गुजरात: की राजनीति में चैतर वसावा की रिहाई का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। जेल में बंद आम आदमी पार्टी के विधायक और आदिवासी नेता चैतर वसावा के समर्थन में अब उनकी दोनों पत्नियों ने मोर्चा संभाल लिया है। गांधीनगर में आयोजित आदिवासी न्याय महासम्मेलन के मंच से शकुंतला वसावा और वर्षाबेन वसावा ने अपने पति की रिहाई की मांग उठाई। इस दौरान पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी गुजरात सरकार को घेरा और आदिवासी अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक संदेश दिया।
गांधीनगर में जुटे आदिवासी समुदाय के लोग
बुधवार, 4 नवंबर को गांधीनगर में आयोजित आदिवासी न्याय महासम्मेलन में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग शामिल हुए। यह सम्मेलन चैतर वसावा की रिहाई और आदिवासी समाज के अधिकारों की मांग को लेकर निकाली गई न्याय यात्रा के समापन के अवसर पर आयोजित किया गया था।
इस कार्यक्रम में शकुंतला वसावा और वर्षाबेन वसावा एक साथ मंच पर नजर आईं। दोनों ने अपने पति की अनुपस्थिति में आदिवासी समाज के मुद्दों को आगे बढ़ाने और उनकी रिहाई के लिए संघर्ष जारी रखने की बात कही। सम्मेलन में आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रभारी गोपाल राय, विधायक गोपाल इटालिया और पार्टी के अन्य नेता भी मौजूद रहे।
शकुंतला वसावा ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
सम्मेलन को संबोधित करते हुए शकुंतला वसावा ने आरोप लगाया कि चैतर वसावा को आदिवासी समाज के अधिकारों की आवाज उठाने के कारण जेल में रखा गया है। उन्होंने कहा कि चैतर ने शिक्षा, शिक्षक भर्ती, छात्रवृत्ति, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दों पर लगातार आवाज उठाई है।
शकुंतला ने समर्थकों से अपील की कि वे इस मुद्दे को केवल एक विधायक की रिहाई तक सीमित न रखें, बल्कि इसे आदिवासी समाज के अधिकारों से जोड़कर देखें। उन्होंने कहा कि चैतर ने परिवार की चिंता से ऊपर समाज के हित को रखा और जेल जाना स्वीकार किया, लेकिन राजनीतिक दबाव के आगे झुकना स्वीकार नहीं किया।
उन्होंने आगामी 2027 के गुजरात विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए मतदाताओं से अपने वोट के जरिए जवाब देने की अपील भी की। उनका संदेश साफ था कि चैतर वसावा की गिरफ्तारी और सजा का मुद्दा आने वाले चुनाव में राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाया जाएगा।
वर्षाबेन ने बयां किया परिवार का दर्द
चैतर वसावा की दूसरी पत्नी वर्षाबेन वसावा ने भी सम्मेलन में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उनके पति जेल में हैं और परिवार को बाहर कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इस बात पर दुख जताया कि आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाला नेता आज अपने समर्थकों के बीच मौजूद नहीं है।
वर्षाबेन ने आदिवासी समुदाय के लोगों के समर्थन और आशीर्वाद का जिक्र करते हुए भरोसा जताया कि यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की 151वीं जयंती के अवसर पर डेडियापाड़ा में बड़े आयोजन की घोषणा भी की।
गोपाल राय और गोपाल इटालिया ने सरकार को घेरा
सम्मेलन में आम आदमी पार्टी के गुजरात प्रभारी गोपाल राय ने राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात में अवैध शराब, ड्रग्स और खनन से जुड़े अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही, जबकि जनता और आदिवासी समुदाय के अधिकारों की आवाज उठाने वाले चैतर वसावा को जेल में रखा गया है।
गोपाल राय ने आदिवासी समाज से इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की। वहीं, विधायक गोपाल इटालिया ने भी चैतर वसावा की रिहाई की मांग करते हुए सरकार को चेतावनी दी कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो 2027 के विधानसभा चुनाव में मतदाता इसका जवाब दे सकते हैं।
इटालिया ने कहा कि चैतर वसावा के मामले में सुनवाई और सजा की प्रक्रिया जिस तेजी से आगे बढ़ी, उस पर भी सवाल उठाए जाने चाहिए। हालांकि, ये पार्टी नेताओं के राजनीतिक आरोप और बयान हैं; इन्हें अदालत के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
उमरगाम से अंबाजी तक निकाली गई आदिवासी न्याय यात्रा
चैतर वसावा की रिहाई और आदिवासी अधिकारों की मांग को लेकर पार्टी की ओर से 24 अक्टूबर को दक्षिण गुजरात के उमरगाम से आदिवासी न्याय यात्रा शुरू की गई थी। यह यात्रा आदिवासी बहुल इलाकों से गुजरते हुए उत्तर गुजरात के अंबाजी तक पहुंची।
इस दौरान शकुंतला और वर्षाबेन वसावा ने अलग-अलग क्षेत्रों में लोगों से मुलाकात की और आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दे उठाए। यात्रा का समापन अंबाजी में हुआ, जिसके बाद गांधीनगर में महासम्मेलन आयोजित किया गया। पार्टी ने इस आयोजन को आदिवासी समाज के बीच अपनी राजनीतिक और सामाजिक मौजूदगी मजबूत करने के अवसर के रूप में भी इस्तेमाल किया।
आखिर क्यों जेल में हैं चैतर वसावा?
चैतर वसावा गुजरात के नर्मदा जिले की डेडियापाड़ा विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी के विधायक हैं। वह वन विभाग के अधिकारियों के साथ कथित मारपीट, धमकी और सरकारी काम में बाधा डालने से जुड़े 2023 के एक मामले में दोषी ठहराए गए थे।
इस मामले में 23 जून 2026 को नर्मदा की सत्र अदालत ने चैतर वसावा सहित कुल नौ आरोपियों को सात-सात साल की कैद और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, वन विभाग के अधिकारी सरकारी वन भूमि से कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान विवाद में फंसे थे। आरोप था कि अधिकारियों को धमकाया गया और उनके काम में बाधा डाली गई।
चैतर वसावा ने इस फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देने की बात कही थी। गुजरात हाईकोर्ट ने 24 अगस्त को उनकी सजा निलंबित करने की याचिका खारिज कर दी थी। बाद में सितंबर में उन्हें विधानसभा सत्र में शामिल होने के लिए सात दिन की अस्थायी जमानत दी गई थी। इस मामले में उनकी पत्नी शकुंतला वसावा भी आरोपियों में शामिल थीं; उनकी सजा पर हाईकोर्ट ने जुलाई में रोक लगाई थी।
इस तरह चैतर वसावा की रिहाई की मांग अब कानूनी लड़ाई के साथ-साथ गुजरात की राजनीति का भी बड़ा मुद्दा बनती दिखाई दे रही है।

