विनेश फोगाट को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, एशियन गेम्स ट्रायल्स में तुरंत राहत नहीं
भारतीय महिला कुश्ती: की स्टार खिलाड़ी Vinesh Phogat को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने भारतीय कुश्ती संघ (WFI) द्वारा अयोग्य घोषित किए जाने के खिलाफ दायर उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें आगामी एशियन गेम्स चयन ट्रायल्स में तुरंत शामिल होने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।
दिल्ली हाईकोर्ट में सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने स्पष्ट कहा कि बिना भारतीय कुश्ती संघ का पक्ष सुने कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया जा सकता। हालांकि अदालत ने WFI और केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को होगी।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, भारतीय कुश्ती संघ ने विनेश फोगाट को कथित अनुशासनहीनता और डोपिंग रोधी नियमों के उल्लंघन के आरोपों के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसके बाद उन्हें एशियन गेम्स चयन ट्रायल्स से बाहर कर दिया गया।
एशियन गेम्स के लिए चयन ट्रायल्स 30 और 31 मई को होने हैं। विनेश फोगाट ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की थी कि उन्हें तुरंत ट्रायल्स में हिस्सा लेने की अनुमति दी जाए, क्योंकि यदि वे चयन प्रक्रिया से बाहर रहीं तो उनका अंतरराष्ट्रीय करियर प्रभावित हो सकता है।
कोर्ट ने क्यों नहीं दी तत्काल राहत?
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यह मामला केवल एक खिलाड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राष्ट्रीय हित और खेल व्यवस्था दोनों जुड़े हुए हैं।
जस्टिस कौरव ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, “आप पहले ही अयोग्य घोषित की जा चुकी हैं। दूसरे पक्ष को सुने बिना अदालत कोई निर्देश कैसे दे सकती है? हमें WFI की नीति और पूरे मामले की जांच करनी होगी।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि वह समझता है कि विनेश मातृत्व अवकाश पर थीं, लेकिन खेल संघ के नियमों और राष्ट्रहित को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

मातृत्व अवकाश का मुद्दा बना बहस का केंद्र
विनेश फोगाट की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने अदालत में दलील दी कि अंतरराष्ट्रीय खेल नियमों के मुताबिक मातृत्व अवकाश पर जाने वाली महिला खिलाड़ियों की रैंकिंग और दर्जे की सुरक्षा की जाती है।
उन्होंने कहा कि WFI की नई नीति महिला खिलाड़ियों के अधिकारों के खिलाफ है और यह अंतरराष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन करती है। वकील ने अदालत से आग्रह किया कि विनेश को एशियन गेम्स ट्रायल्स में शामिल होने दिया जाए ताकि उनका करियर प्रभावित न हो।
हालांकि अदालत ने कहा कि पहले WFI का पक्ष सुनना जरूरी है।
WFI को नोटिस, जवाब दाखिल करने के निर्देश
दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय कुश्ती संघ और केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
साथ ही अदालत ने WFI को यह भी निर्देश दिया कि कारण बताओ नोटिस की पूरी प्रक्रिया को 6 जुलाई तक तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाए और अंतिम फैसला कोर्ट के रिकॉर्ड में पेश किया जाए।
खेल जगत में चर्चा तेज
इस मामले के सामने आने के बाद खेल जगत में बहस तेज हो गई है। कई पूर्व खिलाड़ियों और खेल विशेषज्ञों का मानना है कि महिला खिलाड़ियों के लिए मातृत्व अवकाश और वापसी को लेकर स्पष्ट नीति होनी चाहिए।
दूसरी तरफ कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि खेल संघों को अनुशासन और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने का अधिकार भी होना चाहिए।
विनेश फोगाट लंबे समय से भारतीय कुश्ती की सबसे चर्चित खिलाड़ियों में शामिल रही हैं। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए पदक जीते हैं और महिला कुश्ती को नई पहचान दिलाई है।
एशियन गेम्स तैयारी पर पड़ सकता है असर
यदि विनेश फोगाट चयन ट्रायल्स में हिस्सा नहीं ले पाती हैं, तो इसका असर भारत की एशियन गेम्स तैयारी पर भी पड़ सकता है। वे भारतीय महिला कुश्ती की अनुभवी और मजबूत दावेदार मानी जाती हैं।
अब सभी की नजर 6 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई है, जहां अदालत WFI और केंद्र सरकार के जवाब के आधार पर आगे का फैसला ले सकती है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल विनेश फोगाट को राहत देने से इनकार जरूर किया है, लेकिन WFI को नोटिस जारी कर मामले को गंभीरता से लिया है। यह विवाद अब केवल एक खिलाड़ी और संघ के बीच नहीं, बल्कि महिला खिलाड़ियों के अधिकार, मातृत्व अवकाश और खेल नीतियों की बहस का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।