पेपर लीक और बेरोजगारी पर मायावती का बड़ा बयान, सरकार से पूछा- युवाओं का भविष्य कब सुरक्षित होगा?
लखनऊ। संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन देश में पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और बेरोजगारी को लेकर चल रही बहस के बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि लगातार पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की घटनाओं ने युवाओं के भविष्य को अनिश्चितता में डाल दिया है, जिसके कारण देशभर में आक्रोश और आंदोलन देखने को मिल रहे हैं।
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सिलसिलेवार पोस्ट करते हुए कहा कि सरकार को इस गंभीर स्थिति पर तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए और केवल निचले स्तर पर कार्रवाई करने के बजाय परीक्षा प्रणाली से जुड़े उच्च अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय करनी चाहिए।
“पेपर लीक से युवा सबसे ज्यादा परेशान”
बसपा प्रमुख ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक, गड़बड़ी और परीक्षाओं के रद्द होने से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि अभ्यर्थी वर्षों तक तैयारी करते हैं, परिवार आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उनका साथ देता है, लेकिन बार-बार होने वाली अनियमितताएं उनके मनोबल को तोड़ रही हैं।
उनके अनुसार, यही कारण है कि कई राज्यों में युवाओं का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दे रहा है और विभिन्न संगठनों द्वारा आंदोलन किए जा रहे हैं।
उच्च अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
मायावती ने सरकार से मांग की कि परीक्षा प्रणाली से जुड़े उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों की भी जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी परीक्षा में लापरवाही या भ्रष्टाचार सामने आता है तो केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरी व्यवस्था की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई हो ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
CJP आंदोलन पर भी दी प्रतिक्रिया
दिल्ली के जंतर-मंतर और संसद मार्च को लेकर चल रहे CJP आंदोलन का जिक्र करते हुए मायावती ने कहा कि यदि युवाओं की समस्याओं का समय रहते समाधान किया जाता, तो उन्हें सड़कों पर उतरने की नौबत नहीं आती।
उन्होंने सरकार से अपील की कि आंदोलन कर रहे युवाओं के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाया जाए और बातचीत के माध्यम से समाधान निकाला जाए।
मायावती ने यह भी कहा कि संसद का मानसून सत्र शुरू होने के समय सदन के भीतर और बाहर टकराव की स्थिति लोकतंत्र के लिए अच्छी नहीं मानी जा सकती।

महंगाई और बेरोजगारी पर भी सरकार को घेरा
बसपा प्रमुख ने कहा कि देश में बढ़ती महंगाई के बीच लाखों परिवार अपने बच्चों की शिक्षा पर बड़ी मुश्किल से खर्च कर रहे हैं। ऐसे में यदि प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार गड़बड़ियां होती हैं तो सबसे अधिक नुकसान मेहनत करने वाले युवाओं को उठाना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि युवा केवल अस्थायी या आउटसोर्सिंग वाली नौकरियां नहीं चाहते, बल्कि सम्मानजनक और स्थायी रोजगार की उम्मीद रखते हैं।
सरकारी शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग
मायावती ने सरकार से सरकारी स्कूलों और उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता सुधारने की मांग भी की। उनका कहना था कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था कमजोर होने के कारण निजी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को कोचिंग संस्थानों पर भी पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त निगरानी व्यवस्था लागू करनी चाहिए, ताकि छात्रों का आर्थिक और मानसिक शोषण न हो।
सरकार से समाधान निकालने की अपील
बसपा प्रमुख ने कहा कि यदि सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और समयबद्ध परीक्षाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करती है तो युवाओं का विश्वास फिर से मजबूत होगा।
उन्होंने कहा कि सरकार को टकराव के बजाय संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए और युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहिए।
मायावती के ताजा बयान ने पेपर लीक, बेरोजगारी और युवाओं के आंदोलन को लेकर चल रही राष्ट्रीय बहस को नया राजनीतिक आयाम दे दिया है। उन्होंने सरकार से परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने, उच्च अधिकारियों पर कार्रवाई करने और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग की है। आने वाले दिनों में संसद के मानसून सत्र के दौरान यह मुद्दा और अधिक प्रमुखता से उठने की संभावना है।

