झांसी: उत्तर प्रदेश के झांसी में अधिवक्ताओं और पुलिस के बीच चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। कलेक्ट्रेट परिसर में हुई झड़प के बाद पुलिस ने घटना से जुड़े तीन CCTV फुटेज जारी किए हैं। इनमें दो फुटेज में अधिवक्ताओं की भीड़ पुलिसकर्मियों के साथ धक्कामुक्की करती दिखाई दे रही है। वहीं, तीसरे वीडियो में कोतवाली प्रभारी के कमरे में एक अधिवक्ता और पुलिस अधिकारी के बीच बातचीत का दृश्य सामने आया है। चार अधिवक्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जिला अधिवक्ता संघ ने भी आंदोलन की चेतावनी दे दी है।
इस पूरे मामले ने पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर दी है। एक तरफ पुलिस CCTV फुटेज को घटना से जुड़े आरोपों के समर्थन में सामने रख रही है, तो दूसरी तरफ अधिवक्ता पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और मुकदमा वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
पुलिस ने जारी किए तीन CCTV फुटेज
पुलिस की ओर से जारी तीन CCTV फुटेज में से दो कलेक्ट्रेट परिसर के बताए जा रहे हैं। इनमें जेल चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक मोहित कुमार और सिपाही भूपेंद्र के साथ धक्कामुक्की होती दिखाई देती है। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ अधिवक्ताओं ने दोनों पुलिसकर्मियों को घेर लिया और उनके साथ मारपीट की। इसी दौरान सिपाही का मोबाइल फोन भी छीन लिया गया।
तीसरा फुटेज कोतवाली प्रभारी अंजन कुमार सिंह के कार्यालय का है। यह वीडियो बुधवार शाम करीब 7 बजकर 12 मिनट का बताया गया है। इसमें अधिवक्ता रोमेश अग्रवाल कमरे में प्रवेश करते दिखाई देते हैं। कोतवाली प्रभारी उन्हें बाहर जाने और बाद में बात करने के लिए कहते सुनाई देते हैं। इस पर रोमेश बातचीत करने की बात कहते हैं। कमरे में मौजूद विनय भी बताते हैं कि रोमेश उनके मामले में पैरवी करेंगे। इसके बाद बातचीत के दौरान रोमेश और फिर विनय कमरे से बाहर चले जाते हैं।
आखिर किस बात पर शुरू हुआ विवाद?
इस विवाद की शुरुआत कोतवाली प्रभारी अंजन कुमार सिंह और अधिवक्ता रोमेश अग्रवाल के बीच कथित कहासुनी से हुई थी। अधिवक्ताओं का आरोप था कि कोतवाली प्रभारी ने रोमेश अग्रवाल के साथ गाली-गलौज की और उन्हें अपमानित किया। इसी शिकायत को लेकर अधिवक्ताओं में नाराजगी बढ़ गई।
शुक्रवार को जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष प्रमोद शिवहरे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में अधिवक्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे। वे ज्ञापन देकर नवाबाद, सीपरी बाजार और कोतवाली थाना प्रभारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। इसी दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में पुलिसकर्मियों और अधिवक्ताओं के बीच विवाद बढ़ गया।
पुलिसकर्मी प्रदर्शन का वीडियो बना रहे थे। इसी बात को लेकर कहासुनी और धक्कामुक्की शुरू होने का आरोप है। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि जेल चौकी प्रभारी मोहित कुमार और सिपाही भूपेंद्र को भीड़ ने घेर लिया। पुलिस का कहना है कि इस दौरान सिपाही का मोबाइल फोन छीन लिया गया।
चार अधिवक्ताओं के खिलाफ दर्ज हुई FIR
घटना के बाद जेल चौकी प्रभारी मोहित कुमार की तहरीर पर नवाबाद थाने में चार अधिवक्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। उन पर सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट करने और मोबाइल फोन छीनने के आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस ने CCTV फुटेज सामने लाकर अपने आरोपों को मजबूती देने की कोशिश की है। एसपी सिटी प्रीति सिंह के मुताबिक, कलेक्ट्रेट परिसर में लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग में दरोगा और सिपाही के साथ धक्कामुक्की तथा मोबाइल छीनने की घटना दिखाई देती है।
एसपी सिटी ने यह भी कहा कि कोतवाली प्रभारी के कार्यालय के फुटेज की जांच में उनकी ओर से अधिवक्ता के साथ दुर्व्यवहार किए जाने की बात सामने नहीं आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिवक्ताओं के खिलाफ पहले से विवेचनाएं चल रही हैं और पुलिस पर दबाव बनाने के लिए यह घटनाक्रम किया गया। हालांकि, यह पुलिस अधिकारी का पक्ष है और मामले की जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।

प्रशासनिक न्यायमूर्ति तक पहुंचा मामला
विवाद बढ़ने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने प्रशासनिक न्यायमूर्ति समित गोपाल के साथ बैठक में CCTV फुटेज भी साझा किए। अधिवक्ताओं ने जिला न्यायाधीश के माध्यम से प्रशासनिक न्यायमूर्ति को ज्ञापन सौंपकर अपनी शिकायतें रखीं। उन्होंने संबंधित थाना प्रभारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
अधिवक्ताओं का आरोप है कि नवाबाद, सीपरी बाजार और कोतवाली थानों में उनकी शिकायतों पर उचित सुनवाई नहीं होती। उनका कहना है कि पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर पहले भी आपत्तियां उठाई गई थीं, लेकिन समाधान नहीं हुआ।
2 नवंबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी
चार अधिवक्ताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद जिला अधिवक्ता संघ ने बैठक की। इसमें निर्णय लिया गया कि यदि अधिवक्ताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए गए और संबंधित थाना प्रभारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो 2 नवंबर से अधिवक्ता अनिश्चितकालीन न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे।
इस चेतावनी से न्यायिक कामकाज प्रभावित होने की आशंका है। अब प्रशासन और पुलिस के सामने विवाद को बातचीत से सुलझाने की चुनौती है। वहीं, अधिवक्ताओं की मांगों और पुलिस की कार्रवाई के बीच टकराव जारी रहने पर आंदोलन और व्यापक हो सकता है।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल इस मामले में CCTV फुटेज, दर्ज प्राथमिकी और दोनों पक्षों की शिकायतें अहम हैं। पुलिस की जांच में वीडियो रिकॉर्डिंग की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। वहीं, अधिवक्ता संघ की ओर से आंदोलन की चेतावनी के बाद प्रशासनिक स्तर पर बातचीत और समाधान की संभावना पर भी नजर रहेगी।

