नई दिल्ली: देशभर में गिग वर्कर्स और श्रमिकों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। तेलंगाना सरकार ने श्रमिक कल्याण को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं, जिनका सीधा लाभ लाखों कर्मचारियों और गिग वर्कर्स को मिलेगा। सरकार ने राज्य में नकद वेतन (कैश पेमेंट) पर पूरी तरह रोक लगाने के साथ-साथ गिग वर्कर्स को भी न्यूनतम वेतन सुरक्षा के दायरे में शामिल कर लिया है।
सरकार के नए आदेश के अनुसार अब किसी भी नियोक्ता को कर्मचारियों का वेतन नकद में देने की अनुमति नहीं होगी। सभी वेतन भुगतान केवल इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों जैसे एनईएफटी (NEFT), आरटीजीएस (RTGS), आईएमपीएस (IMPS) या बैंक चेक के जरिए ही किए जा सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे वेतन भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और कर्मचारियों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
क्यों लिया गया यह फैसला?
श्रम विभाग के अनुसार कई मामलों में कर्मचारियों को नकद भुगतान के दौरान वेतन कटौती, भुगतान में देरी और रिकॉर्ड संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणाली लागू होने से वेतन का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा, जिससे किसी भी विवाद की स्थिति में कर्मचारियों को न्याय मिलने में आसानी होगी।
इसके साथ ही श्रम निरीक्षकों के लिए भी भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच करना आसान हो जाएगा। डिजिटल भुगतान से फर्जीवाड़े और अनियमितताओं पर भी लगाम लगाने में मदद मिलेगी।
गिग वर्कर्स को मिला बड़ा लाभ
तेलंगाना सरकार का यह कदम खास तौर पर गिग वर्कर्स के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है। ऑनलाइन डिलीवरी, कैब सेवा, फ्रीलांस कार्य और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले लाखों गिग वर्कर्स अब न्यूनतम वेतन सुरक्षा के दायरे में आएंगे।
अब तक गिग वर्कर्स के वेतन और कार्य शर्तों को लेकर कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी, लेकिन नए नियमों के लागू होने के बाद उन्हें भी न्यूनतम मजदूरी का कानूनी संरक्षण मिलेगा। इससे उनकी आय में स्थिरता आएगी और आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी।
चार कौशल श्रेणियों में बांटे गए श्रमिक
सरकार ने सभी गैर-कृषि, औद्योगिक और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों को चार अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया है।
- अकुशल (Unskilled)
- अर्ध-कुशल (Semi-Skilled)
- कुशल (Skilled)
- अत्यधिक कुशल (Highly Skilled)
इसके अलावा पूरे राज्य को तीन भौगोलिक जोन में बांटा गया है।
- जोन-1 : नगर निगम क्षेत्र
- जोन-2 : नगरपालिका क्षेत्र
- जोन-3 : ग्रामीण क्षेत्र
इस वर्गीकरण के आधार पर न्यूनतम वेतन निर्धारित किया जाएगा।
न्यूनतम वेतन में हुई बड़ी बढ़ोतरी
नगर निगम क्षेत्रों यानी जोन-1 के लिए सरकार ने न्यूनतम वेतन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है।
| श्रेणी | पुराना वेतन | नया वेतन |
|---|---|---|
| अकुशल | ₹12,750 | ₹16,000 |
| अर्ध-कुशल | ₹13,152 | ₹17,000 |
| कुशल | ₹13,772 | ₹18,500 |
| अत्यधिक कुशल | ₹14,607 | ₹20,000 |
नई वेतन संरचना लागू होने के बाद लाखों कर्मचारियों की मासिक आय में सीधा इजाफा होगा।
वेतन संहिता 2019 लागू
राज्य सरकार ने केंद्र सरकार की “वेतन संहिता 2019” (Code on Wages 2019) को लागू करते हुए “न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948” को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। इसका उद्देश्य श्रम कानूनों को सरल बनाना और आधुनिक कार्य परिस्थितियों के अनुरूप श्रमिकों को बेहतर सुरक्षा प्रदान करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है। यदि अन्य राज्य भी इसी प्रकार के नियम लागू करते हैं तो करोड़ों श्रमिकों और गिग वर्कर्स को इसका लाभ मिल सकता है।