बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से पंचायत चुनाव की मतदाता सूची को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक ग्राम पंचायत की वोटर लिस्ट से 26 हिंदू मतदाताओं के नाम कथित रूप से हटा दिए गए। मामला सामने आने के बाद गांव में शिकायतों का दौर शुरू हुआ और प्रशासन तक इसकी जानकारी पहुंचाई गई। शिकायत की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई। जांच में मतदाता सूची से नाम हटाने के मामले में प्रथम दृष्टया अनियमितता पाए जाने के बाद संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को निलंबित कर दिया गया है।
इस कार्रवाई के बाद अब पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। प्रशासन ने जांच अधिकारी को 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर किन परिस्थितियों में इन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए और इसके पीछे किसकी भूमिका थी?
मोहम्मदपुर ग्राम पंचायत में सामने आया मामला
यह पूरा मामला बरेली जिले के शेरगढ़ ब्लॉक की ग्राम पंचायत मोहम्मदपुर का है। यहां पंचायत चुनाव के लिए तैयार की जा रही मतदाता सूची से 26 हिंदू मतदाताओं के नाम गायब होने की शिकायत की गई थी।
ग्राम प्रधान राहुल गंगवार ने इस संबंध में आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि गांव में बीएलओ के रूप में कार्यरत सहायक अध्यापक नफीस मोहम्मद खां ने कथित तौर पर सांप्रदायिक द्वेष के चलते हिंदू समुदाय के 26 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए।
मामले को गंभीर बताते हुए गांव के कुछ अन्य लोगों ने भी शिकायत की। इनमें वेद प्रकाश, हेमाकली, ललिता देवी, राकेश और ढाकन लाल सहित कई ग्रामीणों ने शपथ पत्र देकर मतदाता सूची में नाम काटे जाने पर आपत्ति जताई।
पूर्व प्रधान से मिलीभगत और पैसे लेने का भी आरोप
शिकायतकर्ताओं ने मामले में एक और गंभीर आरोप लगाया। उनका दावा था कि संबंधित बीएलओ ने पूर्व प्रधान रेहान खां से कथित तौर पर धनराशि लेकर हिंदू समुदाय के 26 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए।
हालांकि, इस कथित लेनदेन और मिलीभगत के आरोपों को अंतिम रूप से साबित तथ्य नहीं माना जा सकता। इनकी पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।
प्रशासन ने शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच तीन सदस्यीय समिति से कराई। जांच के दौरान मतदाता सूची से 26 नाम हटाए जाने के संबंध में संबंधित बीएलओ से साक्ष्य मांगे गए। लेकिन जांच समिति के सामने वह नाम हटाने के समर्थन में पर्याप्त दस्तावेज या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके।

जांच में प्रथम दृष्टया गड़बड़ी, सहायक अध्यापक निलंबित
तीन सदस्यीय समिति की जांच रिपोर्ट में मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया को प्रथम दृष्टया गलत पाया गया। रिपोर्ट के आधार पर बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. विनीता ने सहायक अध्यापक नफीस मोहम्मद खां को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
निलंबन के बाद उन्हें मीरगंज ब्लॉक के कंपोजिट स्कूल सहसा से संबद्ध किया गया है। इस कार्रवाई के साथ ही विभागीय स्तर पर आगे की जांच की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि बीएलओ का काम मतदाता सूची से जुड़ी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होता है। ऐसे में किसी भी मतदाता का नाम नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के बिना हटाया जाना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला बन सकता है।
15 दिन में देनी होगी जांच रिपोर्ट
प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच के लिए खंड शिक्षा अधिकारी भानु शंकर गंगवार को जांच अधिकारी नामित किया है। उन्हें आरोप पत्र तैयार करने और बेसिक शिक्षा अधिकारी के अनुमोदन के बाद पूरे प्रकरण की जांच करने का निर्देश दिया गया है।
जांच अधिकारी को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट करने की कोशिश की जाएगी कि मतदाताओं के नाम किस आधार पर हटाए गए, क्या निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
जांच पूरी होने के बाद संबंधित कर्मचारी के खिलाफ आगे की विभागीय कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है।
मतदाता सूची में गड़बड़ी ने खड़े किए कई सवाल
इस मामले ने पंचायत चुनाव की मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मतदाता सूची में नाम होना किसी भी पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार से सीधे जुड़ा है। इसलिए नाम हटाने या जोड़ने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का पालन बेहद जरूरी है।
अगर किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटा दिया जाता है, तो उसे चुनाव में मतदान करने में परेशानी हो सकती है। यही वजह है कि मतदाता सूची से जुड़े प्रत्येक बदलाव का उचित रिकॉर्ड और दस्तावेज होना आवश्यक है।
बरेली के मोहम्मदपुर गांव में सामने आया मामला यह भी दिखाता है कि शिकायत मिलने पर जांच और जवाबदेही की प्रक्रिया कितनी महत्वपूर्ण है। हालांकि, अभी यह मामला विभागीय जांच के अधीन है। इसलिए सभी आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही निकाला जा सकेगा।
क्या प्रभावित मतदाताओं के नाम दोबारा जुड़ेंगे?
इस पूरे विवाद के बीच ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन 26 मतदाताओं के नाम हटाए जाने की शिकायत हुई है, उनके नाम मतदाता सूची में दोबारा कब और किस प्रक्रिया से शामिल होंगे।
इसके लिए संबंधित मतदाताओं को निर्वाचन कार्यालय से अपनी पात्रता और वर्तमान नामांकन की स्थिति की जानकारी लेनी चाहिए। यदि नाम गलत तरीके से हटाया गया है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुधार या पुनः नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन किया जा सकता है।
प्रशासनिक जांच के साथ-साथ प्रभावित मतदाताओं के अधिकारों की बहाली भी इस मामले का महत्वपूर्ण पहलू है।

