नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान शुक्रवार को विपक्ष के एक सांकेतिक प्रदर्शन ने नया राजनीतिक और धार्मिक विवाद खड़ा कर दिया। राम मंदिर में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के मुद्दे को लेकर संसद भवन के मकर द्वार पर विपक्षी सांसदों ने अनोखे अंदाज में प्रदर्शन किया। इस दौरान एक सांसद ने साधु का वेश धारण कर प्रतीकात्मक अभिनय किया, जिस पर संत समाज और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ी आपत्ति जताई।
अखिल भारतीय संत समिति ने इस प्रदर्शन को साधु-संतों और भगवा वस्त्र का अपमान बताते हुए लोकसभा अध्यक्ष से मामले में संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई की मांग की है।
क्या था पूरा मामला?
विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोपों को लेकर संसद परिसर में सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान सांसद पप्पू यादव ने माथे पर चंदन लगाया, भगवा वस्त्र पहने और हाथ में दानपेटी लेकर मकर द्वार के पास जमीन पर बैठ गए।
प्रदर्शन के दौरान कई विपक्षी सांसदों ने प्रतीकात्मक रूप से दानपेटी में चढ़ावा डाला। इसके बाद अभिनय के तहत पप्पू यादव दानपेटी लेकर भागते हुए दिखाई दिए, जबकि अन्य सांसदों ने उन्हें रोकने और पकड़ने का सांकेतिक प्रदर्शन किया। इस पूरे प्रदर्शन का उद्देश्य विपक्ष के अनुसार कथित वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा उठाना था।
संत समाज ने जताई कड़ी नाराजगी
अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री जितेंद्रानंद सरस्वती ने इस प्रदर्शन की तीखी आलोचना की।
उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को सरकार या किसी पार्टी की आलोचना करने का पूरा अधिकार है, लेकिन साधु-संतों की वेशभूषा का उपयोग इस प्रकार करना पूरे संत समाज की छवि को प्रभावित करता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के प्रदर्शन से यह संदेश जाता है मानो साधु-संत चोरी या अनियमितताओं से जुड़े हों, जो पूरी संत परंपरा और भगवा वस्त्र का अपमान है।
संत समिति ने मांग की कि यदि प्रदर्शन करने वाले सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी नहीं मांगते हैं तो लोकसभा अध्यक्ष इस मामले का संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई करें।

जांच पूरी होने तक इंतजार की अपील
जितेंद्रानंद सरस्वती ने यह भी कहा कि राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े कथित मामले की जांच संबंधित एजेंसियां कर रही हैं। जांच पूरी होने और कानूनी प्रक्रिया के बाद जो भी निर्णय आएगा, संत समाज उसे स्वीकार करेगा।
साथ ही उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
भाजपा ने भी साधा विपक्ष पर निशाना
भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने भी विपक्ष के प्रदर्शन को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष लंबे समय से संतों, भगवा और सनातन परंपरा का अपमान करता आया है। उनके अनुसार, संसद परिसर में किए गए इस सांकेतिक प्रदर्शन में धार्मिक प्रतीकों का जिस तरह उपयोग किया गया, वह अनुचित और निंदनीय है।
उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से इस पूरे मामले पर कार्रवाई करने की मांग भी दोहराई।
विपक्ष का प्रदर्शन कैसे हुआ?
प्रदर्शन के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव और अवधेश प्रसाद सहित अन्य सांसदों ने प्रतीकात्मक रूप से दानपेटी में पैसे डाले। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भी इस सांकेतिक प्रदर्शन में शामिल हुए और उन्होंने भी दानपेटी में प्रतीकात्मक रूप से राशि डाली।
इसके बाद प्रदर्शन के हिस्से के रूप में पप्पू यादव द्वारा दानपेटी लेकर भागने का अभिनय किया गया, जबकि अन्य सांसदों ने उन्हें पकड़ने और रोकने का प्रतीकात्मक प्रयास किया। बाद में पप्पू यादव ने हल्के-फुल्के अंदाज में इस अभिनय को लेकर टिप्पणी भी की।
मानसून सत्र में लगातार जारी रहा हंगामा
मानसून सत्र के दसवें दिन भी संसद की कार्यवाही विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ गई। विपक्ष ने राम मंदिर चढ़ावा मामले और छात्रों के प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई को लेकर चर्चा की मांग की।
साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सदन में अनुपस्थिति को लेकर भी विपक्ष ने सवाल उठाए। हालांकि, हंगामे के बीच लोकसभा ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया।
लगातार शोर-शराबे के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही 3 अगस्त सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी गई।

