जयपुर: राजस्थान की राजनीति में सोशल मीडिया को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने सोमवार को जयपुर में आयोजित पार्टी की प्रदेश स्तरीय सोशल मीडिया कार्यशाला में ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक और डिजिटल जगत दोनों का ध्यान खींचा है। राठौड़ ने कहा कि वह खुद सोशल मीडिया के भुगतभोगी हैं और उनके साथ-साथ कई अन्य लोग भी सोशल मीडिया पर फैलाए जाने वाले गलत नैरेटिव और भ्रामक सूचनाओं का सामना कर चुके हैं।
उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज सोशल मीडिया का इस्तेमाल जितना तेजी से बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से इसका दुरुपयोग भी हो रहा है। कुछ लोग पैसों के लालच में ऐसी घटिया रील्स बनाकर इंटरनेट पर डाल देते हैं, जिनका हमारी संस्कृति और सामाजिक मूल्यों से कोई संबंध नहीं है। ऐसी सामग्री का बच्चों पर भी गलत प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से इस चुनौती को गंभीरता से लेने की अपील की।
‘मैं सोशल मीडिया का भुगतभोगी हूं’, आखिर क्या बोले मदन राठौड़?
जयपुर के एक निजी होटल में आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए मदन राठौड़ ने कहा कि सोशल मीडिया आज के दौर में एक बड़ा माध्यम बन चुका है। इसके जरिए पार्टी और संगठन को कई सफलताएं मिली हैं, लेकिन इसके गलत इस्तेमाल से नई चुनौतियां भी पैदा हुई हैं।
राठौड़ के मुताबिक, सोशल मीडिया पर नकारात्मक नैरेटिव फैलाकर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की जाती है। कई बार वीडियो और सूचनाओं को इस तरह पेश किया जाता है कि उनका वास्तविक संदर्भ ही बदल जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में सतर्क रहना जरूरी है और गलत जानकारी फैलाने वालों को तथ्यों के आधार पर बेनकाब करना चाहिए।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे इस कार्यशाला में सीखें कि आम लोगों तक सही और प्रमाणिक जानकारी किस तरह पहुंचाई जा सकती है। उनके अनुसार, गलत सूचनाओं का जवाब केवल आरोप लगाकर नहीं, बल्कि तथ्यों और सही जानकारी के साथ देना चाहिए।

पैसों के लालच में बनाई जा रही रील्स पर जताई नाराजगी
मदन राठौड़ ने सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली कुछ रील्स और वीडियो की विषयवस्तु पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग केवल पैसे कमाने के उद्देश्य से ऐसी सामग्री तैयार करते हैं, जिसका समाज और संस्कृति में कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
उन्होंने चिंता जताई कि बच्चे भी दिनभर सोशल मीडिया पर वीडियो देखते हैं। ऐसे में यदि उन्हें लगातार गलत और आपत्तिजनक सामग्री दिखाई जाएगी तो उनकी सोच और व्यवहार पर इसका असर पड़ सकता है।
राठौड़ ने कहा कि समाज को इस तरह की मानसिकता के खिलाफ खड़ा होना होगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे सोशल मीडिया के सकारात्मक इस्तेमाल को बढ़ावा दें और भ्रामक तथा नकारात्मक सामग्री के प्रसार को रोकने में अपनी भूमिका निभाएं।
पाकिस्तान वाले बयान के बाद पहले भी हुए थे ट्रोल
मदन राठौड़ का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पिछले महीने पाकिस्तान को लेकर की गई उनकी टिप्पणी पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। एक कार्यक्रम में उन्होंने अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संभावित क्रिकेट मुकाबले का जिक्र करते हुए कहा था कि ऐसी स्थिति में पाकिस्तान हमारा पड़ोसी देश है, इसलिए हम उसका साथ देंगे।
उनके बयान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने उन्हें घेरते हुए सवाल उठाए। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने इस टिप्पणी की आलोचना की और बीजेपी नेतृत्व से जवाब मांगा।
विवाद बढ़ने पर राठौड़ ने सफाई दी थी कि उनकी बात को गलत संदर्भ में पेश किया गया। उनका कहना था कि वह भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच के संदर्भ में बात कर रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और पाकिस्तान के मैच में भारत की हार पर पटाखे जलाने वालों को देशभक्त नहीं कहा जा सकता। उनके मुताबिक, अमेरिका और पाकिस्तान के बीच काल्पनिक मुकाबले की बात अलग संदर्भ में कही गई थी।
पहले भी कई टिप्पणियों को लेकर चर्चा में रहे हैं राठौड़
सोशल मीडिया पर राठौड़ की टिप्पणी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिए गए उनके कुछ बयान पहले भी चर्चा का विषय बन चुके हैं। बीजेपी नेता सुमन शर्मा को ‘एक्सपोर्ट क्वालिटी’ बताने वाली उनकी टिप्पणी पर भी सोशल मीडिया में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आई थीं।
इसके अलावा, अमर जवान ज्योति से जुड़े एक कार्यक्रम में महिला कार्यकर्ताओं को लेकर उनकी नाराजगी और तेज आवाज में निर्देश देने का मामला भी चर्चा में रहा था। इन घटनाओं के वीडियो और टिप्पणियों को लेकर ऑनलाइन बहस हुई थी।
ऐसे में जब राठौड़ ने खुद को सोशल मीडिया का भुगतभोगी बताया, तो उनके पुराने बयानों और वायरल वीडियो का संदर्भ भी फिर से सामने आने लगा।
कार्यकर्ताओं को फेक न्यूज का जवाब देने की नसीहत
कार्यशाला में राठौड़ ने पार्टी के सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं को संगठन की महत्वपूर्ण कड़ी बताया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे गलत नैरेटिव को पहचानना और सही जानकारी लोगों तक पहुंचाना बड़ी जिम्मेदारी है।
उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए कानूनी प्रावधानों और सख्त सजा की जरूरत है। इस मुद्दे को संसद में उठाने की बात भी उन्होंने कही। उनका जोर इस बात पर रहा कि डिजिटल मंचों पर सक्रिय रहने वाले कार्यकर्ता बिना तथ्यों की जांच किए किसी भी सूचना को आगे न बढ़ाएं।
कार्यशाला में पार्टी के सोशल मीडिया विभाग से जुड़े पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। राष्ट्रीय संयोजक दीपक महस्के, सह प्रभारी कुलजीत चहल और प्रदेश संयोजक हीरेन कौशिक सहित संगठन के कई प्रतिनिधियों ने भी इसमें हिस्सा लिया।
कांग्रेस की रैली और आरएलपी को लेकर भी दिया जवाब
कार्यशाला के दौरान राठौड़ ने कांग्रेस की रैली में 10 लाख लोगों के जुटने के दावे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने इस आंकड़े को अवास्तविक बताते हुए कहा कि वास्तविक स्थिति छिपाई नहीं जा सकती। राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने तंज भी कसा।
वहीं पश्चिमी राजस्थान में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की सक्रियता और बीजेपी के सामने चुनौती को लेकर पूछे गए सवाल पर राठौड़ ने कहा कि हर पार्टी अपना काम कर रही है और बीजेपी भी संगठन को मजबूत करने में जुटी हुई है।
इस तरह सोशल मीडिया के दुरुपयोग से शुरू हुई उनकी टिप्पणी में राजनीतिक विरोध, पुराने विवाद और आगामी चुनौतियों का मुद्दा भी शामिल हो गया।

