संगरूर, पंजाब: पंजाब की राजनीति में बुधवार, 4 नवंबर 2026 को उस समय हलचल तेज हो गई, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे संगरूर में आयोजित ‘इंसाफ रैली’ में शामिल हुए। मुख्यमंत्री भगवंत मान के गृह जिले में आयोजित इस रैली को कांग्रेस ने 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए अपने चुनावी अभियान की शुरुआत के रूप में पेश किया। मंच से राहुल गांधी ने राज्य की आम आदमी पार्टी सरकार को निशाने पर लिया और नशे की समस्या, गैंगस्टरवाद, बेरोजगारी तथा कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
रैली का सबसे चर्चित हिस्सा उस समय सामने आया, जब राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए उनके नशे को लेकर आरोप लगाए। उन्होंने सवाल उठाया कि जो मुख्यमंत्री खुद नशे में रहने के आरोपों से घिरा हो, वह पंजाब में नशे की समस्या का मुकाबला कैसे कर सकता है? उनके इस बयान ने पंजाब की सियासत में नई बहस छेड़ दी है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान के गृह जिले में कांग्रेस की हुंकार
कांग्रेस ने इस रैली के लिए संगरूर जिले के फगुवाला गांव को चुना था। यह इलाका राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि मुख्यमंत्री भगवंत मान का गृह जिला संगरूर है।
कांग्रेस की रणनीति इस आयोजन के जरिए आम आदमी पार्टी को उसके मजबूत राजनीतिक क्षेत्र में चुनौती देने की रही। पार्टी ने पंजाब के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों के नेताओं को रैली में भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से कम से कम एक हजार लोगों को लाने का लक्ष्य रखा गया था।
रैली के लिए लगभग 10 एकड़ जमीन पर मुख्य आयोजन स्थल और करीब 30 एकड़ जमीन पर पार्किंग की व्यवस्था की गई थी। कांग्रेस ने एक लाख से अधिक लोगों की मौजूदगी का लक्ष्य निर्धारित किया था।
राहुल गांधी के साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मौजूदगी ने इस आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण बना दिया।
नशे के मुद्दे पर भगवंत मान सरकार को घेरा
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में पंजाब में नशे की समस्या को सबसे प्रमुख मुद्दा बनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में नशे का कारोबार और युवाओं में नशे की लत गंभीर चिंता का विषय बन चुके हैं।
उन्होंने भगवंत मान सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल घोषणाओं से नहीं जीती जा सकती। इसके लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रभावी प्रशासनिक कार्रवाई की जरूरत है।
राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री को लेकर विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि जो व्यक्ति हर शाम नशा करता हो, वह पंजाब की इस चुनौती का मुकाबला कैसे करेगा? यह राहुल गांधी का राजनीतिक आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
उन्होंने राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पंजाब के युवाओं का भविष्य सुरक्षित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।

पंजाब का रिमोट कंट्रोल दिल्ली में होने का आरोप
रैली में राहुल गांधी ने आम आदमी पार्टी की सरकार पर एक और बड़ा राजनीतिक हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार स्वतंत्र रूप से फैसले नहीं ले रही है और उसका रिमोट कंट्रोल दिल्ली में है।
राहुल का कहना था कि पंजाब जैसे महत्वपूर्ण राज्य की सरकार को यहां के लोगों की जरूरतों और समस्याओं के आधार पर काम करना चाहिए।
उन्होंने नशे के अलावा गैंगस्टरवाद, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था के मुद्दे भी उठाए। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि राज्य में आम नागरिकों की सुरक्षा और युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हालांकि, ये विपक्ष की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं। आम आदमी पार्टी सरकार का पक्ष भी इन मुद्दों पर महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री मोदी को खुली बहस की चुनौती
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी निशाने पर लिया। उन्होंने खुली बहस की चुनौती देते हुए पंजाब और देश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्वजनिक चर्चा की मांग की।
राहुल गांधी की इस चुनौती को कांग्रेस की व्यापक राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी पंजाब के मुद्दों को राष्ट्रीय राजनीति से जोड़ने की कोशिश कर रही है।
उनका जोर इस बात पर रहा कि नशे, बेरोजगारी और आम लोगों की समस्याओं पर राजनीतिक बयानबाजी के बजाय जवाबदेही तय होनी चाहिए।
सिद्धू मूसेवाला को किया याद, पिता को मंच पर बुलाया
रैली का एक भावुक क्षण पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की याद से जुड़ा रहा। राहुल गांधी ने सिद्धू मूसेवाला का जिक्र करते हुए उनके साथ हुई पहली मुलाकात को याद किया।
उन्होंने बताया कि जब सिद्धू मूसेवाला उनसे मिलने आए थे, तब उनके शरीर पर टैटू देखकर राहुल की नजर उन पर गई थी। राहुल ने उनके व्यक्तित्व, ऊर्जा और प्रतिभा की भी चर्चा की।
इस दौरान सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह को मंच पर आमंत्रित किया गया। इस घटनाक्रम ने रैली में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
सिद्धू मूसेवाला की हत्या और उसके बाद परिवार को न्याय मिलने की मांग पंजाब में लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। राहुल गांधी द्वारा उन्हें याद करना भीड़ के बीच भावनात्मक जुड़ाव बनाने का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
2027 चुनाव के लिए कांग्रेस का मिशन शुरू
इस इंसाफ रैली का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव से जुड़ा है। कांग्रेस ने संगरूर से अपने मिशन 2027 की शुरुआत की है।
मालवा क्षेत्र पंजाब की राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण है। राज्य की कुल 117 विधानसभा सीटों में से 69 सीटें इसी क्षेत्र में आती हैं। इसलिए यहां से चुनावी अभियान शुरू करना कांग्रेस की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, पंजाब प्रभारी सचिन पायलट और प्रदेश अध्यक्ष परगट सिंह सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता से संगठन को मजबूत करने का संदेश देने की कोशिश की गई।
पार्टी के सामने एक बड़ी चुनौती अपने नेताओं को एकजुट रखना और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना भी है।
क्या संगरूर से बदलेगा पंजाब का चुनावी माहौल?
संगरूर की इंसाफ रैली के जरिए कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में नशे, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और किसानों के मुद्दे उसकी राजनीति के केंद्र में रहेंगे।
राहुल गांधी ने भगवंत मान सरकार को सीधे निशाने पर लेकर चुनावी मुकाबले की दिशा भी स्पष्ट करने की कोशिश की है।
अब बड़ा सवाल यह है कि कांग्रेस इस रैली से मिले राजनीतिक संदेश को पूरे पंजाब में कितना प्रभावी बना पाती है और आम आदमी पार्टी इन आरोपों का जवाब किस तरह देती है।

