गुजरात: की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिलने जा रहा है। आजादी के बाद पहली बार ऐसा होगा जब Indian National Congress का गुजरात से राज्यसभा में एक भी सांसद नहीं होगा। अगले महीने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Shaktisinh Gohil का कार्यकाल समाप्त हो रहा है और मौजूदा विधानसभा गणित को देखते हुए पार्टी के लिए नई सीट जीतना लगभग असंभव माना जा रहा है।
यह स्थिति ऐसे समय में बन रही है जब Rahul Gandhi लगातार गुजरात में पार्टी को मजबूत करने और 2027 विधानसभा चुनाव में बीजेपी को चुनौती देने की बात कर रहे हैं। लेकिन राज्यसभा की तस्वीर कांग्रेस के लिए बेहद चिंताजनक होती दिख रही है।
पहली बार राज्यसभा में ‘कांग्रेस शून्य’
गुजरात विधानसभा में कुल 182 सीटें हैं, लेकिन कांग्रेस के पास फिलहाल सिर्फ 12 विधायक हैं। 2022 विधानसभा चुनाव में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद वह नेता प्रतिपक्ष का पद भी गंवा चुकी है।
अब राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के सामने और बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। गुजरात से राज्यसभा की कुल 11 सीटें हैं और अगले महीने पहली बार सभी सीटों पर Bharatiya Janata Party (बीजेपी) का कब्जा हो जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बीजेपी के “कांग्रेस मुक्त” अभियान के लिए प्रतीकात्मक रूप से बड़ा क्षण होगा।

मोदी के नारे की फिर चर्चा
2014 लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi ने “कांग्रेस मुक्त भारत” का नारा दिया था। उस समय इस नारे ने देशभर में बड़ी राजनीतिक चर्चा पैदा की थी।
हालांकि बाद में पीएम मोदी ने स्पष्ट किया था कि इसका मतलब कांग्रेस पार्टी को पूरी तरह खत्म करना नहीं, बल्कि देश को “कांग्रेस संस्कृति” यानी भ्रष्टाचार, परिवारवाद और वोट बैंक की राजनीति से मुक्त करना है।
अब उनके गृह राज्य गुजरात में कांग्रेस का राज्यसभा से पूरी तरह बाहर हो जाना इस नारे की नई राजनीतिक व्याख्या के तौर पर देखा जा रहा है।
गुजरात में बीजेपी की मजबूत पकड़
गुजरात लंबे समय से बीजेपी का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है। राज्य में पार्टी लगातार कई चुनाव जीतती रही है। लोकसभा की 26 सीटों में से 25 सीटों पर बीजेपी का कब्जा है, जबकि कांग्रेस के पास केवल एक सीट बची है।
राज्यसभा में भी बीजेपी की स्थिति बेहद मजबूत हो चुकी है। अगले चुनाव में जिन चार सीटों पर मतदान होना है, उनमें तीन सीटें पहले से बीजेपी के पास हैं और एक कांग्रेस के पास।
इन सीटों पर जिन नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है उनमें Shaktisinh Gohil (कांग्रेस), रामभाई मोकरिया, नरहरि अमीन और रमीलाबेन बारा (सभी बीजेपी) शामिल हैं।
चारों सीटों पर बीजेपी की जीत तय
विधानसभा में संख्या बल को देखते हुए राजनीतिक विशेषज्ञ मान रहे हैं कि चारों सीटों पर बीजेपी की जीत लगभग तय है। कांग्रेस के पास इतना समर्थन नहीं है कि वह एक सीट भी जीत सके।
सूत्रों के अनुसार बीजेपी इस बार कुछ नए चेहरों को राज्यसभा भेज सकती है। चर्चा है कि गुजरात के पूर्व उपमुख्यमंत्री Nitin Patel को भी राज्यसभा भेजा जा सकता है।
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 8 जून तय की गई है।
कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश
गुजरात महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे नेताओं की जन्मभूमि रहा है। ऐसे राज्य में कांग्रेस का धीरे-धीरे कमजोर होना पार्टी के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि गुजरात में कांग्रेस संगठनात्मक कमजोरी, लगातार टूट-फूट और मजबूत नेतृत्व की कमी से जूझ रही है। ऐसे में राज्यसभा से पूरी तरह बाहर होना पार्टी के मनोबल पर भी असर डाल सकता है।
अब क्या करेगी कांग्रेस?
राहुल गांधी लगातार गुजरात में संगठन मजबूत करने की बात कर रहे हैं। लेकिन मौजूदा हालात बताते हैं कि पार्टी को जमीनी स्तर पर काफी मेहनत करनी होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कांग्रेस को गुजरात में वापसी करनी है तो उसे स्थानीय नेतृत्व, संगठन विस्तार और युवाओं के बीच पकड़ मजबूत करनी होगी।
गुजरात राज्यसभा चुनाव 2026 कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है। आजादी के बाद पहली बार पार्टी राज्यसभा में बिना किसी प्रतिनिधित्व के रह जाएगी, जबकि बीजेपी राज्य की सभी सीटों पर कब्जा जमाने की ओर बढ़ रही है। यह बदलाव आने वाले गुजरात विधानसभा चुनावों की राजनीति पर भी बड़ा असर डाल सकता है।