नई दिल्ली: भारतीय अर्थव्यवस्था ने एक बार फिर अपनी मजबूती का प्रदर्शन करते हुए वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में 7.7 प्रतिशत की प्रभावशाली विकास दर दर्ज की है। शुक्रवार को सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी आंकड़ों ने संकेत दिया कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनावों और महंगाई जैसी चुनौतियों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है।
नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (NSO) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी-मार्च 2026 की चौथी तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी। यह प्रदर्शन पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में बेहतर माना जा रहा है और यह दर्शाता है कि घरेलू मांग, निवेश और सेवा क्षेत्र की मजबूती देश की आर्थिक प्रगति को गति दे रही है।
फरवरी के अनुमान से बेहतर निकले आंकड़े
सरकार ने फरवरी 2026 में वित्त वर्ष की विकास दर का अनुमान 7.6 प्रतिशत लगाया था, लेकिन ताजा आंकड़ों में इसे बढ़ाकर 7.7 प्रतिशत कर दिया गया है। यह सुधार इस बात का संकेत है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत उपभोक्ता मांग, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और विनिर्माण क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों ने आर्थिक वृद्धि को समर्थन दिया है।
किन सेक्टरों ने संभाली अर्थव्यवस्था की कमान?
जीडीपी आंकड़ों के अनुसार, सेकेंडरी (उद्योग एवं विनिर्माण) और टर्शियरी (सेवा) सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ साबित हुए हैं।
सेकेंडरी सेक्टर का शानदार प्रदर्शन
विनिर्माण, निर्माण और औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े सेकेंडरी सेक्टर में 8.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, सड़क, रेलवे और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने का असर इस क्षेत्र में साफ दिखाई दिया।
सर्विस सेक्टर बना सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन
सेवा क्षेत्र यानी टर्शियरी सेक्टर ने 9.3 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की। बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, सूचना प्रौद्योगिकी, पर्यटन, परिवहन और संचार क्षेत्रों में तेजी ने इस सेक्टर को मजबूत बनाया।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल इंडिया, फिनटेक विस्तार और बढ़ती खपत ने सेवा क्षेत्र को नई ऊर्जा दी है।

कृषि क्षेत्र ने भी दिया योगदान
हालांकि कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों की वृद्धि दर अपेक्षाकृत कम रही, फिर भी इस सेक्टर ने अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान की।
प्राइमरी सेक्टर में 3.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसमें कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन का महत्वपूर्ण योगदान रहा। बेहतर मानसून और कृषि उत्पादन में सुधार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी।
GVA में भी दिखी मजबूती
GDP के साथ-साथ ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) के आंकड़े भी सकारात्मक रहे।
वित्त वर्ष 2025-26 में:
- रियल GVA वृद्धि: 7.9%
- नॉमिनल GVA वृद्धि: 9.1%
GVA को अर्थव्यवस्था की वास्तविक उत्पादक गतिविधियों का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादन और आर्थिक गतिविधियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की मजबूती
जब दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं धीमी विकास दर, महंगाई और मंदी की आशंकाओं से जूझ रही हैं, तब भारत की 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर वैश्विक मंच पर उसकी आर्थिक ताकत को दर्शाती है।
अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं पहले ही भारत को आने वाले वर्षों में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बता चुकी हैं। ताजा आंकड़े उन अनुमानों को और मजबूत करते हैं।
निवेशकों और बाजारों के लिए क्या संकेत?
अर्थव्यवस्था की मजबूत वृद्धि दर शेयर बाजार, विदेशी निवेश और कारोबारी विश्वास के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत GDP डेटा से:
- विदेशी निवेश आकर्षित होगा।
- उद्योगों में निवेश बढ़ेगा।
- रोजगार सृजन को गति मिलेगी।
- उपभोक्ता खर्च में और सुधार हो सकता है।
वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7 प्रतिशत की GDP वृद्धि और चौथी तिमाही में 7.8 प्रतिशत की विकास दर ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत आधार पर आगे बढ़ रही है। उद्योग, सेवा क्षेत्र और कृषि के संयुक्त योगदान ने विकास की गति को बनाए रखा है। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत का यह प्रदर्शन न केवल निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत है, बल्कि देश की दीर्घकालिक आर्थिक क्षमता को भी मजबूत करता है।