अफगानिस्तान: में रविवार, 25 अक्टूबर 2026 की देर रात धरती में कंपन दर्ज किया गया। भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.5 मापी गई। भूकंप भारतीय समयानुसार रात 11 बजकर 14 मिनट 22 सेकंड पर आया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इसका केंद्र जमीन से काफी नीचे था। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में किसी बड़े जान-माल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।
भूकंप की खबर सामने आने के बाद क्षेत्र में इसकी तीव्रता, केंद्र की गहराई और संभावित प्रभाव को लेकर जानकारी जुटाई जाने लगी। हालांकि, केवल भूकंप की तीव्रता के आधार पर नुकसान का सही अनुमान नहीं लगाया जा सकता। इसका असर इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंप का केंद्र आबादी से कितनी दूर था, उसकी गहराई कितनी थी और आसपास की इमारतें कितनी मजबूत थीं।
129 किलोमीटर गहराई में था भूकंप का केंद्र
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान में 36.157 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 71.240 डिग्री पूर्वी देशांतर पर दर्ज किया गया। इसकी गहराई जमीन से 129 किलोमीटर नीचे बताई गई है।
भूकंप का केंद्र जितनी गहराई में होता है, सतह पर महसूस होने वाले झटकों का स्वरूप उतना ही अलग हो सकता है। आम तौर पर गहरे भूकंप के झटके बड़े क्षेत्र में महसूस हो सकते हैं, लेकिन किसी खास स्थान पर कितना नुकसान होगा, यह कई अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
अभी तक उपलब्ध शुरुआती जानकारी में इस घटना से जुड़ी व्यापक तबाही या बड़े पैमाने पर नुकसान की पुष्टि नहीं की गई थी। हालांकि, नुकसान की स्थिति के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की विस्तृत जानकारी का इंतजार करना जरूरी है।
भूकंप की तीव्रता 5.5 होने का क्या मतलब है?
5.5 तीव्रता का भूकंप एक महत्वपूर्ण भूकंपीय घटना माना जाता है। इसके झटके परिस्थितियों के अनुसार लोगों को महसूस हो सकते हैं और कमजोर इमारतों या पहले से क्षतिग्रस्त ढांचों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। लेकिन हर 5.5 तीव्रता के भूकंप से भारी तबाही हो, यह जरूरी नहीं है।
भूकंप की तीव्रता और किसी स्थान पर महसूस किए गए झटकों के प्रभाव में अंतर होता है। तीव्रता भूकंप से निकलने वाली ऊर्जा का माप बताती है, जबकि वास्तविक प्रभाव का आकलन स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर किया जाता है।
इसी वजह से किसी भी भूकंप के बाद विशेषज्ञ केवल तीव्रता के आंकड़े पर निर्भर नहीं रहते। वे केंद्र की गहराई, भौगोलिक स्थिति, आबादी, इमारतों की बनावट और नुकसान से जुड़ी रिपोर्टों को भी देखते हैं।
अफगानिस्तान में क्यों आते हैं भूकंप?
अफगानिस्तान का बड़ा हिस्सा भूकंपीय गतिविधियों वाले क्षेत्र में स्थित है। यहां भारतीय और यूरेशियाई टेक्टोनिक प्लेटों की परस्पर गतिविधियों के कारण धरती के भीतर तनाव पैदा होता है। जब चट्टानों में जमा तनाव अचानक मुक्त होता है, तो भूकंपीय तरंगें निकलती हैं और धरती की सतह पर कंपन महसूस होता है।
हिंदूकुश पर्वतीय क्षेत्र और इसके आसपास का इलाका भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। इस क्षेत्र में गहराई पर आने वाले भूकंप भी दर्ज किए जाते हैं। हालांकि, हर घटना का केंद्र और उसका प्रभाव अलग होता है।
अफगानिस्तान में भूकंप का जोखिम इसलिए भी चिंता का विषय है क्योंकि कुछ इलाकों में इमारतें भूकंपरोधी मानकों के अनुरूप नहीं हैं। दूरदराज के पहाड़ी क्षेत्रों में राहत और बचाव दलों को पहुंचने में भी मुश्किल हो सकती है। ऐसे में किसी बड़े भूकंप की स्थिति में नुकसान का आकलन और प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

भूकंप आने पर क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
विशेषज्ञों की सलाह है कि भूकंप के झटके महसूस होने पर घबराने के बजाय सुरक्षित कदम उठाने चाहिए। यदि आप किसी इमारत के अंदर हैं, तो मजबूत मेज के नीचे बैठकर सिर और गर्दन को बचाएं। खिड़कियों, कांच और भारी अलमारियों से दूरी बनाए रखें। झटकों के दौरान सीढ़ियों या लिफ्ट की ओर भागने से बचें।
यदि आप खुले स्थान पर हैं, तो इमारतों, बिजली के खंभों, पेड़ों और दूसरी ऐसी वस्तुओं से दूर रहें जो गिर सकती हैं। झटके बंद होने के बाद क्षतिग्रस्त इमारतों में दोबारा प्रवेश न करें, जब तक उनकी सुरक्षा की जांच न हो जाए। आफ्टरशॉक यानी भूकंप के बाद आने वाले झटकों की संभावना को भी ध्यान में रखना चाहिए।
नुकसान को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार
अफगानिस्तान में आए इस भूकंप के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या इससे किसी आबादी वाले इलाके में नुकसान हुआ। शुरुआती रिपोर्टों में जान-माल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई थी। हालांकि, स्थिति के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी के लिए स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के अपडेट पर नजर रखना जरूरी है।
भूकंप के बाद शुरुआती आंकड़ों में बदलाव संभव है। इसलिए नुकसान, घायलों या प्रभावित इलाकों से जुड़ी अपुष्ट जानकारी को तथ्य के रूप में साझा करने से बचना चाहिए।

