदर्शन को अपनी राजनीतिक मजबूती के प्रमाण के तौर पर पेश किया है।
हालांकि, चुनावी नतीजों का विश्लेषण करते समय सीटों के साथ-साथ पिछले चुनाव के मुकाबले वोटों में बदलाव और अलग-अलग वार्डों में उम्मीदवारों के प्रदर्शन को भी देखना महत्वपूर्ण है। केवल सीटों की संख्या से पूरे राज्य के मतदाताओं की राजनीतिक पसंद का संपूर्ण आकलन नहीं किया जा सकता।
विपक्षी एकजुटता पर भी उठाए सवाल
अमित शाह ने दिल्ली में विपक्षी दलों के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी के नेतृत्व पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 14 विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं की भागीदारी और लगभग 8,000 लोगों की मौजूदगी किसी नेता को पूरे देश की आवाज नहीं बना देती।
शाह ने कहा कि देश की जनता की आवाज गांवों, खेतों, दूरदराज के इलाकों और उन क्षेत्रों में भी है, जहां विपक्ष की पहुंच सीमित है। उनके मुताबिक, चुनावी नतीजों से पता चलता है कि भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को जनता का समर्थन मिल रहा है।
विपक्षी दलों का पक्ष इससे अलग है। उनका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता सूची की शुद्धता पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार का हिस्सा है। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच SIR को लेकर विवाद आने वाले दिनों में भी जारी रह सकता है।
2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर भी बड़ा दावा
शाह ने अपने बयान में 2029 के लोकसभा चुनाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा और NDA आगामी आम चुनाव में फिर बड़ी जीत हासिल करेंगे।
यह बयान भाजपा के राजनीतिक आत्मविश्वास को दर्शाता है, लेकिन 2029 के चुनाव के परिणाम को लेकर फिलहाल कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। चुनाव में मतदाताओं की पसंद, राजनीतिक गठबंधन, स्थानीय मुद्दे और उस समय की परिस्थितियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
फिलहाल गुजरात निकाय चुनावों में भाजपा की जीत ने पार्टी को विपक्ष पर हमला करने का नया आधार दिया है। वहीं, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल SIR और चुनावी पारदर्शिता के मुद्दे को आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

