गुजरात में फिर गई एक शेरनी की जान! खुले कुएं में गिरकर हुई दर्दनाक मौत, 2 साल में 238 एशियाई शेरों की मौत ने बढ़ाई चिंता

बोटाद (गुजरात): गुजरात में एशियाई शेरों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बोटाद जिले के इटारिया गांव में एक शेरनी की खुले और असुरक्षित कुएं में गिरने से दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना उस समय हुई जब शेरनी रात के दौरान गांव के पास मौजूद खेतों के क्षेत्र में पहुंच गई और खुले कुएं में गिर गई। वन विभाग को घटना की जानकारी अगले दिन सुबह मिली, जिसके बाद अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर शेरनी के शव को बाहर निकाला और पोस्टमार्टम के लिए पशु देखभाल केंद्र भेज दिया।

वन अधिकारियों के अनुसार यह घटना मंगलवार रात को हुई। प्रारंभिक जांच में कुएं में गिरने को ही मौत का मुख्य कारण माना जा रहा है। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के सटीक कारणों की पुष्टि की जाएगी।

खुले कुएं बने वन्यजीवों के लिए बड़ा खतरा

गुजरात में एशियाई शेरों का मुख्य निवास क्षेत्र Gir National Park और उसके आसपास का इलाका है। पिछले कुछ वर्षों में शेरों, तेंदुओं और अन्य वन्यजीवों के खुले कुओं में गिरने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे कुएं मौजूद हैं जिनके चारों ओर सुरक्षा दीवार या जाल नहीं लगाया गया है। रात के समय वन्यजीवों के लिए इन्हें पहचान पाना मुश्किल होता है, जिसके कारण वे दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।

वन विभाग द्वारा कई स्थानों पर कुओं को सुरक्षित बनाने के प्रयास किए गए हैं, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में खुले कुएं वन्यजीवों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं।

दो वर्षों में 238 एशियाई शेरों की मौत

गुजरात विधानसभा में राज्य के वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री Mukesh Patel ने जानकारी दी थी कि वर्ष 2022 और 2023 के दौरान राज्य में शावकों सहित कुल 238 एशियाई शेरों की मौत दर्ज की गई।

इन मौतों में कई प्राकृतिक कारण शामिल थे, लेकिन कुछ मामलों में दुर्घटनाएं भी जिम्मेदार रहीं। मंत्री के अनुसार कम से कम 29 शेरों की मौत वाहन दुर्घटनाओं, रेलवे ट्रैक हादसों और खुले कुओं में गिरने जैसी अप्राकृतिक घटनाओं के कारण हुई।

यह आंकड़ा वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

संरक्षण पर करोड़ों रुपये खर्च, फिर भी हादसे जारी

राज्य सरकार के अनुसार एशियाई शेरों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए दो वर्षों में लगभग 278 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इस राशि का उपयोग वन्यजीव निगरानी, चिकित्सा सुविधाओं, बचाव अभियानों, आवास संरक्षण और अन्य सुरक्षा उपायों पर किया गया।

इसके बावजूद खुले कुओं में गिरकर होने वाली मौतें यह संकेत देती हैं कि जमीनी स्तर पर अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी खुले कुओं को जाल, ग्रिल या सुरक्षा दीवारों से ढक दिया जाए तो ऐसे हादसों में काफी कमी लाई जा सकती है।

गिर क्षेत्र में बढ़ी शेरों की संख्या

पिछले कुछ वर्षों में एशियाई शेरों की आबादी में वृद्धि दर्ज की गई है। शेर अब गिर जंगलों से निकलकर आसपास के गांवों, कृषि क्षेत्रों और अन्य इलाकों तक पहुंच रहे हैं। इससे मानव और वन्यजीवों के बीच संपर्क बढ़ा है।

हालांकि यह संरक्षण की सफलता का संकेत माना जाता है, लेकिन इसके साथ दुर्घटनाओं और संघर्ष की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं। वन विभाग अब ऐसे क्षेत्रों की पहचान कर रहा है जहां शेरों के लिए खतरे अधिक हैं।

वन विभाग ने शुरू की जांच

घटना के बाद वन विभाग की टीम ने आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण किया है। अधिकारियों का कहना है कि कुएं की सुरक्षा व्यवस्था की भी जांच की जाएगी। यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

साथ ही विभाग स्थानीय किसानों और ग्रामीणों को खुले कुओं को सुरक्षित बनाने के लिए जागरूक करने का अभियान भी चला रहा है।

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