देशभर: के करोड़ों परिवारों के लिए रसोई गैस एक आवश्यक जरूरत बन चुकी है, लेकिन अब इसकी बढ़ती लागत आम लोगों की चिंता बढ़ाने लगी है। 16 जून 2026 को जारी ताजा आंकड़ों ने संकेत दिया है कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की वास्तविक लागत ₹1600 से अधिक पहुंच चुकी है। हालांकि फिलहाल उपभोक्ताओं को इससे काफी कम कीमत पर सिलेंडर मिल रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी उथल-पुथल ने भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव और कच्चे ईंधन की बढ़ती कीमतों ने दुनिया भर में गैस बाजार को प्रभावित किया है। इसका असर भारत पर भी साफ दिखाई दे रहा है, क्योंकि देश अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है।
आज क्या हैं घरेलू LPG सिलेंडर के दाम?
तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी ताजा दरों के अनुसार 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतें प्रमुख शहरों में इस प्रकार हैं:
- दिल्ली – ₹942.00
- मुंबई – ₹941.50
- बेंगलुरु – ₹944.50
- चेन्नई – ₹957.50
- कोलकाता – ₹968.00
- हैदराबाद – ₹994.00
हालांकि उपभोक्ताओं को मिलने वाली कीमतें अभी ₹1000 से नीचे हैं, लेकिन इन सिलेंडरों की वास्तविक आपूर्ति लागत इससे कहीं अधिक बताई जा रही है।

कमर्शियल सिलेंडर ने बढ़ाई कारोबारियों की मुश्किलें
19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और छोटे व्यवसायों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
प्रमुख शहरों में कमर्शियल सिलेंडर के रेट:
- दिल्ली – ₹3,113.50
- Mumbai – ₹3,067.50
- बेंगलुरु – ₹3,198.00
- चेन्नई – ₹3,283.00
- कोलकाता – ₹3,255.50
- हैदराबाद – ₹3,367.00
व्यापार संगठनों का कहना है कि गैस की बढ़ती कीमतें खाद्य पदार्थों और सेवाओं की लागत को भी प्रभावित कर सकती हैं।
आखिर ₹1600 कैसे पहुंची सिलेंडर की लागत?
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू गैस की बढ़ती लागत के पीछे सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में तेजी है।
भारत बड़ी मात्रा में एलपीजी आयात करता है और इसके लिए मुख्य रूप से सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (Saudi Contract Price) को आधार माना जाता है। हाल के महीनों में इस कीमत में लगभग 46 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।
पश्चिम एशिया में तनाव और आपूर्ति संबंधी चिंताओं के कारण गैस निर्यात करने वाले देशों ने कीमतें बढ़ाई हैं, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है।
तेल कंपनियां क्यों उठा रही हैं नुकसान?
उद्योग जगत से जुड़े सूत्रों के अनुसार, घरेलू गैस सिलेंडर की वास्तविक लागत ₹1600 से ऊपर पहुंचने के बावजूद उपभोक्ताओं को कम कीमत पर सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि हालिया संशोधनों से पहले तेल विपणन कंपनियों को प्रत्येक घरेलू सिलेंडर पर लगभग ₹703 तक का नुकसान उठाना पड़ रहा था।
यही कारण है कि सरकार और कंपनियां लगातार बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में और वृद्धि होती है तो भविष्य में कीमतों में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
वैश्विक संकट का भारत पर असर
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि मौजूदा संकट केवल भारत तक सीमित नहीं है। दुनिया के कई देशों में गैस और ऊर्जा की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि पश्चिम एशिया में हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो गैस, पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधनों की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
भारत सरकार फिलहाल उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ कम करने और ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने के लिए विभिन्न विकल्पों पर काम कर रही है।
क्या आगे और महंगा हो सकता है LPG?
ऊर्जा बाजार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय हालात गैस की कीमतों की दिशा तय करेंगे। यदि कच्चे ईंधन और एलपीजी आयात लागत में तेजी जारी रहती है, तो घरेलू बाजार में भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।
हालांकि सरकार आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सब्सिडी, मूल्य नियंत्रण और अन्य आर्थिक उपायों पर विचार कर सकती है। इसलिए फिलहाल उपभोक्ताओं को आधिकारिक घोषणाओं पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।