UP Police को हाईटेक बनाने वाला अफसर बना नया DGP! कौन हैं राजीव कृष्ण, जिनकी रणनीति से अपराधियों में मचा था खौफ?

उत्तर प्रदेश: सरकार ने राज्य की कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लेते हुए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण को नया स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त किया है। अपने नवाचार, तकनीक आधारित पुलिसिंग और अपराध नियंत्रण के लिए पहचाने जाने वाले राजीव कृष्ण अब देश के सबसे बड़े पुलिस बल की कमान संभालेंगे।

राजीव कृष्ण का नाम पुलिस महकमे में एक ऐसे अधिकारी के रूप में लिया जाता है, जिन्होंने तकनीक को पुलिसिंग का अहम हिस्सा बनाकर अपराधियों पर प्रभावी शिकंजा कसने का काम किया। खासकर आगरा जोन में एडीजी रहते हुए उन्होंने जो पहल की, वह आज भी यूपी पुलिस के लिए मिसाल मानी जाती है।

ऑपरेशन पहचान ऐप से बदली पुलिसिंग की तस्वीर

फरवरी 2021 में आगरा जोन के एडीजी रहते हुए राजीव कृष्ण ने एक अनोखी पहल की थी। उन्होंने अपने कार्यालय में तैनात सिपाही मोहित कुमार के सहयोग से ‘ऑपरेशन पहचान’ ऐप विकसित कराया।

यह ऐप अपराधियों के डिजिटल सत्यापन और निगरानी के लिए बनाया गया था। ऐप के माध्यम से पुलिस को अपराधियों की पूरी प्रोफाइल एक क्लिक में उपलब्ध होने लगी। इसमें आरोपी का वर्तमान पता, गतिविधियां, परिवार, रिश्तेदारों की जानकारी और फोटो तक दर्ज की जाती थी।

इस तकनीक ने पुलिस जांच को तेज और अधिक पारदर्शी बनाया। अपराधियों की निगरानी आसान हुई और नए अपराधों में उनकी संलिप्तता पर नजर रखना भी सरल हो गया।

मालखानों को भी बनाया डिजिटल

राजीव कृष्ण के नेतृत्व में केवल अपराधियों का डेटा ही डिजिटल नहीं हुआ, बल्कि पुलिस थानों के मालखानों को भी हाईटेक बनाया गया।

जोन के सभी थानों में जब्त माल और मुकदमों से जुड़े सामान का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया गया। इससे किसी भी केस से संबंधित सामग्री की जानकारी कुछ ही सेकंड में उपलब्ध होने लगी।

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इससे जांच की प्रक्रिया तेज हुई और रिकॉर्ड प्रबंधन में पारदर्शिता आई।

मिशन शक्ति और एंटी रोमियो स्क्वॉड को मिली नई ताकत

राजीव कृष्ण ने महिला सुरक्षा अभियानों को भी तकनीक से जोड़ा। मिशन शक्ति अभियान के दौरान महिला पुलिसकर्मियों की लोकेशन और गतिविधियों की निगरानी इसी ऐप के माध्यम से की जाती थी।

इससे यह सुनिश्चित हुआ कि जागरूकता अभियान वास्तव में निर्धारित क्षेत्रों में संचालित हो रहे हैं। साथ ही एंटी रोमियो स्क्वॉड की गतिविधियों, गुमशुदा व्यक्तियों और बरामद लोगों का रिकॉर्ड भी इसी प्लेटफॉर्म पर दर्ज किया जाने लगा।

इस व्यवस्था ने महिला सुरक्षा अभियानों को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाया।

साइबर अपराध के खिलाफ छेड़ी मुहिम

राजीव कृष्ण उन अधिकारियों में शामिल हैं जिन्होंने समय रहते साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को समझा। उन्होंने आगरा जोन में सबसे पहले पुलिसकर्मियों को साइबर अपराध की जांच और कार्रवाई के लिए प्रशिक्षित कराया।

विशेषज्ञों के माध्यम से ऑनलाइन वर्कशॉप आयोजित की गईं और पुलिस बल को नई तकनीकों से परिचित कराया गया।

सिर्फ पुलिस ही नहीं, बल्कि आम जनता को भी साइबर फ्रॉड, ऑनलाइन ठगी और डिजिटल सुरक्षा को लेकर जागरूक किया गया। गांव-गांव तक पहुंचकर लोगों को साइबर अपराध से बचने के उपाय बताए गए।

यूपी पुलिस के आधुनिकीकरण में निभाई अहम भूमिका

राजीव कृष्ण की कार्यशैली हमेशा परिणाम आधारित रही है। उन्होंने तकनीक, डेटा एनालिटिक्स और आधुनिक पुलिसिंग के माध्यम से अपराध नियंत्रण के नए मॉडल विकसित किए।

उनकी कई पहलें बाद में अन्य जिलों और रेंजों में भी लागू की गईं। ऑपरेशन पहचान ऐप को आगरा के बाद मुरादाबाद रेंज और फतेहपुर जैसे जिलों में भी अपनाया गया।

नई जिम्मेदारी से बढ़ीं उम्मीदें

राजीव कृष्ण के डीजीपी बनने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस के आधुनिकीकरण, साइबर सुरक्षा और तकनीक आधारित कानून व्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल पुलिसिंग, स्मार्ट मॉनिटरिंग और डेटा आधारित अपराध नियंत्रण के क्षेत्र में उनके अनुभव का लाभ पूरे प्रदेश को मिलेगा।

राजीव कृष्ण केवल एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ही नहीं, बल्कि तकनीक आधारित पुलिसिंग के मजबूत समर्थक माने जाते हैं। ऑपरेशन पहचान, साइबर अपराध नियंत्रण और डिजिटल पुलिसिंग जैसे प्रयोगों ने उन्हें अलग पहचान दिलाई है। अब उत्तर प्रदेश के नए डीजीपी के रूप में उनसे कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और आधुनिक बनाने की उम्मीदें जुड़ गई हैं।

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