देश: की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG को लेकर चल रहे पेपर लीक विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर बेहद सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार को हुई सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल परीक्षा प्रणाली में सुधार कर देने से समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि इस पूरे मामले के “असली जिम्मेदार” की पहचान करना सबसे ज्यादा जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय को नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि सरकार को विस्तार से बताना होगा कि आने वाले समय में परीक्षाएं किस तरह सुरक्षित, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से आयोजित की जाएंगी ताकि लाखों छात्रों के भविष्य के साथ दोबारा कोई खिलवाड़ न हो।
‘देश के युवाओं को निराश नहीं होने देंगे’
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के छात्रों और अभिभावकों की चिंता को गंभीरता से लेते हुए कहा कि यह मामला सिर्फ एक परीक्षा का नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं के सपनों और भविष्य से जुड़ा हुआ है।
पीठ ने कहा,
“हम परीक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की गड़बड़ी या धांधली को बर्दाश्त नहीं करेंगे। देश के युवाओं को किसी भी कीमत पर निराश नहीं होने दिया जाएगा।”
कोर्ट की इस टिप्पणी को लाखों छात्रों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जो लंबे समय से परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
NTA और निगरानी व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
मामले की सुनवाई जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ कर रही थी। कोर्ट ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) और परीक्षा सुधारों के लिए बनाई गई उच्च स्तरीय समिति की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए।
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि जब परीक्षा में इतनी कड़ी निगरानी व्यवस्था लागू थी, तो फिर इतनी बड़ी चूक आखिर कैसे हो गई? अदालत ने कहा कि अगर पेपर लीक जैसी घटना हो रही है, तो इसका मतलब साफ है कि निगरानी प्रणाली में कहीं न कहीं गंभीर खामी मौजूद थी।
डॉ. राधाकृष्णन समिति से भी पूछे तीखे सवाल
सुनवाई के दौरान पूर्व ISRO प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली समिति की भूमिका पर भी सवाल उठे। कोर्ट ने कहा कि यदि समिति पहले से निगरानी और सुधार प्रक्रिया में शामिल थी, तो फिर जमीनी स्तर पर लापरवाही कैसे हुई?
पीठ ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा:
“अगर इतनी सख्त निगरानी के बावजूद यह विफलता हुई है, तो इसका मतलब है कि निगरानी प्रक्रिया में ही गंभीर कमी रही होगी।”
इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार की ओर से पक्ष रखा।
प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया बनी सबसे बड़ी कमजोरी
अदालत के सवालों का जवाब देते हुए डॉ. राधाकृष्णन ने माना कि पेपर लीक की सबसे बड़ी समस्या प्रश्नपत्र तैयार करने और उसकी सुरक्षा प्रक्रिया में थी।
उन्होंने बताया कि समिति ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कुल 101 सिफारिशें दी हैं, जिनमें से 60 अल्पकालिक सुझावों को 2025-26 सत्र से लागू किया जा रहा है।
समिति ने दावा किया कि अब प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर वितरण तक की पूरी प्रक्रिया को “अभूतपूर्व तरीके” से सुरक्षित बनाया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
‘बलि का बकरा’ बनाकर नहीं बच सकती व्यवस्था
सुप्रीम Court ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल छोटे कर्मचारियों को दोषी ठहराकर व्यवस्था अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती।
कोर्ट ने कहा कि बार-बार समितियां बनाना और बैठकें करना पर्याप्त नहीं है। जब तक शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक संस्थागत कमियां सामने आती रहेंगी।
पीठ ने साफ किया कि देश की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा प्रणाली में अब स्थायी और संरचनात्मक सुधार की आवश्यकता है।
NTA में विशेषज्ञों की कमी का खुलासा
सुनवाई के दौरान समिति ने यह भी स्वीकार किया कि NTA में डोमेन विशेषज्ञों की भारी कमी थी। इस कमी को दूर करने के लिए अब IIT-JEE और केंद्रीय विद्यालय संगठन के अनुभवी विशेषज्ञों को परीक्षा प्रणाली से जोड़ा जा रहा है।
केंद्र सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि मामले की जांच जारी है और पूरे घटनाक्रम पर उच्चतम स्तर पर निगरानी रखी जा रही है।
छात्रों की उम्मीदें अब सुप्रीम कोर्ट पर टिकीं
NEET पेपर लीक विवाद ने देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों को झकझोर दिया है। अब छात्रों की निगाहें सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मामले में सख्त कार्रवाई और स्थायी सुधार लागू किए जाते हैं, तो भविष्य में परीक्षा प्रणाली पर छात्रों का भरोसा दोबारा मजबूत हो सकता है।
NEET पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख यह संकेत देता है कि अब केवल औपचारिक सुधारों से काम नहीं चलेगा। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि असली जिम्मेदारों की पहचान और जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है। आने वाले दिनों में केंद्र सरकार का हलफनामा और परीक्षा सुधारों की दिशा देश की शिक्षा व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।