नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुक्रवार को एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा घोटालों और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गुस्सा फूट पड़ा। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके जैसे ही जंतर-मंतर पहुंचे, प्रदर्शनकारी समर्थकों ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी—“धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो”। NEET पेपर लीक विवाद, दोबारा परीक्षा की अनिश्चितता और कथित छात्र आत्महत्या के मामलों को लेकर यह विरोध प्रदर्शन केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय पर सीधा हमला बनकर उभरा।
इस प्रदर्शन को केवल एक राजनीतिक जुटान नहीं, बल्कि छात्रों और अभिभावकों के गुस्से की सार्वजनिक अभिव्यक्ति के तौर पर देखा जा रहा है। जंतर-मंतर पर पहुंचे प्रदर्शनकारियों के हाथों में पोस्टर, तिरंगे और थाली-चम्मच दिखाई दिए। अभिजीत दीपके ने एक दिन पहले ही समर्थकों से अपील की थी कि वे इस बार प्रतीकात्मक विरोध के तौर पर थाली और चम्मच लेकर आएं, ताकि शिक्षा व्यवस्था की “बहरी हो चुकी व्यवस्था” तक आवाज पहुंचाई जा सके। इस आह्वान के बाद जंतर-मंतर पर माहौल काफी गर्म दिखाई दिया। इस विरोध की पृष्ठभूमि में CJP की पहले की घोषणाएं, 20 जून के प्रदर्शन का आह्वान और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग शामिल है।
अभिजीत दीपके बोले- री-एग्जाम के बाद भी नहीं रुके छात्रों के सुसाइड
प्रदर्शन के दौरान अभिजीत दीपके ने मीडिया से बातचीत में कहा कि देश का मौजूदा माहौल युवाओं के जीवन और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि री-एग्जाम होने के बावजूद छात्रों की आत्महत्या की घटनाएं नहीं रुकी हैं और सरकार अब भी “असल समस्या” पर ध्यान देने के बजाय केवल सतही फैसले ले रही है। दीपके ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में भरोसा टूट चुका है और लाखों छात्र भविष्य को लेकर गहरे तनाव में हैं।
उन्होंने दावा किया कि हाल के दिनों में 11 छात्रों ने आत्महत्या की, जिनमें से 5 मौतें पिछले 48 घंटों में हुईं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग एजेंसियों द्वारा अभी तक नहीं हुई है, लेकिन CJP इन घटनाओं को NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रबंधन में गड़बड़ी से जोड़कर देख रही है। दीपके का कहना है कि बार-बार होने वाले परीक्षा विवादों, पेपर लीक, परिणामों में भ्रम और दोबारा परीक्षा की आशंका ने छात्रों के आत्मविश्वास को तोड़ा है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उन्हें आर्थिक और संस्थागत मदद दी जाए। CJP पहले भी ऐसे परिवारों के लिए 1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग उठा चुकी है।
‘धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो’ बना प्रदर्शन का मुख्य नारा
जंतर-मंतर पर सबसे ज्यादा गूंजा नारा था—“धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो”। CJP का कहना है कि जब तक शिक्षा मंत्री जवाबदेही नहीं लेते, तब तक छात्रों और अभिभावकों का भरोसा बहाल नहीं हो सकता। प्रदर्शन में शामिल लोगों का आरोप था कि शिक्षा मंत्रालय और उससे जुड़े संस्थान लगातार परीक्षा प्रबंधन में विफल रहे हैं, लेकिन किसी स्तर पर जवाबदेही तय नहीं की गई। इसी वजह से यह विरोध अब केवल NEET तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे परीक्षा तंत्र, भर्ती प्रक्रियाओं और मूल्यांकन व्यवस्था पर सवाल बन गया है।
कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि अगर किसी छात्र का परीक्षा केंद्र विदेश जैसे स्थान पर पहुंच जाता है, तो यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि व्यवस्था की गंभीर विफलता है। प्रदर्शन स्थल पर जुटी भीड़ में कई ऐसे छात्र और अभिभावक भी शामिल थे, जो केवल NEET नहीं बल्कि अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर नाराज दिखे। CJP का दावा है कि पिछले एक महीने से देशभर में चल रहे उनके प्रदर्शन का मकसद सिर्फ मंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में “संरचनात्मक सुधार” की शुरुआत कराना है।

थाली-चम्मच के साथ प्रतीकात्मक विरोध, जंतर-मंतर पर जुटान
इस बार प्रदर्शन की सबसे अलग तस्वीर थी—थाली और चम्मच के साथ जुटे समर्थक। CJP ने इसे “जनता की चेतावनी” बताया। पार्टी का कहना है कि जब संस्थान छात्रों की आवाज नहीं सुनते, तब सड़क पर प्रतीकात्मक प्रतिरोध ही सबसे बड़ा संदेश बनता है। जंतर-मंतर पर कुछ समर्थक पोस्टर लेकर पहुंचे, जिन पर “Leak in India”, “Students Need Justice” और “Education Not Exploitation” जैसे संदेश लिखे थे।
यह विरोध प्रदर्शन अचानक नहीं हुआ। इससे पहले भी CJP जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन कर चुकी है, जहां अभिजीत दीपके ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के लिए अल्टीमेटम दिया था। 20 जून के प्रदर्शन को उसी अभियान की अगली कड़ी माना जा रहा है। पार्टी का कहना है कि अगर केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय ने छात्रों की मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया, तो आंदोलन को देश के कई शहरों तक फैलाया जाएगा। जंतर-मंतर का यह प्रदर्शन इसी बड़े राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनता दिख रहा है।
सरकार पर जवाबदेही का दबाव बढ़ा
NEET पेपर लीक विवाद और उससे जुड़े सुसाइड के दावों ने केंद्र सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ा दिया है। विपक्ष पहले से सरकार को घेर रहा है, लेकिन अब CJP जैसे नए और आक्रामक छात्र-आधारित मंच भी सीधे सड़क पर उतर चुके हैं। इससे यह मुद्दा केवल शैक्षणिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक संकट का रूप लेता दिख रहा है। अभिजीत दीपके की मांग साफ है—धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, छात्रों के नुकसान की जवाबदेही तय हो और परीक्षा प्रणाली में भरोसा लौटाने के लिए ठोस सुधार लागू किए जाएं।
जंतर-मंतर पर उमड़ी भीड़, नारेबाजी और छात्रों के गुस्से ने यह साफ कर दिया है कि NEET विवाद अब शांत होने वाला नहीं है। अगर सरकार ने जल्द भरोसा बहाल करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह विरोध आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है।
जंतर-मंतर पर अभिजीत दीपके की मौजूदगी ने NEET पेपर लीक विवाद को फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। “धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो” के नारों के बीच यह प्रदर्शन सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि छात्रों के भरोसे, मानसिक दबाव और शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही का बड़ा सवाल बन गया है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार इस बढ़ते दबाव पर क्या प्रतिक्रिया देती है।