देश: के बड़े कारोबारी समूहों में शामिल अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) एक बार फिर कानूनी विवादों में घिर गया है। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने ग्रुप से जुड़ी कंपनियों के तत्कालीन निदेशकों और अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया है।
इस मामले में आरोप लगाया गया है कि फर्जी दस्तावेजों और भ्रामक जानकारियों के जरिए एक्सिस बैंक से 150 करोड़ रुपये का लोन लिया गया और बाद में इस रकम को दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया गया। पुलिस ने इस मामले में कफ परेड पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की है।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब इससे पहले भी इसी साल मार्च में ADAG समूह से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ इसी तरह की एक बड़ी FIR दर्ज की जा चुकी है।
एक्सिस बैंक की शिकायत पर हुई कार्रवाई
सूत्रों के मुताबिक यह मामला एक्सिस बैंक के वाइस प्रेसिडेंट प्रकाश प्रभाकर राव की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। बैंक ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने जानबूझकर बैंक को आर्थिक नुकसान पहुंचाने की साजिश रची।
शिकायत में कहा गया है कि लोन लेते समय कंपनियों की वित्तीय स्थिति को लेकर गलत और भ्रामक जानकारी दी गई। इसके अलावा बैंक को प्रभावित करने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज भी जमा किए गए।
EOW अब इस पूरे वित्तीय लेनदेन और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है।
2010 से 2019 के बीच की साजिश
पुलिस के अनुसार यह कथित घोटाला जनवरी 2010 से नवंबर 2019 के बीच हुआ।
इस दौरान रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) के तत्कालीन होल-टाइम डायरेक्टर, ADAG ग्रुप से जुड़ी लाभार्थी कंपनियों के निदेशक और कुछ अन्य अधिकारी कथित तौर पर इस साजिश में शामिल थे।
आरोप है कि बैंक से लोन मंजूर होने के बाद रकम को सीधे उस उद्देश्य में इस्तेमाल नहीं किया गया, जिसके लिए लोन लिया गया था। इसके बजाय पैसे को समूह की दूसरी कंपनियों के खातों में भेज दिया गया।
कैसे हुआ कथित फ्रॉड?
पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपियों ने बैंक से लोन हासिल करने के लिए कई महत्वपूर्ण वित्तीय जानकारियां छिपाईं।
RHFL की वास्तविक आर्थिक स्थिति के बारे में कथित तौर पर गलत जानकारी दी गई। इसके अलावा लोन प्रक्रिया के दौरान कुछ दस्तावेजों को भी फर्जी तरीके से पेश किया गया।
जब एक्सिस बैंक ने 150 करोड़ रुपये का लोन जारी कर दिया, तो आरोपियों ने उस रकम को अपने ही ग्रुप से जुड़ी दूसरी कंपनियों के खातों में ट्रांसफर कर दिया। बाद में लोन की रकम का भुगतान नहीं किया गया और मामला डिफॉल्ट में बदल गया।

दूसरी FIR से बढ़ीं मुश्किलें
यह मामला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसी साल 12 मार्च को EOW ने इसी तरह के आरोपों में पहली FIR दर्ज की थी।
मार्च में दर्ज शिकायत में भी आरोप था कि ADAG समूह से जुड़ी कंपनियों ने वित्तीय संस्थानों को गलत जानकारी देकर लोन लिया और बाद में उसका गलत इस्तेमाल किया।
अब दूसरी FIR दर्ज होने के बाद समूह की मुश्किलें और बढ़ती नजर आ रही हैं।
EOW की जांच में क्या होगा?
मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा अब इस पूरे मामले में बैंक रिकॉर्ड, फंड ट्रांजैक्शन, कंपनियों के दस्तावेज और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच करेगी।
संभव है कि आने वाले दिनों में कई पूर्व अधिकारियों और निदेशकों से पूछताछ भी की जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामला केवल वित्तीय धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें मनी ट्रेल और कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़े बड़े सवाल भी उठ सकते हैं।
पहले भी विवादों में रहा है ADAG समूह
अनिल अंबानी समूह पिछले कुछ वर्षों में कर्ज और वित्तीय संकट को लेकर लगातार सुर्खियों में रहा है।
ग्रुप की कई कंपनियां पहले भी भारी कर्ज, दिवालिया प्रक्रिया और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर चर्चा में रही हैं। हालांकि, समूह की ओर से इन आरोपों पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।