लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस के नए पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (DGP) बनने के बाद आईपीएस अधिकारी Rajeev Krishna ने कानून-व्यवस्था को लेकर अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं। पदभार संभालते ही उन्होंने अपराधियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि राज्य में अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पहले की तरह जारी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कोई अपराधी पुलिस पर गोली चलाएगा तो उसका जवाब कानून के तहत दिया जाएगा और एनकाउंटर जैसी कार्रवाई भी होगी।
पुलिस मुख्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि उत्तर प्रदेश में आम नागरिकों के बीच सुरक्षा की भावना को और मजबूत करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग, चाहे वह महिला हो, व्यापारी हो या आम नागरिक, सभी को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना पुलिस की जिम्मेदारी है।
अपराधियों के आर्थिक नेटवर्क पर भी होगी कार्रवाई
नए डीजीपी ने केवल अपराधियों की गिरफ्तारी तक सीमित रहने की बजाय उनके आर्थिक स्रोतों पर भी कार्रवाई का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि संगठित अपराध और आपराधिक गतिविधियों के पीछे मौजूद आर्थिक नेटवर्क की गहन जांच की जाएगी।
पुलिस अब अपराधियों की अवैध संपत्तियों, वित्तीय लेनदेन और आय के स्रोतों की भी पड़ताल करेगी। इससे अपराधियों की आर्थिक ताकत कमजोर होगी और अपराध नियंत्रण में मदद मिलेगी।
महिलाओं की सुरक्षा रहेगी सर्वोच्च प्राथमिकता
राजीव कृष्ण ने कहा कि राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए विशेष अभियान जारी रहेंगे। उन्होंने बताया कि सभी थानों में स्थापित शक्ति केंद्रों के कारण महिला पीड़ितों को त्वरित सहायता और न्याय मिल रहा है।
उन्होंने दावा किया कि इन पहलों के बाद महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में लगभग 33 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। आने वाले समय में महिला सुरक्षा से जुड़े तंत्र को और मजबूत किया जाएगा ताकि किसी भी पीड़िता को न्याय पाने में कठिनाई न हो।

व्यापारियों की सुरक्षा पर रहेगा विशेष फोकस
डीजीपी ने कहा कि व्यापारिक गतिविधियों को सुरक्षित वातावरण देना भी पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। राज्य में व्यापारियों के खिलाफ अपराधों को रोकने और कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने के लिए विशेष निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाएगी।
व्यापारिक संगठनों और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर अपराध की घटनाओं पर तेजी से कार्रवाई की जाएगी।
साइबर अपराध बना बड़ी चुनौती
राजीव कृष्ण ने माना कि उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहा है। ऑनलाइन ठगी, डिजिटल फ्रॉड, फर्जी निवेश योजनाएं और साइबर हमले पुलिस के सामने नई चुनौती बनकर उभरे हैं।
इसी चुनौती से निपटने के लिए राज्य में बड़े स्तर पर पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि करीब 62 हजार पुलिसकर्मियों को साइबर अपराधों की जांच और रोकथाम के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
AI की मदद से अपराधियों पर नजर
साइबर अपराधों के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करेगी। AI आधारित तकनीक के जरिए संदिग्ध गतिविधियों की पहचान, डिजिटल फ्रॉड की ट्रैकिंग और साइबर अपराधियों तक पहुंचने की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा।
डीजीपी के अनुसार पिछले कुछ समय में साइबर अपराध से जुड़ी लगभग 400.66 करोड़ रुपये की राशि फ्रीज की जा चुकी है। यह कार्रवाई साइबर ठगी के पीड़ितों को राहत दिलाने और अपराधियों के आर्थिक नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नए कानूनों के तहत तेज होगी विवेचना
राजीव कृष्ण ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए आपराधिक कानूनों के तहत पुलिस विवेचना की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया जाएगा। गंभीर मामलों की जांच 60 से 90 दिनों के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
इससे पीड़ितों को तेजी से न्याय मिलने के साथ अदालतों में लंबित मामलों की संख्या कम करने में भी मदद मिलेगी।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश के नए पूर्णकालिक डीजीपी राजीव कृष्ण ने पदभार संभालते ही स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति जारी रहेगी। महिला सुरक्षा, व्यापारियों की सुरक्षा, साइबर अपराध नियंत्रण और समयबद्ध विवेचना उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हैं। AI तकनीक के उपयोग और अपराधियों के आर्थिक नेटवर्क पर कार्रवाई के संकेत बताते हैं कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश पुलिस अपराध नियंत्रण के लिए और अधिक तकनीकी एवं आक्रामक रणनीति अपनाने जा रही है।