गोरखपुर, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक बयान ने नया सियासी विवाद खड़ा कर दिया है। गोरखपुर में आयोजित जनसभा के दौरान सीएम योगी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राहुल गांधी की तुलना दिवाली के ऐसे रॉकेट से कर दी, जो माचिस लगाने के बाद भी आसमान में उड़ने के बजाय जमीन पर ही धुआं छोड़कर बुझ जाता है। योगी ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी का धुआं निकल चुका है और कांग्रेस उन्हें कितनी भी बार लॉन्च करने की कोशिश कर ले, नतीजा बार-बार फुस्स ही होगा।
मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। योगी ने अपने संबोधन में केवल राहुल गांधी को निशाने पर नहीं लिया, बल्कि कांग्रेस की चुनावी रणनीति, नेतृत्व और विपक्ष की ओर से चुनावी हार के बाद उठाए जाने वाले सवालों पर भी कटाक्ष किया।
राहुल गांधी को बताया दिवाली का फुस्स रॉकेट
गोरखपुर में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा से पहले आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कांग्रेस बार-बार राहुल गांधी को राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाने की कोशिश करती रही है, लेकिन उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिली।
उन्होंने दिवाली के रॉकेट का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ रॉकेट ऐसे होते हैं, जिनमें आग लगाने के बाद भी वे ऊपर नहीं जाते। लोग आसमान की ओर देखते रह जाते हैं, जबकि रॉकेट जमीन पर ही धुआं छोड़कर बुझ जाता है। मुख्यमंत्री ने इसी उदाहरण के जरिए राहुल गांधी की राजनीतिक स्थिति पर तंज कसा।
उनका यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। भाजपा और कांग्रेस के बीच पहले से जारी जुबानी जंग में इस टिप्पणी ने एक नया मुद्दा जोड़ दिया है।
2004 से अब तक राहुल गांधी की राजनीतिक यात्रा का किया जिक्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राहुल गांधी की राजनीतिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कांग्रेस की ओर से उन्हें अलग-अलग जिम्मेदारियां दिए जाने पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को वर्ष 2004 में लोकसभा सांसद बनाया गया। इसके बाद 2007 में उन्हें कांग्रेस का महासचिव बनाया गया। वर्ष 2013 में पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और 2017 में राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया।
योगी ने दावा किया कि इतनी बार राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाए जाने के बावजूद कांग्रेस को चुनावों में अपेक्षित सफलता नहीं मिली। उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में अमेठी सीट से राहुल गांधी की हार का भी जिक्र किया।
मुख्यमंत्री ने भारत जोड़ो यात्रा, न्याय यात्रा और अधिकार यात्रा को भी अपने राजनीतिक हमले का हिस्सा बनाया। उनका कहना था कि कांग्रेस ने इन अभियानों के जरिए राहुल गांधी को फिर से स्थापित करने की कोशिश की, लेकिन पार्टी की राजनीतिक स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया।
चुनावी हार पर कांग्रेस को घेरा, बहाने बनाने का लगाया आरोप
योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर चुनावी हार के बाद अलग-अलग कारण गिनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब कोई पार्टी चुनाव जीतती है तो अपनी रणनीति और मेहनत को जीत का कारण बताती है, लेकिन हारने पर ईवीएम, चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने लगती है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कांग्रेस की तुलना गांव के एक ऐसे विद्यार्थी से भी की, जो बार-बार परीक्षा में असफल होने के बाद हर बार नया बहाना बनाता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कोई विद्यार्थी कभी कहता है कि उसकी उत्तर पुस्तिका गायब हो गई, कभी पाठ्यक्रम से बाहर प्रश्न आने की बात करता है और कभी परीक्षा के दौरान दूसरी वजह बताता है। योगी ने इस उदाहरण के जरिए कांग्रेस पर चुनावी हार की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करने का आरोप लगाया।
उन्होंने 2014, 2017, 2019, 2022 और 2024 के चुनावों का जिक्र करते हुए भाजपा की चुनावी सफलताओं और कांग्रेस की पराजयों को अपने तर्क का आधार बनाया। हालांकि, ये चुनाव अलग-अलग स्तरों और परिस्थितियों में हुए थे।

राहुल गांधी की उम्र को लेकर भी कसा तंज
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी की उम्र को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी 56 वर्ष के हो चुके हैं, लेकिन कांग्रेस उन्हें अब भी युवा नेता के रूप में पेश करती है।
योगी ने इसी संदर्भ में कहा कि कांग्रेस उन्हें बार-बार लॉन्च करने की कोशिश कर रही है, लेकिन अब यह राजनीतिक रॉकेट उड़ान भरने वाला नहीं है।
यह टिप्पणी राहुल गांधी की राजनीतिक छवि और कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर भाजपा के लगातार हमलावर रुख को दिखाती है। इससे पहले भी भाजपा के कई नेता राहुल गांधी के नेतृत्व और चुनावी रणनीति पर सवाल उठाते रहे हैं।
‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के जरिए विपक्ष पर निशाना
गोरखपुर में आयोजित यह कार्यक्रम केवल राहुल गांधी पर टिप्पणी तक सीमित नहीं रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन की राजनीति पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर जनता के जनादेश का सम्मान नहीं करने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री के अनुसार, चुनाव में हार के बाद लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
इस कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सहित अन्य नेता भी मौजूद रहे। पदयात्रा का उद्देश्य भाजपा की ओर से लोकतंत्र और राजनीतिक व्यवस्था को लेकर अपना पक्ष जनता तक पहुंचाना बताया गया।
योगी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है और राजनीतिक दलों को जनादेश स्वीकार करना चाहिए।
यूपी की राजनीति में बयान के क्या मायने?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह बयान केवल व्यक्तिगत राजनीतिक कटाक्ष नहीं, बल्कि कांग्रेस नेतृत्व पर भाजपा के व्यापक हमले का हिस्सा भी माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबले के साथ-साथ विपक्षी गठबंधन की भूमिका भी लगातार चर्चा में रहती है।
राहुल गांधी राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। ऐसे में उन पर मुख्यमंत्री का सीधा हमला राजनीतिक संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
दूसरी ओर, योगी के बयान पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया और आगे की राजनीतिक बयानबाजी पर भी नजर रहेगी। फिलहाल मुख्यमंत्री की ‘फुस्स रॉकेट’ वाली टिप्पणी ने सियासी बहस को तेज कर दिया है।

