गुजरात: की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल आने वाला है। चुनाव आयोग ने गुजरात समेत देश के 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों पर चुनाव का ऐलान कर दिया है। गुजरात में 4 राज्यसभा सीटों के लिए 18 जून 2026 को मतदान होगा और उसी दिन परिणाम भी घोषित कर दिए जाएंगे। लेकिन इस चुनाव की सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर है कि क्या चुनाव के बाद गुजरात से राज्यसभा में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व पूरी तरह खत्म हो जाएगा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा विधानसभा गणित को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) गुजरात की सभी चार सीटों पर जीत दर्ज कर सकती है। यदि ऐसा होता है तो राज्यसभा में गुजरात से कांग्रेस का एक भी सदस्य नहीं बचेगा। यही वजह है कि यह चुनाव केवल चार सीटों का नहीं, बल्कि गुजरात की सियासी दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।
भाजपा के पक्ष में मजबूत गणित
गुजरात विधानसभा में इस समय भाजपा के पास भारी बहुमत है। 182 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के विधायकों की संख्या इतनी मजबूत है कि वह आसानी से राज्यसभा की चारों सीटें जीत सकती है। दूसरी तरफ कांग्रेस लगातार कमजोर होती दिखाई दे रही है। कई वरिष्ठ नेता पार्टी छोड़ चुके हैं और संगठन भी लगातार संघर्ष कर रहा है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर विपक्षी दल एकजुट नहीं हुए तो कांग्रेस के लिए एक भी सीट निकाल पाना बेहद मुश्किल होगा। यही कारण है कि चुनाव की घोषणा होते ही कांग्रेस खेमे में चिंता बढ़ गई है।
कांग्रेस के लिए क्यों अहम है यह चुनाव?
राज्यसभा में किसी भी राज्य से प्रतिनिधित्व खत्म होना किसी भी पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जाता है। गुजरात कांग्रेस के लिए यह चुनाव इसलिए और महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि यह राज्य पार्टी का कभी मजबूत गढ़ माना जाता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में भाजपा ने यहां अपनी पकड़ इतनी मजबूत कर ली है कि कांग्रेस लगातार पिछड़ती जा रही है।
अगर कांग्रेस इस चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाती, तो यह संदेश जाएगा कि पार्टी गुजरात में राजनीतिक रूप से बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच चुकी है। आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों पर भी इसका असर पड़ सकता है।

भाजपा के लिए क्या मायने रखता है यह चुनाव?
भाजपा के लिए यह चुनाव सिर्फ सीटों की संख्या बढ़ाने का मामला नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक दबदबा दिखाने का मौका भी है। गुजरात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का गृह राज्य है। ऐसे में भाजपा यहां किसी भी तरह की कमजोरी दिखाना नहीं चाहती।
राज्यसभा में मजबूत संख्या होने से केंद्र सरकार को विधेयक पारित कराने में भी आसानी होती है। यही वजह है कि भाजपा इस चुनाव को प्रतिष्ठा से जोड़कर देख रही है।
18 जून को होगा मतदान
चुनाव आयोग के अनुसार गुजरात की चारों सीटों के लिए 18 जून को मतदान होगा। उसी दिन वोटों की गिनती और नतीजों का ऐलान भी किया जाएगा। नामांकन प्रक्रिया जल्द शुरू होगी और राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों के नामों पर मंथन कर रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि भाजपा कुछ नए चेहरों को मौका दे सकती है। वहीं कांग्रेस गठबंधन और रणनीति के जरिए कम से कम एक सीट बचाने की कोशिश करेगी।
विपक्ष की बढ़ी चिंता
गुजरात में कांग्रेस के कमजोर होते जनाधार ने विपक्षी राजनीति को भी चिंता में डाल दिया है। आम आदमी पार्टी की मौजूदगी ने भी कांग्रेस का वोट बैंक प्रभावित किया है। ऐसे में विपक्षी वोटों का बिखराव भाजपा को और मजबूत बना रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कांग्रेस इस बार राज्यसभा से बाहर होती है तो यह केवल एक चुनावी हार नहीं, बल्कि संगठनात्मक संकट का संकेत भी होगा।
राष्ट्रीय राजनीति पर असर
गुजरात राज्यसभा चुनाव का असर केवल राज्य तक सीमित नहीं रहेगा। यह राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ा संदेश देगा। भाजपा इसे अपनी संगठनात्मक ताकत और लोकप्रियता के प्रमाण के तौर पर पेश करेगी, जबकि कांग्रेस पर नेतृत्व और रणनीति को लेकर सवाल उठेंगे।
अब सभी की नजर 18 जून पर टिकी है, जब यह साफ होगा कि गुजरात की राजनीति में कांग्रेस अपनी आखिरी पकड़ बचा पाएगी या भाजपा पूरी तरह विपक्ष का सफाया कर देगी।