जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर के जामडोली इलाके में ज्वेलरी कारोबारी और उनके भाई पर हमला कर लूटपाट करने के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। वारदात के करीब 48 घंटे के भीतर पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान मनीष कश्यप (20) और गुमान सिंह (24) के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, दोनों का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और वे पहले भी हत्या के प्रयास से जुड़े मामलों में फरार चल रहे थे। इस वारदात में शामिल तीन अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
पुलिस ने आरोपियों तक पहुंचने के लिए घटनास्थल और आसपास के इलाकों में लगे 300 से अधिक CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। तकनीकी साक्ष्यों, मुखबिरों से मिली जानकारी और संदिग्धों से पूछताछ के आधार पर पुलिस ने उनकी पहचान की। कार्रवाई के दौरान दोनों आरोपियों के पैर टूटने की जानकारी भी सामने आई है।
दुकान बंद कर घर लौट रहे थे ज्वेलरी कारोबारी
पुलिस के अनुसार, 28 अक्टूबर की रात करीब 8:15 बजे ज्वेलरी कारोबारी सोनू कुमार स्वर्णकार अपने भाई के साथ दुकान बंद करके स्कूटी से घर लौट रहे थे। वे जयपुर के जामडोली इलाके के भरत विहार ए के निवासी बताए गए हैं। दुकान से करीब 100 मीटर दूर दो मोटरसाइकिलों पर सवार पांच बदमाशों ने उन्हें रोक लिया।
आरोप है कि बदमाशों ने दोनों भाइयों पर लोहे के पाइप से हमला किया और पिस्टल से फायरिंग भी की। इसके बाद उनसे चांदी के आभूषण और नकदी लूटकर फरार हो गए। अचानक हुए हमले से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। दोनों भाइयों ने मदद के लिए आवाज लगाई तो आसपास के लोग मौके की ओर दौड़े।
बचाने आई महिला के पैर में लगी गोली
हमले के दौरान एक महिला भी घायल हो गई थी। पुलिस के मुताबिक, दोनों भाइयों की आवाज सुनकर महिला उन्हें बचाने के लिए मौके पर पहुंची थी। इसी दौरान बदमाशों ने फायरिंग की, जिसमें महिला के पैर में गोली लग गई।
घटना के बाद घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। वारदात की गंभीरता को देखते हुए जयपुर पूर्व पुलिस ने विशेष टीमें गठित कीं। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास के रास्तों, संदिग्धों की आवाजाही और आरोपियों के भागने की संभावित दिशा पर जांच शुरू की।
300 से ज्यादा CCTV कैमरों ने खोला राज
आरोपियों की पहचान करना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती थी। बदमाश वारदात के बाद मोटरसाइकिलों से फरार हो गए थे। ऐसे में पुलिस ने घटनास्थल के साथ आसपास के इलाकों में लगे 300 से अधिक CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग की जांच की।
पुलिस ने तकनीकी सहायता और मुखबिरों से मिली सूचनाओं को भी जांच में शामिल किया। पीड़ितों के आने-जाने के रास्ते का चार्ट तैयार किया गया और पुराने आपराधिक मामलों में चालानशुदा संदिग्धों से पूछताछ की गई। जांच के दौरान सामने आया कि आरोपियों ने वारदात से पहले पीड़ितों की गतिविधियों पर नजर रखी थी। पुलिस का मानना है कि रेकी के बाद मौका देखकर हमला किया गया।

मनीष कश्यप और गुमान सिंह गिरफ्तार
पुलिस ने 31 अक्टूबर को मनीष कश्यप और गुमान सिंह को गिरफ्तार किया। मनीष कश्यप सवाई माधोपुर जिले का निवासी बताया गया है, जबकि गुमान सिंह करौली जिले से जुड़ा है। दोनों के वर्तमान ठिकाने जयपुर में बताए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी पहले भी आपराधिक मामलों में शामिल रहे हैं। वे हत्या के प्रयास से जुड़े मामलों में भी फरार चल रहे थे। पुलिस कार्रवाई के दौरान भागते समय दोनों के पैर टूटने की जानकारी सामने आई है। फिलहाल पुलिस उनसे पूछताछ कर वारदात में शामिल बाकी लोगों और लूटे गए सामान के बारे में जानकारी जुटा रही है।
तीन आरोपी अब भी फरार, जेवर और हथियार की तलाश
इस लूटकांड में कुल पांच बदमाशों के शामिल होने की बात सामने आई है। दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद बाकी तीन की तलाश की जा रही है। पुलिस की टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
पुलिस अब लूटे गए चांदी के आभूषण, नकदी, फायरिंग में इस्तेमाल हथियार और वारदात में प्रयुक्त मोटरसाइकिलों की बरामदगी की कोशिश कर रही है। गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश कर पुलिस अभिरक्षा में पूछताछ के लिए रिमांड लेने की प्रक्रिया भी की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ से फरार आरोपियों के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है।
पुलिस के सामने अब क्या चुनौती?
दो आरोपियों की गिरफ्तारी से मामले की जांच में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, लेकिन वारदात की पूरी कड़ी अभी सामने आना बाकी है। पुलिस को यह पता लगाना है कि लूट की योजना किसने बनाई, पीड़ितों की रेकी किसने की और हथियार तथा वाहन कहां से जुटाए गए।
इसके अलावा फरार तीन आरोपियों की गिरफ्तारी और लूटे गए सामान की बरामदगी भी पुलिस के लिए अहम है। जांच पूरी होने के बाद ही वारदात में प्रत्येक आरोपी की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

