‘गो-LX’ से गाय खरीदेंगे शंकराचार्य! देशभर में बनेंगे 4123 गऊ धाम, बिना लाइसेंस नहीं मिलेगी गाय

लखनऊ/प्रयागराज। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने देशभर में गोसेवा और गोरक्षा को लेकर एक नई पहल का ऐलान किया है। उन्होंने ‘गो-LX’ नाम से एक खास डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च करने की घोषणा की है, जिसके जरिए सिर्फ गाय खरीदी जाएगी, लेकिन उसकी बिक्री नहीं होगी।

शंकराचार्य का कहना है कि इस प्लेटफॉर्म का मकसद गायों को कटने से बचाना और उनकी सेवा सुनिश्चित करना है। इसके तहत पूरे देश की 4,123 विधानसभा क्षेत्रों में ‘गऊ धाम’ स्थापित किए जाएंगे, जहां गायों की देखभाल की जाएगी।

OLX जैसी प्रक्रिया, लेकिन सिर्फ खरीद

शंकराचार्य ने बताया कि ‘गो-LX’ नाम इसलिए चुना गया क्योंकि नई पीढ़ी OLX जैसे प्लेटफॉर्म की प्रक्रिया को आसानी से समझती है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि यह किसी सामान्य खरीद-बिक्री ऐप की तरह नहीं होगा।

उन्होंने कहा—

“यहां सिर्फ गाय की खरीद होगी, बिक्री नहीं। हमारा उद्देश्य गायों को बचाना है, व्यापार करना नहीं।”

इस प्लेटफॉर्म पर किसान या पशुपालक अपनी गाय की जानकारी अपलोड कर सकेंगे। इसके बाद संस्था या कोई भी सनातनी व्यक्ति उस गाय को अपने संरक्षण में ले सकेगा।

सिर्फ देसी गायों को मिलेगा संरक्षण

शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि यह सुविधा केवल भारतीय मूल की देसी नस्ल की गायों के लिए होगी। विदेशी नस्ल की गायों को इस योजना में शामिल नहीं किया जाएगा।

उनका कहना है कि देसी गाय भारतीय संस्कृति और कृषि व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, इसलिए उनका संरक्षण जरूरी है।

गाय लेने वालों को मिलेगा लाइसेंस

इस योजना की सबसे खास बात यह है कि गाय को अपने घर ले जाने वाले व्यक्ति को ज्योतिष्पीठ की ओर से “गो पालन लाइसेंस” दिया जाएगा।

गाय लेने वाले व्यक्ति को एक बॉन्ड और एग्रीमेंट भरना होगा, जिसमें यह सुनिश्चित किया जाएगा कि—

  • गाय की सेवा की जाएगी
  • उसे किसी और को बेचा नहीं जाएगा
  • यदि सेवा संभव न हो तो गाय को वापस गऊ धाम में लौटाना होगा

शंकराचार्य ने कहा कि समय-समय पर जांच भी कराई जाएगी ताकि यह पता चल सके कि गाय सुरक्षित है या नहीं।

देशभर में बनेंगे 4123 गऊ धाम

शंकराचार्य ने बताया कि देश की हर विधानसभा में एक आदर्श ‘गऊ धाम’ बनाने की योजना है। कुल 4,123 विधानसभा क्षेत्रों में यह व्यवस्था विकसित की जाएगी।

इन गऊ धामों में—

  • गायों के रहने की व्यवस्था होगी
  • चारा, पानी और दवाओं का इंतजाम होगा
  • गाय मालिक अपनी गाय से मिलने आ सकेंगे
  • गाय की स्थिति वेबसाइट और ऐप के जरिए देख सकेंगे

उन्होंने कहा कि हर गऊ धाम के संचालन के लिए SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) बनाई जाएगी और एक केंद्रीय टीम निगरानी करेगी।

कैसे जुटेगा फंड?

शंकराचार्य ने माना कि इतनी बड़ी योजना के लिए भारी फंड की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए “क्राउड फंडिंग मॉडल” अपनाया जाएगा।

यानि कई लोग मिलकर एक गाय की जिम्मेदारी उठा सकेंगे। जो व्यक्ति गाय को अपने पास नहीं रख सकता, वह गऊ धाम में उसकी सेवा का खर्च उठा सकेगा।

उन्होंने कहा—

“हम कोई बड़े उद्योगपति नहीं हैं, लेकिन इच्छाशक्ति है। सनातनी समाज साथ आएगा तो गायों को बचाया जा सकता है।”

‘गाय कोई वस्तु नहीं’

शंकराचार्य ने कहा कि गाय को वस्तु की तरह खरीदना-बेचना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि “खरीद” शब्द सिर्फ लोगों को समझाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

उनका कहना था—

“असल में गाय को खरीदने या बेचने की किसी की हैसियत नहीं होनी चाहिए। यह सिर्फ संरक्षण और सेवा का विषय है।”

बूढ़ी ही नहीं, हर गाय को मिलेगा संरक्षण

उन्होंने साफ किया कि योजना सिर्फ बूढ़ी गायों तक सीमित नहीं होगी। ऐसी हर गाय जिसे कटने या उपेक्षा का खतरा है, उसे इस अभियान के जरिए संरक्षण दिया जाएगा।

साथ ही गायों की सेहत, वंश वृद्धि और देखभाल की नियमित मॉनिटरिंग भी की जाएगी।

टेक्नोलॉजी और धर्म का अनोखा संगम

शंकराचार्य ने बताया कि फिलहाल यह सुविधा 1008.guru ऐप और वेबसाइट में जोड़ी जा रही है। नया समर्पित ऐप तैयार होने में करीब 20 से 25 दिन लग सकते हैं।

विशेषज्ञ इसे टेक्नोलॉजी और धार्मिक भावना के अनोखे संगम के रूप में देख रहे हैं।

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